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बिहार में बाढ़ जैसे हालात: कोसी के निचले इलाकों में घुसा नदी का पानी, 50 हजार की आबादी चौतरफा घिरी

MADHUBANI: बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों और नेपाल के तराई इलाकों में हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नेपाल से पानी छोड़ने के कारण कोसी नदी उफान पर आ गई है।

बिहार में बाढ़ जैसे हालात: कोसी के निचले इलाकों में घुसा नदी का पानी, 50 हजार की आबादी चौतरफा घिरी
Mukesh Srivastava
3 मिनट

MADHUBANI: बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों और नेपाल के तराई इलाकों में हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नेपाल से पानी छोड़ने के कारण कोसी नदी उफान पर आ गई है। जिसके कारण मधुबनी के मधेपुर प्रखंड स्थित कोसी नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। मधेपुर प्रखंड के लगभग 50 हजार की आबादी कोसी की बाढ़ से चौतरफा घिरी है।


मधुबनी में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे बढ़ ही रहा है। इन दिनों नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में रूक रूककर भारी बारिश हो रही है। जिसके कारण बीरपुर कोसी बराज से लगातार पानी छोड़े जाने से जलस्तर में वृद्धि होने लगी है। अबतक लाखों क्यूसेक से अधिक पानी का डिस्चार्ज किया जा चुका है। बुधवार सुबह चार बजे बराज पर पानी का डिस्चार्ज एक बार फिर बढ़कर तीन लाख क्यूसेक को पार कर गया था।


इधर कोसी नदी के साथ-साथ भूतही बलान, कमला बलान और तिलयुगा नदी के जलस्तर में भी वृद्धि हो रही है। कोसी दोनों तटबंधों के बीच अवस्थित अधिकांश गांवों का सड़क संपर्क बाढ़ के कारण बुधवार को भी भंग रहा। जिस कारण बलथी चौक ,से योगिया, बकुआ जाने वाली प्रधानमंत्री सड़क पर लोगों का   आवागमन का सहारा नाव बना है। इसी तरह कोशी बांध से भेजा, लंगड़ा चौक से भादगमा जाने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क पर भी नाव का परिचालन हो रहा है। 


इस रास्ते में बांध के निकट पुल पर पानी बह रहा है। भेजा टेकनाटोल से ललबारही एवं टेकनाटोल से खरिक जाने वाली सड़क पर भी नाव का परिचालन हो रहा है। रहुआ संग्राम से मेहसा तक जाने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क पर जानकीनगर के निकट दोनो पुल के बीच दो फिट पानी बह रहा है। चुन्नी कोशी तटबंध से चाटनमा होते हुए बासिपट्टी जाने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क पर भागता पुल के निकट तीन फीट पानी बह रहा है।


कोसी नदी की बाढ़ से गढ़गांव, बसीपट्टी, भरगामा एवं बकुआ पंचायत में जन जीवन ज्यादा प्रभावित है। हालांकि लोगों के घर-आंगन में बाढ़ का पानी नहीं है लेकिन घर से बाहर निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण निजी नावों के सहारे अपने दिनचर्या के कामों को निपटा रहे हैं। खेती बारी ठप है और किसान एवं मजदूर निराश बैठे हैं। 


हजारों के संख्या में किसान मजदूर बेरोजगार हो गए हैं अधिकांस लोगों के पास भोजन सामग्री व पशु चारे की किल्लत हो गई है। कई बीमार लोगों को दावा का भी अभाव हो गया हैं लोगों की निगाहे सरकार और प्रशासन के राहत तैयारियों पर टिकी है। बाढ़ की विभीषिका के बीच प्रशासन लोगों को दो वक्त की रोटी और दवा उपलब्ध करा पाएगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है। 

रिपोर्ट- कुमार गौरव

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Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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