Bihar News: STET परीक्षा में देरी पर सुधाकर सिंह का फूटा गुस्सा, बोले- "TRE 4.0 से पहले हो STET, नहीं तो होगा जनआंदोलन"

Bihar News: बिहार के लाखों शिक्षाकांक्षी युवाओं के भविष्य से हो रहे कथित खिलवाड़ पर गंभीर चिंता जाहिर किया है. बक्सर के लोकसभा सांसद श्री सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) को कठघरे में खड़ा किया है.

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jun 27, 2025, 11:41:33 AM

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Bihar News: बिहार के लाखों शिक्षाकांक्षी युवाओं के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बक्सर के लोकसभा सांसद श्री सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष को पत्र लिख STET का आयोजन BPSC TRE 4.0 से पहले कराने की मांग की है। 


सांसद ने कहा है कि STET परीक्षा के आयोजन में हो रही लगातार देरी, असमर्थता और अनदेखी ने योग्य युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। वर्ष 2024 के परीक्षा कैलेंडर में यह स्पष्ट किया गया था कि STET परीक्षा वर्ष में दो बार कराई जाएगी, परंतु अब तक केवल एक बार परीक्षा कराई गई है। इसका सीधा नुकसान उन अभ्यर्थियों को हो रहा है जिन्होंने B.Ed या D.El.Ed सत्र 2022-24 या 2023-25 पूरा कर लिया है।


यदि TRE 4.0 परीक्षा STET के पहले कराई जाती है तो हजारों योग्य अभ्यर्थी उसमें बैठने से वंचित रह जाएंगे। यह न सिर्फ अन्याय है, बल्कि उनकी मेहनत, प्रतिभा और योग्यता का अपमान भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीते 8 महीनों में छात्रों द्वारा हजारों ज्ञापन, आवेदन और ईमेल दिए गए, लेकिन BSEB ने गंभीरता नहीं दिखाई। जब विभाग द्वारा STET परीक्षा आयोजन का पत्र (पत्रांक- 234, दिनांक 25.04.2025) जारी किया जा चुका है, तो अब तक आधिकारिक तिथि घोषित न करना केवल टालमटोल है।


सांसद ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत निर्णय नहीं लिया और TRE 4.0 से पहले STET परीक्षा आयोजित नहीं की गई, तो इसे लाखों युवाओं के भविष्य के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश माना जाएगा। यह जनआंदोलन का भी रूप ले सकता है। सुधाकर सिंह ने मांग किया कि TRE 4.0 परीक्षा से पहले STET परीक्षा आयोजित करने की तत्काल घोषणा की जाए और STET परीक्षा को नियमित और वार्षिक रूप से दो बार आयोजित किया जाए।


यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं है, यह लाखों परिवारों की आजीविका और बिहार की शिक्षा व्यवस्था की साख का सवाल है। यदि सरकार समय रहते फैसला नहीं लेती, तो हमें जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच आंदोलन के रास्ते पर जाना पड़ेगा। राजद सांसद ने युवाओं से अपील की है कि वे एकजुट होकर अपने हक के लिए शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संघर्ष करें।