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बिहार में बैंक घोटाले का बड़ा खेल…फर्जी कागजों पर करोड़ों का लोन पास, असिस्टेंट मैनेजर समेत मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Bihar News: दरभंगा में एक बैंक से जुड़ा ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सबको चौंका दिया है। बिना आवेदन किए ही लोगों के नाम पर लाखों के लोन पास हो रहे थे। जब एक शिकायत हुई, तो जांच में करोड़ों के घोटाले की...

बिहार में बैंक घोटाले का बड़ा खेल…फर्जी कागजों पर करोड़ों का लोन पास, असिस्टेंट मैनेजर समेत मास्टरमाइंड गिरफ्तार
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार के दरभंगा जिले से सरकारी योजनाओं के नाम पर किए जा रहे एक बड़े बैंक घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस मामले में साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र और गिरोह के मास्टरमाइंड विपिन पासवान को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे करीब 2 करोड़ रुपये का लोन पास कर सरकारी खजाने को चूना लगाया।


इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब एक स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसके नाम पर 18 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया है, जबकि उसने इसके लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था। इस शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई और जब जांच शुरू हुई तो पूरे खेल का चौंकाने वाला सच सामने आने लगा।


पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी। आरोपियों ने एक संगठित गिरोह बनाकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग किया। खासतौर पर प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण योजना (PMFME) जैसी योजनाओं को निशाना बनाया गया। गिरोह नकली दुकानों और फर्जी व्यवसायों के नाम पर दस्तावेज तैयार करता था, जिसमें मिठाई की दुकान, लेदर फैक्ट्री जैसे कारोबार दिखाए जाते थे।


इसके बाद बैंक के अंदर बैठे आरोपी अधिकारियों की मिलीभगत से इन फर्जी कागजातों पर बिना किसी भौतिक सत्यापन के लोन स्वीकृत कर दिया जाता था। आरोप है कि असिस्टेंट मैनेजर ने फर्जी फील्ड रिपोर्ट लगाकर इन आवेदनों को मंजूरी दी। लोन की पूरी राशि सीधे मास्टरमाइंड विपिन पासवान के ‘विपिन एंटरप्राइजेज’ नामक खाते में ट्रांसफर की जाती थी, जहां से इसे आपस में बांट लिया जाता था।


पुलिस ने अब तक 14 ऐसे फर्जी खातों की पहचान की है, जिनके जरिए इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार अन्य विभागों से भी जुड़े हो सकते हैं। उद्योग विभाग का एक कर्मी कृष्णा पासवान और बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक रविश चंद्रा का नाम भी इस साजिश में सामने आया है। हालांकि, ये दोनों फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।


छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में जाली दस्तावेज, फर्जी बैंक मोहरें, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। इन सबूतों के आधार पर पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।


साइबर डीएसपी विपिन बिहारी ने बताया कि यह एक गंभीर वित्तीय अपराध है, जिसमें न सिर्फ सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, बल्कि आम लोगों के दस्तावेजों का भी गलत इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


पुलिस को आशंका है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले की रकम और भी बढ़ सकती है और कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल इस खुलासे के बाद बैंकिंग सिस्टम और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।