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गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पर संकट के बादल, कैबिनेट की मंजूरी में देरी से अटक सकता है भूमि अधिग्रहण

Bihar News: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण पर मंजूरी में देरी का असर पड़ने की आशंका है। बिहार में करीब 417 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे आठ जिलों से होकर गुजरेगा।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar News: बिहार में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर अब मंजूरी का इंतजार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय कैबिनेट से जल्द स्वीकृति नहीं मिलने पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है। इसे देखते हुए बिहार के पथ निर्माण विभाग ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया है। साथ ही, विभाग ने एक्सप्रेसवे को चार लेन के बजाय छह लेन में विकसित करने की मांग भी दोहराई है।



विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति की मंजूरी के लिए भेजा है। इस मंजूरी के बाद ही निर्माण की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। वहीं, किशनगंज को छोड़कर बिहार के अन्य संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है। अधिसूचना में संबंधित जिलों में परियोजना के दायरे में आने वाली जमीन का विवरण दिया गया है।



पथ निर्माण विभाग के अनुसार, यदि इस साल के अंत तक भूमि अधिग्रहण का अगला चरण शुरू नहीं हुआ, तो नए सिरे से अधिसूचना जारी करनी पड़ सकती है। नियमानुसार, भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के एक वर्ष के भीतर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करना आवश्यक होता है। इससे पहले किसानों को उनकी जमीन परियोजना के दायरे में आने और अधिग्रहण से संबंधित जानकारी दी जाती है। ऐसे में अगले चरण की प्रक्रिया में देरी होने पर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम प्रभावित हो सकता है।



बिहार सरकार ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को चार लेन के बजाय छह लेन में विकसित करने का आग्रह किया है। विभाग के अनुसार, इस संबंध में पहले भी प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन अब तक इस पर सहमति नहीं मिली है। छह लेन में विकास का प्रस्ताव परियोजना की क्षमता और भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रखा गया है। हालांकि, इस बदलाव पर अंतिम निर्णय का इंतजार है। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 568 किलोमीटर प्रस्तावित है। इसमें बिहार के हिस्से की लंबाई करीब 417 किलोमीटर होगी। यह एक्सप्रेसवे राज्य के आठ जिलों से होकर गुजरेगा।



इन जिलों में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से होगी। इसके बाद यह देवरिया होते हुए बिहार में प्रवेश करेगा और आगे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के बीच आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है। बिहार से सिलीगुड़ी होते हुए असम तक सड़क संपर्क सुगम बनाने में भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से उत्तर बिहार में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मभूमि माना जाता है और यहां अयोध्या की तर्ज पर मां जानकी मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क से सीतामढ़ी सहित उत्तर बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से आगे असम स्थित कामाख्या मंदिर तक यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहतर संपर्कता का लाभ मिलने की उम्मीद है।



फिलहाल, परियोजना के लिए आवश्यक मंजूरी, छह लेन के प्रस्ताव पर सहमति और भूमि अधिग्रहण के अगले चरण की शुरुआत पर नजर बनी हुई है। इन प्रक्रियाओं में तेजी आने के बाद ही एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में आगे की प्रगति स्पष्ट हो सकेगी।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता