Katihar Teacher Attendance Fraud: कटिहार में शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. शिक्षा विभाग की समीक्षा में जिले के 21 शिक्षक ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जो स्कूल से दूर दूसरे शहरों और राज्यों में रहते हुए भी कटिहार के विद्यालयों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे. मामले का खुलासा जुलाई महीने की उपस्थिति रिपोर्ट के तकनीकी विश्लेषण के दौरान हुआ. शिक्षा विभाग ने सभी 21 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है.
जांच में सामने आया कि इन शिक्षकों ने ई-शिक्षाकोश पोर्टल पर मौजूद ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ विकल्प का इस्तेमाल कर अपनी उपस्थिति दर्ज की. विभागीय नियमों के अनुसार इस विकल्प का इस्तेमाल अधिकृत विभागीय कार्य, प्रशिक्षण, चुनाव या किसी अन्य स्वीकृत ड्यूटी के दौरान किया जा सकता है. आरोप है कि कुछ शिक्षकों ने इसी सुविधा का नियम विरुद्ध तरीके से इस्तेमाल करते हुए विद्यालय से अनुपस्थित रहने के बावजूद अपनी हाजिरी दर्ज कर दी.
कोलकाता, मालदा और धनबाद से दर्ज हुई हाजिरी
शिक्षा विभाग की जांच में कई शिक्षकों की लोकेशन कटिहार से बाहर मिली. अमदाबाद प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय टोपरा की शिक्षिका राजो कुमारी की उपस्थिति पश्चिम बंगाल के पूजापुर से दर्ज पाई गई. वहीं बलरामपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बैजपुरा के शिक्षक कृष्ण कुमार मलिक की हाजिरी मालदा से दर्ज होने की जानकारी सामने आई.
बारसोई प्रखंड के यूएमएस डोगागछी के शिक्षक पिजूशकांत घोष की उपस्थिति कोलकाता से दर्ज पाई गई. वहीं फलका प्रखंड के उत्क्रमित हाईस्कूल मूसापुर के प्रधानाध्यापक राकेश रंजन कुमार की हाजिरी धनबाद से दर्ज होने की बात जांच में सामने आई है.
इनके अलावा पटना, नवादा, दरभंगा, औरंगाबाद, मधेपुरा, खगड़िया, मुंगेर, नवगछिया और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जैसे शहरों से भी कटिहार के विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है.
21 शिक्षकों से मांगा गया स्पष्टीकरण
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी राहुल कुमार ने चिन्हित सभी 21 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है. विभाग ने शिक्षकों से यह बताने को कहा है कि उन्होंने किस आधार पर ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ विकल्प का इस्तेमाल कर दूसरे स्थानों से अपनी उपस्थिति दर्ज की.
जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार, ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ का नियम विरुद्ध इस्तेमाल शिक्षक आचरण नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा. यदि शिक्षकों की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उनके खिलाफ वेतन कटौती, निलंबन सहित अन्य विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.
जुलाई की उपस्थिति रिपोर्ट से खुला मामला
शिक्षा विभाग द्वारा जुलाई महीने की डिजिटल उपस्थिति की समीक्षा की जा रही थी. इसी दौरान शिक्षकों की दर्ज उपस्थिति और उनके स्थान से जुड़ी जानकारी में अंतर सामने आया. तकनीकी जांच के बाद अलग-अलग स्थानों से हाजिरी दर्ज करने वाले शिक्षकों को चिन्हित किया गया.
विभाग अब यह भी देख रहा है कि इन शिक्षकों ने कितने दिनों तक इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया और जिस अवधि में वे दूसरे स्थानों पर थे, उस दौरान विद्यालय में उनकी वास्तविक उपस्थिति क्या थी.
डीएम ने कहा- नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने भी कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही और अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी. शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे समय पर विद्यालय पहुंचें और बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित करें.
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभागीय नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों के खिलाफ जांच के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.





