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जमुई के बाराजोर पछयारी टोला में मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध, ग्रामसभा ने लिया ऐतिहासिक फैसला

जमुई जिले के बाराजोर पंचायत अंतर्गत पछयारी टोला के ग्रामीणों ने ग्रामसभा में सर्वसम्मति से मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

बिहार न्यूज
सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

JAMUI: समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में झाझा प्रखंड पंचायत राज बाराजोर के पछयारी टोला के ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल की है। रविवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मृत्यु भोज की प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस फैसले को सामाजिक जागरूकता, आर्थिक सुधार और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


बैठक में गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। सभी ने माना कि मृत्यु भोज जैसी परंपरा समय के साथ एक सामाजिक बोझ बन गई है, जिससे विशेष रूप से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई परिवार अपने प्रियजन को खोने के दुख से उबर भी नहीं पाते कि उन्हें सामाजिक दबाव में आकर मृत्यु भोज का आयोजन करना पड़ता है। इसके लिए कई बार लोगों को कर्ज तक लेना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाती है।


बैठक में मौजूद युवाओं ने इस बदलाव की अगुवाई करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद परिवार को सहारा और संवेदना की जरूरत होती है, न कि अनावश्यक खर्च और सामाजिक दबाव की। इसलिए अब टोले में शोक सभा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम पूरी सादगी के साथ आयोजित किए जाएंगे तथा फिजूलखर्ची को बढ़ावा देने वाली परंपराओं से दूरी बनाई जाएगी। इस अवसर पर विनोद यादव, नरेश यादव, कालेश्वर यादव, अर्जुन यादव, बोड़न यादव, चंद्रशेखर यादव, राजेश यादव, अजीत यादव, नंदलाल यादव, मनोहर यादव, सरोज यादव और राजीव यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने का संकल्प लिया।


क्या है इस फैसले का महत्व?

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, मृत्यु भोज पर रोक लगाने का यह निर्णय केवल एक परंपरा को बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है। इससे गरीब परिवारों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा, कर्ज लेने की प्रवृत्ति रुकेगी और समाज में सादगी तथा समानता का संदेश जाएगा। साथ ही यह पहल आने वाली पीढ़ियों को कुरीतियों के बजाय सकारात्मक सामाजिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि बाराजोर पछयारी टोला की यह पहल आसपास के गांवों और पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बनेगी तथा अन्य गांव भी सामाजिक सुधार के ऐसे साहसिक कदम उठाकर एक स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में योगदान देंगे।

जमुई के बाराजोर पछयारी टोला में मृत्यु भोज पर पूर्ण प्रतिबंध, ग्रामसभा ने लिया ऐतिहासिक फैसला

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रिपोर्टर

Dhiraj Kumar Singh

FirstBihar संवाददाता