Bihar News : बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन के जनता दरबार में शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। एक फरियादी ने मंत्री के सामने ही कथित रूप से रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी को फोन लगाया। फोन पर हुई बातचीत ने वहां मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया।
आरोप है कि पीड़ित से अनुदान की राशि जारी करने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। सबसे खास बात यह रही कि यह पूरी बातचीत मंत्री के सामने स्पीकर पर हुई और इसका वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया गया। मामला सामने आते ही मंत्री ने नाराजगी जाहिर की और संबंधित कर्मचारी पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया।
अनुदान राशि नहीं मिलने से परेशान था पीड़ित
यह पूरा मामला सीतामढ़ी जिले से जुड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, सोनबरसा थाना क्षेत्र में दर्ज एससी-एसटी एक्ट के एक मामले के पीड़ित को सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि का इंतजार था। नियमानुसार पीड़ित को जिला कल्याण कार्यालय के माध्यम से अनुदान की राशि मिलनी थी, लेकिन लंबे समय के बाद भी उसके खाते में पैसा नहीं पहुंचा।
पीड़ित का आरोप था कि राशि जारी करने के बदले जिला कल्याण कार्यालय के एक कर्मचारी की ओर से रिश्वत की मांग की जा रही थी। परेशान होकर वह अपनी शिकायत लेकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन के पास पहुंचा। मंत्री ने फरियादी की पूरी बात ध्यान से सुनी और मामले की सच्चाई जानने के लिए तुरंत उसी व्यक्ति को फोन लगाने को कहा, जिस पर पैसे मांगने का आरोप लगाया गया था।
मंत्री के सामने फोन पर हुई बातचीत
फरियादी ने मंत्री के सामने ही कथित डाटा ऑपरेटर चंदन कुमार को फोन किया। फोन को स्पीकर पर रखा गया, ताकि वहां मौजूद सभी लोग बातचीत सुन सकें। बातचीत के दौरान फरियादी ने अपनी अनुदान राशि को लेकर जानकारी मांगी। आरोप है कि दूसरी तरफ से कर्मचारी ने साफ तौर पर कहा कि पैसे देने के बाद ही खाते में राशि भेजी जाएगी। फरियादी के मुताबिक, उससे 50 हजार रुपये की मांग की गई। यह बातचीत सुनते ही मंत्री समेत वहां मौजूद लोग चौंक गए। मौके पर मौजूद लोगों ने पूरी घटना को रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सामने आने के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
मंत्री ने अधिकारी को लगाई फटकार
कथित रिश्वत मांगने की बात सामने आने के बाद मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने तुरंत सीतामढ़ी जिला कल्याण पदाधिकारी को फोन किया। उन्होंने अधिकारी से इस मामले पर नाराजगी जताई और पूछा कि उनके कार्यालय में कर्मचारी खुलेआम पैसे मांग रहे हैं और इसकी जानकारी अधिकारियों को क्यों नहीं है।मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर तय समय में कार्रवाई नहीं की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर सरकार का सख्त रुख
बिहार सरकार लगातार सरकारी योजनाओं और सहायता राशि में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने का दावा करती रही है। ऐसे में मंत्री के सामने आया यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद अगर किसी कर्मचारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगता है तो यह गंभीर मामला माना जाता है।अब इस मामले में विभागीय जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।फिलहाल मंत्री के निर्देश के बाद जिला स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।





