Bihar Politics : बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा राज्य सरकार पर सुरक्षा में कटौती का आरोप लगाए जाने के बाद अब बिहार पुलिस ने पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस मुख्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं को कानून के तहत निर्धारित सभी सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बिहार पुलिस के अनुसार लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बिहार विशेष सुरक्षा दल अधिनियम-2010 तथा बिहार सरकार के 2 मई 2017 के संकल्प के अनुरूप सुरक्षा प्रदान की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए अंगरक्षक, आवास सुरक्षा गार्ड, स्कॉट गार्ड और पायलट वाहन की व्यवस्था जारी है। इसके अलावा उनकी सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ वाहन भी उपलब्ध कराया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं की सुरक्षा में सादे कपड़ों में तैनात विशेष शाखा (एसबी) के सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। यानी सुरक्षा व्यवस्था केवल दिखाई देने वाले जवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुफिया और निगरानी स्तर पर भी सुरक्षा इंतजाम कायम हैं।
दरअसल यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राजद ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की ‘जेड प्लस’ सुरक्षा श्रेणी में कटौती कर दी है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी नेताओं ने सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के पीछे राजनीतिक कारण हैं और यह सब मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया जा रहा है। लालू ने दावा किया था कि उनकी सुरक्षा घटाना विपक्षी नेताओं को कमजोर करने की कोशिश है।
सुरक्षा विवाद के साथ-साथ सरकारी आवास का मुद्दा भी चर्चा में रहा। कुछ समय पहले राज्य सरकार ने राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस भेजा था। शुरुआत में राबड़ी देवी ने आवास खाली करने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने सरकारी आदेश का पालन करने की सहमति दे दी।
इसी दौरान सुरक्षा में कमी का आरोप लगाते हुए राबड़ी देवी ने अपने आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का फैसला किया था। इसके बाद राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा के प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर आवास और पार्टी कार्यालय के बाहर पहरा देना शुरू कर दिया था। कई दिनों तक पार्टी कार्यकर्ता दिन-रात वहां मौजूद रहे।
अब बिहार पुलिस के ताजा बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। जहां सरकार और पुलिस प्रशासन का कहना है कि लालू-राबड़ी को नियमों के मुताबिक सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार की सियासत में और गर्मा सकता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं को लेकर उठे सवाल राजनीतिक दलों के लिए बड़ा मुद्दा बनते जा रहे हैं।





