ब्रेकिंग
दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके, उत्तराखंड के चमोली में 4.9 तीव्रता से हिली धरती✦सहरसा में बंद फ्लैट से 25 लाख के गहनों की चोरी, कामवाली और गार्ड पर मिलीभगत का शक✦भोजपुर में घर के बाहर खड़े प्रॉपर्टी डीलर को मारी गोली, गंभीर हालत में मेडिकोन हॉस्पिटल में एडमिट, CCTV खंगालने में जुटी पुलिस✦11 साल से फर्जी डिग्री पर कर रहा था सरकारी नौकरी! शेखपुरा के शिक्षक हरेराम को स्कूल से पुलिस ने दबोचा✦जहानाबाद के सरकारी स्कूल में बच्चों के बीच बैठकर डीएम ने खाया मिड-डे मील, कम उपस्थिति पर जताई नाराजगी✦दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में भूकंप के तेज झटके, उत्तराखंड के चमोली में 4.9 तीव्रता से हिली धरती✦सहरसा में बंद फ्लैट से 25 लाख के गहनों की चोरी, कामवाली और गार्ड पर मिलीभगत का शक✦भोजपुर में घर के बाहर खड़े प्रॉपर्टी डीलर को मारी गोली, गंभीर हालत में मेडिकोन हॉस्पिटल में एडमिट, CCTV खंगालने में जुटी पुलिस✦11 साल से फर्जी डिग्री पर कर रहा था सरकारी नौकरी! शेखपुरा के शिक्षक हरेराम को स्कूल से पुलिस ने दबोचा✦जहानाबाद के सरकारी स्कूल में बच्चों के बीच बैठकर डीएम ने खाया मिड-डे मील, कम उपस्थिति पर जताई नाराजगी

बच्ची की मौत के बाद गुस्साएं परिजनों ने क्लीनिक में किया हंगामा, डॉक्टर को बना लिया बंधक

डॉक्टर को लोग धरती का भगवान मानते हैं। लेकिन जहानाबाद में बच्ची की मौत के बाद गुस्साएं परिजनों ने धरती के भगवान को ही बंधक बना लिया और इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार की क्लिनिक पर लोगों ने जमकर हंगामा मचाया

HOSPITAL ME HUNGAMA
इलाज में लापरवाही का आरोप
© reporter
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

JEHANABAD: जहानाबाद शहर में अस्पताल मोड़ के पास स्थित एक निजी क्लिनिक में एक दुखद घटना घटी, जहाँ जाफरगंज निवासी अक्सर मंसूरी की 9 महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्ची का पिछले दो दिनों से डॉ. अशोक कुमार के क्लिनिक में डायरिया का इलाज चल रहा था। 


बच्ची की मौत से गुस्साए परिजनों ने डॉ. अशोक कुमार को क्लिनिक में ही बंधक बना लिया और जमकर हंगामा मचाया। सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुँची और परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद डॉक्टर को मुक्त कराया गया। मृत बच्ची के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें बच्ची की स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं दी। 


उनके अनुसार, डॉक्टर बार-बार यही कहते रहे कि बच्ची ठीक हो जाएगी, जबकि अंततः उसकी मौत हो गई। परिजनों का यह भी कहना है कि अगर डॉक्टर को लगता था कि केस उनके हाथ से बाहर है, तो उन्हें बच्ची को पटना या किसी अन्य बेहतर जगह ले जाने की सलाह देनी चाहिए थी, जिससे वे बच्ची का उचित इलाज करवा पाते। यह घटना चिकित्सा लापरवाही के आरोपों और मरीजों के परिजनों की भावनाओं को उजागर करती है।

रिपोर्टिंग
A

रिपोर्टर

AJIT

FirstBihar संवाददाता