1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 02, 2026, 10:07:29 AM
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Bihar News : शेरघाटी के अनुमंडलीय अस्पताल स्थित ट्रॉमा सेंटर में एक नवजात की मौत के बाद हड़कंप मच गया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली और सुरक्षित प्रसव के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृत नवजात की मां की पहचान रिमझिम कुमारी के रूप में हुई है, जो शेरघाटी के गोलबाजार जेपी चौक की निवासी बताई जा रही हैं। परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद रिमझिम कुमारी को अनुमंडलीय अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने दर्द की दवा देकर अपने कक्ष में चली गईं और उसके बाद प्रसूता की समुचित देखभाल नहीं की गई।
परिवार का कहना है कि रात से ही प्रसूता को तेज दर्द हो रहा था, लेकिन अस्पताल की ओर से पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। सुबह करीब 7:30 बजे ड्यूटी डॉक्टर डॉ. भास्कर अस्पताल पहुंचे, लेकिन परिजनों का आरोप है कि उन्होंने बिना ठीक से जांच किए ही वहां से चले गए। इसके कुछ देर बाद करीब सवा आठ बजे प्रसूता की हालत गंभीर हो गई।
आरोप है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्स द्वारा प्रसव कराने की कोशिश की गई। इस दौरान कथित लापरवाही के कारण नवजात का सिर देर तक फंसा रहा। बाद में डॉक्टर पहुंचे और बच्चे को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। नवजात को मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उनका कहना है कि नाभि काटने के लिए धागा तक उपलब्ध नहीं था और उन्हें बाहर से इसकी व्यवस्था करनी पड़ी। स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ट्रॉमा सेंटर में आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो इसका लाभ आम लोगों को कैसे मिलेगा।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी अस्पताल पहुंच गए और प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर डॉक्टर मौजूद रहते और सही तरीके से देखभाल की जाती, तो संभवतः नवजात की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, डॉ. भास्कर ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि मरीज को अस्पताल देर से लाया गया था और प्रसूता की स्थिति पहले से ही जटिल थी। उन्होंने दावा किया कि मां को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि बच्चा मृत अवस्था में पैदा हुआ। डॉक्टर के अनुसार, मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत पूरी कोशिश की गई, लेकिन नवजात को बचाया नहीं जा सका।
फिलहाल इस मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर या कर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं, संसाधनों की उपलब्धता और चिकित्सकीय जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और प्रशासन दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।