BEGUSARAI: बेगूसराय में वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए चर्चित “दो गज जमीन” बयान से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार विवाद बयान से ज्यादा नगर थाना की कार्यशैली को लेकर खड़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर दर्ज नगर थाना कांड संख्या 221/2019 की सुनवाई के दौरान एमपी-एमएलए कोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ कि इस हाई प्रोफाइल मामले की मूल केस डायरी ही थाना से गायब हो गई है।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री के अधिवक्ता सह भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल अमरेंद्र कुमार अमर ने 15 मई को न्यायालय में आवेदन दाखिल कर कहा कि बिना मूल केस डायरी के केवल फोटोस्टेट कॉपी और जब्ती सूची के आधार पर संज्ञान लेना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे पहले पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपमहानिरीक्षक के माध्यम से नगर थाना को मूल डायरी प्रस्तुत करने के लिए कारण पृच्छा भी भेजी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस मूल दस्तावेज न्यायालय में पेश नहीं कर सकी।
इस खुलासे के बाद नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक संवेदनशील और राजनीतिक रूप से चर्चित मामले में केस की मूल डायरी का गायब होना पुलिस विभाग की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। कोर्ट ने भी पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए साक्ष्यों की उपलब्धता, प्राथमिक प्रमाणों और अन्य कानूनी पहलुओं पर सम्यक विचार के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।
दरअसल, वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव में बेगूसराय सीट पर गिरिराज सिंह और कन्हैया कुमार के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर थी। चुनाव प्रचार के दौरान जीडी कॉलेज मैदान में आयोजित सभा में गिरिराज सिंह ने “दो गज जमीन” वाला बयान दिया था। बयान के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी राहुल कुमार के निर्देश पर नगर थाना में मामला दर्ज किया गया था।
अब वर्षों बाद सुनवाई के दौरान मूल केस डायरी के गायब होने से मामला और भी उलझता नजर आ रहा है। अदालत में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण और चर्चित मामले की मूल डायरी थाना से कैसे गायब हो गई। फिलहाल एमपी-एमएलए कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी कानूनी बिंदुओं पर विचार के बाद ही आगे की कार्रवाई का संकेत दिया है।





