Bihar Land Scam News: बिहार के जमुई जिले से जमीन रजिस्ट्री से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. लक्ष्मीपुर अंचल क्षेत्र में एक ऐसी जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई, जिसे सरकारी भूमि यानी गैरमजरूआ बताया गया था. खास बात यह है कि इसी जमीन के दाखिल-खारिज आवेदन को साल 2019 में अंचल कार्यालय ने अस्वीकृत कर दिया था. अब वर्ष 2026 में उसी भूखंड की रजिस्ट्री होने के बाद राजस्व विभाग और निबंधन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.
मामला लक्ष्मीपुर अंचल के दिग्घी मौजा से जुड़ा है. यहां खाता संख्या 171 और प्लॉट संख्या 707 की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है. आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में गैरमजरूआ दर्ज जमीन की बिक्री कर दी गई, जिसके बाद शिकायत मिलने पर पूरे मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में इसी जमीन के दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया गया था. उस समय तत्कालीन अंचल अधिकारी ने जांच के बाद आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि खतियान के अनुसार यह भूमि गैरमजरूआ खाते की है और इसका म्यूटेशन नहीं किया जा सकता.
इसके बाद भी अब वर्ष 2026 में इसी प्लॉट की रजिस्ट्री होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. मामले को लेकर कुबेर झा नाम के व्यक्ति ने जिला प्रशासन को शिकायत भेजी है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गैरमजरूआ जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई है.
शिकायतकर्ता ने 19 जून को हुई निबंधित रजिस्ट्री संख्या 7638 और खाता संख्या 171/203, प्लॉट संख्या 707 का हवाला देते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है.
वहीं उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2019 में दाखिल-खारिज वाद संख्या 161/2018-19 को अंचल अधिकारी ने खारिज किया था. उस समय सीएस खतियान के आधार पर जमीन को गैरमजरूआ बताया गया था.
निबंधन कार्यालय ने दी अपनी सफाई
मामले को लेकर जिला अवर निबंधक विनीत कुमार ने बताया कि निबंधन कार्यालय अपने स्तर से किसी जमीन की रजिस्ट्री रोक नहीं सकता. उन्होंने कहा कि अगर किसी जमीन को सरकारी बताकर रोकना होता है तो इसके लिए संबंधित अंचल अधिकारी की रिपोर्ट या सक्षम न्यायालय का आदेश जरूरी होता है.
उन्होंने यह भी बताया कि एडीएम की अध्यक्षता में बनी रोक कमेटी के पास भी किसी जमीन के निबंधन पर रोक लगाने का अधिकार होता है. लेकिन अगर ऐसा कोई आदेश या रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होती है तो नियमों के अनुसार निबंधन की प्रक्रिया पूरी की जाती है.
इधर लक्ष्मीपुर के अंचल अधिकारी रविकांत ने कहा कि रजिस्ट्री से पहले अंचल कार्यालय से रिपोर्ट लेने का कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन का दाखिल-खारिज नहीं किया जा सकता.
अब जांच के बाद ही खुलेगा पूरा मामला
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वर्ष 2019 में जमीन को गैरमजरूआ बताकर दाखिल-खारिज रोक दिया गया था, तो फिर 2026 में उसी जमीन की बिक्री कैसे हो गई.
क्या जमीन की प्रकृति में बाद में कोई बदलाव हुआ या फिर राजस्व रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी की गई. यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं खरीदार को गलत जानकारी देकर जमीन तो नहीं बेच दी गई.



