Bihar Teacher News: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक अहम कदम उठाया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने TRE-3 (विज्ञापन संख्या-22/2024) के तहत नियुक्त शिक्षकों की सेवा स्थिति की विस्तृत समीक्षा करने का निर्देश सभी जिलों को दिया है। यह निर्देश खास तौर पर उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है जिन्होंने NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) से 18 माह का D.El.Ed प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस आदेश के बाद राज्यभर में शिक्षा विभाग के स्तर पर हलचल तेज हो गई है। हजारों शिक्षकों की नियुक्ति और उनकी पात्रता को लेकर अब नए सिरे से जांच की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
जिलों को सेवा स्थिति जांचने का निर्देश
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी पत्र में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि TRE-3 के तहत नियुक्त ऐसे सभी शिक्षकों का रिकॉर्ड जांचा जाए, जिन्होंने NIOS से 18 माह का D.El.Ed कोर्स किया है।जिलों से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन में निर्धारित नियमों और योग्यता मानकों के अनुसार हुई है या नहीं। इसके साथ ही सभी संबंधित अभ्यर्थियों का डेटा सत्यापित कर विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द मुख्यालय को भेजने को कहा गया है।
नियमों के अनुपालन की होगी जांच
शिक्षा विभाग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि पहले जारी दिशा-निर्देशों और विज्ञापन की शर्तों के अनुसार प्रशिक्षण और योग्यता को लेकर स्पष्ट मानक तय हैं। ऐसे में यह जांच की जाएगी कि NIOS से प्राप्त 18 माह के D.El.Ed को आधार बनाकर की गई नियुक्तियां नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है, तो विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
दस्तावेज सत्यापन तेज होने की संभावना
इस आदेश के बाद विभिन्न जिलों के शिक्षा कार्यालयों में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो सकती है। अधिकारियों को अपने स्तर पर सभी संबंधित अभ्यर्थियों की फाइलों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, TRE-3 बहाली प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। अब इन नियुक्तियों की वैधता और पात्रता को लेकर विभागीय स्तर पर दोबारा जांच की जा रही है।
शिक्षकों में बढ़ी चिंता
इस नए निर्देश के बाद नियुक्त शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल देखा जा रहा है। कई शिक्षक इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि जांच के बाद उनकी सेवा स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जांच का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और केवल योग्य अभ्यर्थियों को ही सेवा में सुनिश्चित करना है।
रिपोर्ट जल्द भेजने के निर्देश
प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जांच रिपोर्ट तैयार करने में किसी भी तरह की देरी न हो। तय समय सीमा के भीतर पूरी जानकारी मुख्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही कहा गया है कि जब तक जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित मामलों में विभागीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
कुल मिलाकर, बिहार शिक्षा विभाग का यह आदेश TRE-3 शिक्षक बहाली प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इससे जहां नियुक्तियों की पारदर्शिता की जांच होगी, वहीं हजारों शिक्षकों की सेवा स्थिति पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर जिलों में जांच प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।





