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ONLINE पिंडदान और टूरिज्म पैकेज के खिलाफ पंडा समाज ने खोला मोर्चा, कहा- श्रद्धा के कर्मकांड को कारोबार ना बनाएं

पितृपक्ष मेले से पहले गया में ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज को लेकर विवाद बढ़ गया है। गयापाल समाज ने विरोध जताते हुए कहा कि पिंडदान पारंपरिक विधि और श्रद्धालु की उपस्थिति में होना चाहिए।

बिहार न्यूज
गयापाल समाज ने जताया विरोध
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

GAYA JEE: पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले ऑनलाइन पिंडदान के नाम पर बनाए जा रहे टूरिज्म पैकेज को लेकर विवाद गहरा गया है। बुधवार को गयापाल समाज और 14 सैया गयापाल समिति ने प्रेस वार्ता कर ऐसे पैकेजों का विरोध किया।


समिति के संरक्षक महेश लाल गुप्ता ने कहा कि गया में पिंडदान सनातन परंपरा और शास्त्रीय विधि के अनुसार किया जाता है। इसमें श्रद्धालु की स्वयं उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कहा कि घर बैठे ऑनलाइन पिंडदान कराने की कोई पारंपरिक व्यवस्था नहीं है।


उन्होंने दावा किया कि निजी वेबसाइट, होटल और अन्य संस्थाओं की ओर से 25 हजार से 51 हजार रुपये तक के पिंडदान पैकेज संचालित किए जा रहे हैं। पर्यटन विभाग की ओर से प्रस्तावित पैकेज पर भी समिति ने सवाल उठाया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि धार्मिक कर्मकांड को पर्यटन पैकेज का हिस्सा बनाने से इसकी मूल भावना प्रभावित हो सकती है।


डॉ. नंद किशोर गुप्ता ने कहा कि गयापाल पुरोहित पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के बही-खाते सुरक्षित रखते आ रहे हैं। कई परिवारों के पास श्रद्धालुओं की सात से दस पीढ़ियों तक का रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि होटल या अन्य स्थानों पर पिंडदान की व्यवस्था होने से पारंपरिक वेदियों और गयापाल पुरोहित परिवारों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।


गयापाल समाज ने कहा कि पिंडदान की पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक प्रक्रिया से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। समाज ने चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई तो जरूरत पड़ने पर न्यायालय में रिट याचिका दायर की जाएगी।

गयाजी से नितम राज की रिपोर्ट

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