ब्रेकिंग
NEET से BPSC तक ‘सेटिंग’ का मास्टरमाइंड! BARC कर्मी रौशन के 25 लाख वाले खेल का खुलासाBihar News : 38 लाख वेतन... फिर करोड़ों की संपत्ति! बिहार के DPO के घर EOU पहुंची तो जमीन-मकान और गहनों की खुली परतेंBihar weather : बिहार में फिर बदलेगा मौसम! पटना समेत 19 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, जानें आपके जिले में कैसा रहेगा मौसमपटना में डेंगू का खतरा बढ़ा: अगस्त के पहले सप्ताह में ही मिले 19 नए मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्टBJP विधायक की हत्या की साजिश! जेल अधीक्षक समेत चार के खिलाफ FIR दर्ज; गुमनाम पत्र ने खोला राजNEET से BPSC तक ‘सेटिंग’ का मास्टरमाइंड! BARC कर्मी रौशन के 25 लाख वाले खेल का खुलासाBihar News : 38 लाख वेतन... फिर करोड़ों की संपत्ति! बिहार के DPO के घर EOU पहुंची तो जमीन-मकान और गहनों की खुली परतेंBihar weather : बिहार में फिर बदलेगा मौसम! पटना समेत 19 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, जानें आपके जिले में कैसा रहेगा मौसमपटना में डेंगू का खतरा बढ़ा: अगस्त के पहले सप्ताह में ही मिले 19 नए मरीज, स्वास्थ्य विभाग अलर्टBJP विधायक की हत्या की साजिश! जेल अधीक्षक समेत चार के खिलाफ FIR दर्ज; गुमनाम पत्र ने खोला राज

Bihar Teacher Ranking : बिहार में अब IPS मॉडल पर तय होगा 5.18 लाख शिक्षकों की वरिष्ठता, अनुभव के आधार पर तय होगा प्रभार

बिहार में 5.18 लाख सरकारी शिक्षकों की रैंकिंग अब IPS मॉडल पर होगी। अनुभव और योग्यता के आधार पर बड़े-छोटे स्कूलों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

Bihar Teacher Ranking : बिहार में अब IPS मॉडल पर तय होगा 5.18 लाख शिक्षकों की वरिष्ठता, अनुभव के आधार पर तय होगा प्रभार
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar Teacher Ranking : बिहार में सरकारी स्कूलों के 5.18 लाख शिक्षकों की वरिष्ठता अब आईपीएस अधिकारियों की तर्ज पर रैंकिंग प्रणाली से तय की जाएगी। शिक्षा विभाग ने अनुभव और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस फैसले का उद्देश्य स्कूलों में प्रभार (हेडशिप) को लेकर होने वाले विवाद, गुटबाजी, गाली-गलौज और मारपीट जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है।


शिक्षा विभाग के मुताबिक, हर वर्ष मुख्यालय को प्रभार से जुड़ी 7,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं। कई स्कूलों में प्रधानाध्यापक नियुक्त नहीं होने के कारण वरिष्ठता को लेकर विवाद गहराता है। अब विभाग शिक्षकों की स्पष्ट रैंकिंग तय कर जिम्मेदारी सौंपेगा, ताकि पारदर्शिता और अनुशासन कायम रहे।


शिक्षा मंत्री Sunil Kumar ने बताया कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति की जा रही है। जहां नियमित प्रधानाध्यापक नहीं हैं, वहां नियम के अनुसार सबसे वरिष्ठ शिक्षक को प्रभार दिया जाएगा। नई रैंकिंग प्रणाली से यह प्रक्रिया और अधिक स्पष्ट और विवादमुक्त होगी।


कैसे होगी रैंकिंग?

शिक्षकों की रैंकिंग जिला स्तर पर तैयार की जाएगी और उसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी। रैंकिंग कक्षा समूहों के आधार पर होगी—

  • कक्षा 1 से 5

  • कक्षा 6 से 8

  • कक्षा 9 से 10

  • कक्षा 11 से 12

हर वर्ग के लिए अनुभव और शैक्षणिक योग्यता को अलग-अलग मानदंडों के तहत आंका जाएगा। रैंकिंग तय करने से पहले लंबित शिकायतों का निपटारा किया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं, जहां शिक्षकों की आपत्तियां और दावे सुने जाएंगे।


जिम्मेदारी कैसे तय होगी?

स्कूलों की जिम्मेदारी तय करते समय शिक्षकों के अनुभव को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। बड़े विद्यालय, जहां छात्र संख्या अधिक है, वहां अधिक अनुभवी और उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापक को तैनात किया जाएगा।

इसके विपरीत, कम अनुभव और कम शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों को छोटे विद्यालयों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जहां छात्रों की संख्या कम है। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और शिक्षण व्यवस्था को संतुलित रखने में मदद मिलेगी।


प्रमंडल स्तर पर क्या प्रावधान?

जिन स्कूलों में प्रधानाध्यापक नियुक्त नहीं हैं, वहां प्रमंडल स्तर पर नियुक्त शिक्षक को सबसे वरिष्ठ माना जाएगा। यदि मंडल स्तर पर भी नियुक्ति नहीं हुई है, तो अनुभव के आधार पर वरिष्ठता तय की जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत—

  • कक्षा 9-10 पढ़ाने के लिए कम से कम 8 वर्ष का अनुभव आवश्यक होगा।

  • कक्षा 11-12 के लिए न्यूनतम 4 वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया है।

इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उच्च कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षक पर्याप्त अनुभव रखते हों और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।


क्या होगा असर?

शिक्षा विभाग का मानना है कि रैंकिंग प्रणाली लागू होने से स्कूलों में अनुशासन मजबूत होगा और प्रभार को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी। पारदर्शी प्रक्रिया से शिक्षकों में असंतोष घटेगा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली सुचारु होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हुई, तो सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जिला स्तर पर रैंकिंग प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है।