पटना: बिहार सरकार ने स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण जारी करते हुए आम लोगों की बड़ी चिंता दूर कर दी है। कैबिनेट की बैठक में राज्य के स्टेट हाईवे और कुछ पुलों पर यूजर फीस वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि अब निजी कार, बाइक, जीप और अन्य व्यक्तिगत वाहनों को भी राज्य की सड़कों पर चलने के लिए टोल टैक्स देना पड़ेगा। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छिड़ गई।
हालांकि, सरकार ने महज 24 घंटे के भीतर स्थिति साफ करते हुए स्पष्ट कर दिया कि निजी उपयोग में आने वाले किसी भी वाहन से यूजर फीस नहीं ली जाएगी। नई व्यवस्था केवल व्यावसायिक यानी कॉमर्शियल वाहनों पर ही लागू होगी। सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद लाखों निजी वाहन मालिकों ने राहत की सांस ली है।
निजी वाहन मालिकों को मिली बड़ी राहत
सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि व्यक्तिगत उपयोग के लिए चलने वाली कार, जीप, मोटरसाइकिल, स्कूटर और अन्य निजी वाहन इस नई टोल व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे। यानी राज्य के स्टेट हाईवे पर यात्रा करने वाले आम लोगों को किसी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा।
शुरुआती फैसले के बाद लोगों में यह भ्रम फैल गया था कि अब हर वाहन चालक को स्टेट हाईवे पर टोल देना होगा। लेकिन सरकार ने इस भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट कर दिया कि यह नियम केवल व्यवसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर लागू होगा।
सिर्फ कॉमर्शियल वाहनों से होगी यूजर फीस की वसूली
नई व्यवस्था के तहत ट्रक, बस, मालवाहक वाहन, भारी व्यावसायिक वाहन और अन्य कॉमर्शियल श्रेणी के वाहनों से यूजर फीस ली जाएगी। सरकार का मानना है कि राज्य की सड़कों का सबसे अधिक उपयोग भारी व्यावसायिक वाहन करते हैं। ऐसे में सड़क रखरखाव की लागत भी इन्हीं वाहनों के कारण अधिक आती है। इसी वजह से सड़कों के रखरखाव और भविष्य की परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
सड़कों के रखरखाव के लिए बनाई गई नई व्यवस्था
बिहार सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में बड़ी संख्या में नए स्टेट हाईवे, बाइपास, पुल और सड़क परियोजनाएं विकसित हुई हैं। इन सड़कों की नियमित मरम्मत, रखरखाव और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लगातार वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ती है।
सरकार का दावा है कि व्यावसायिक वाहनों से मिलने वाली यूजर फीस का उपयोग सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने, पुलों की मरम्मत, नई सड़क परियोजनाओं और यातायात सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। इससे सड़क अवसंरचना को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सभी स्टेट हाईवे पर एक साथ लागू नहीं होगा नियम
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे बिहार के सभी स्टेट हाईवे पर एक साथ टोल वसूली शुरू नहीं होगी। सबसे पहले संबंधित सड़कों का ट्रैफिक सर्वे कराया जाएगा। इसके अलावा सड़क की स्थिति, वाहन संख्या, निर्माण लागत और अन्य तकनीकी मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद सरकार अधिसूचना जारी करेगी, जिसमें उन स्टेट हाईवे और पुलों की सूची प्रकाशित की जाएगी जहां व्यावसायिक वाहनों से यूजर फीस वसूली जाएगी।
तकनीकी नियम भी होंगे लागू
नई व्यवस्था के तहत टोल संग्रह की प्रक्रिया को आधुनिक बनाया जाएगा। जहां जरूरत होगी वहां इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम और फास्टैग जैसी सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा व्यावसायिक वाहनों के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निगरानी व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य टोल संग्रह प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना बताया जा रहा है ताकि सड़क उपयोगकर्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
फैसले के बाद बढ़ी थी राजनीतिक हलचल
कैबिनेट के फैसले के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया था। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने निजी वाहनों पर टोल लगाए जाने की आशंका जताई थी। कई लोगों ने इसे आम नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ाने वाला कदम बताया।
इन प्रतिक्रियाओं के बाद सरकार ने तत्काल स्पष्टीकरण जारी कर स्पष्ट कर दिया कि निजी वाहनों पर किसी प्रकार का टोल टैक्स लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि केवल व्यावसायिक वाहनों से ही यूजर फीस वसूली जाएगी।
क्या है सबसे बड़ा संदेश?
सरकार के ताजा स्पष्टीकरण के बाद अब स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। बिहार के निजी वाहन मालिकों को स्टेट हाईवे पर यात्रा के दौरान किसी प्रकार का टोल टैक्स नहीं देना होगा। वहीं, व्यावसायिक वाहनों के लिए यूजर फीस की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। किन-किन सड़कों और पुलों पर यह व्यवस्था लागू होगी, इसका अंतिम फैसला ट्रैफिक सर्वे और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद अधिसूचना जारी कर किया जाएगा। इससे एक ओर आम लोगों को राहत मिली है, वहीं सरकार सड़क रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।





