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सीमांचल में सेना की बड़ी तैयारी: किशनगंज में बनेंगे दो आर्मी स्टेशन, 'चिकन नेक' की सुरक्षा होगी और मजबूत

Bihar News: बिहार के किशनगंज में भारतीय सेना के दो स्थायी आर्मी स्टेशन बनाने की तैयारी तेज हो गई है। ठाकुरगंज और कोचाधामन में करीब 400 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है, जिससे पूर्वी भारत की सुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मजबूती मिलेगी।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar News: सीमांचल का किशनगंज जल्द ही देश के पूर्वी सुरक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र बन सकता है। भारत-नेपाल सीमा से सटे और पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश के करीब स्थित इस सामरिक जिले में भारतीय सेना के दो स्थायी आर्मी स्टेशन (सेना स्टेशन) स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रशासन ने ठाकुरगंज और कोचाधामन में करीब 400 एकड़ जमीन चिह्नित कर दी है। सेना के अधिकारी प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण कर रहे हैं। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।


ठाकुरगंज और कोचाधामन में जमीन चिन्हित

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग के पास 203 एकड़ भूमि सेना स्टेशन के लिए चिह्नित की गई है। वहीं, कोचाधामन प्रखंड के सकोर-नटुवापाड़ा क्षेत्र में करीब 200 एकड़ जमीन का चयन किया गया है। हालांकि, इस स्थान पर स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अंतिम निर्णय अभी बाकी है। फिलहाल दोनों प्रस्तावों पर प्रशासन और सेना के बीच तकनीकी प्रक्रिया जारी है।


'चिकन नेक' की सुरक्षा होगी और मजबूत

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल किशनगंज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पूर्वी भारत की सुरक्षा, सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की रणनीतिक मजबूती और नेपाल-बांग्लादेश सीमा पर बेहतर सैन्य समन्वय से भी है।


किशनगंज जिला पश्चिम बंगाल से सटा हुआ है और नेपाल तथा बांग्लादेश इसकी भौगोलिक पहुंच में हैं। यह इलाका सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण भू-मार्ग माना जाता है। ऐसे में यहां सेना की स्थायी मौजूदगी पूरे पूर्वी क्षेत्र की सामरिक क्षमता को नई मजबूती देगी।


आर्मी स्टेशन बनने से क्या होंगे फायदे?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सेना स्टेशन बनने से सीमावर्ती गतिविधियों पर बेहतर निगरानी, सैनिकों की त्वरित तैनाती और किसी भी आपात स्थिति में तेज सैन्य प्रतिक्रिया संभव होगी। आर्मी स्टेशन केवल सैनिकों की बैरक नहीं होता, बल्कि यह एक पूर्ण सैन्य परिसर के रूप में विकसित किया जाता है। इसमें सैन्य मुख्यालय, प्रशिक्षण एवं अभ्यास मैदान, हथियार और गोला-बारूद के सुरक्षित भंडार, हाई-टेक संचार एवं कंट्रोल सेंटर तथा बहुस्तरीय सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था जैसी सुविधाएं विकसित की जाती हैं।


स्थानीय लोगों को भी मिलेगा लाभ

सेना स्टेशन बनने से नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े संवेदनशील इलाकों की निगरानी और मजबूत होगी। साथ ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। घुसपैठ, आपदा या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी संकट में सेना अधिक तेजी से कार्रवाई कर सकेगी।


इसके अलावा, इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर विकास कार्य होने की संभावना है। करोड़ों रुपये की आधारभूत परियोजनाएं शुरू होंगी, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


अंतिम मंजूरी का इंतजार

फिलहाल दोनों प्रस्तावित स्थलों का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी। यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले वर्षों में किशनगंज न केवल सीमांचल बल्कि पूरे पूर्वी भारत का एक प्रमुख सैन्य केंद्र बनकर उभर सकता है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता