Bihar School News : बिहार के स्कूलों में किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य का ब्योरा ऐप पर अपलोड नहीं करना अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भारी पड़ सकता है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने इस मामले में 32 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) को नोटिस जारी कर कड़ी नाराजगी जताई है। परिषद ने साफ कर दिया है कि 10 अक्टूबर तक हर हाल में शत-प्रतिशत स्कूलों की रिपोर्ट ऐप पर अपलोड करनी होगी। निर्धारित समय तक रिपोर्टिंग पूरी नहीं हुई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, बिहार के सरकारी और संबंधित स्कूलों में कक्षा छह से 12वीं तक पढ़ने वाले किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए ‘व्यापक किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम’ चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत स्कूलों को मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से नियमित रूप से स्वास्थ्य एवं आरोग्य कार्यक्रम की रिपोर्ट भेजनी है। इसमें विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से संबंधित जरूरी जानकारियां दर्ज की जानी हैं। इसका उद्देश्य स्कूल स्तर पर किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य की स्थिति पर नजर रखना और जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराना है।
हालांकि, कार्यक्रम शुरू होने के करीब छह महीने बाद भी स्कूलों की रिपोर्टिंग की स्थिति बेहद खराब पाई गई है। एससीईआरटी की समीक्षा में सामने आया कि राज्य के हजारों स्कूल अब तक ऐप पर अपनी रिपोर्ट तक अपलोड नहीं कर पाए हैं। अप्रैल से सितंबर तक के आंकड़ों ने शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।राज्य में कुल 31,727 स्कूलों को इस रिपोर्टिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है। लेकिन अप्रैल में इनमें से महज 373 स्कूल, यानी करीब एक प्रतिशत स्कूलों ने ही अपनी रिपोर्ट भेजी। मई में स्थिति में मामूली सुधार हुआ और 403 स्कूलों ने रिपोर्टिंग की। जून में तो हालात और खराब रहे। इस महीने सिर्फ 53 स्कूलों, यानी करीब 0.3 प्रतिशत स्कूलों से ही रिपोर्ट प्राप्त हो सकी।
जुलाई में रिपोर्टिंग का आंकड़ा बढ़कर 901 स्कूलों तक पहुंचा, लेकिन यह भी कुल स्कूलों की तुलना में महज तीन प्रतिशत के आसपास रहा। अगस्त में 576 स्कूलों ने रिपोर्ट दी, जबकि सितंबर में सबसे ज्यादा 1,448 स्कूलों ने ऐप के जरिए अपनी रिपोर्ट अपलोड की। सितंबर में प्रदर्शन पहले के मुकाबले बेहतर जरूर रहा, लेकिन कुल चिह्नित स्कूलों के हिसाब से यह आंकड़ा सिर्फ करीब पांच प्रतिशत ही है। यानी छह महीने की अवधि में भी राज्य के 95 प्रतिशत से अधिक स्कूलों से किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की रिपोर्टिंग नहीं हो सकी है। यही वजह है कि एससीईआरटी ने अब मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलों के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। परिषद की ओर से भेजे गए पत्र में अधिकारियों को रिपोर्टिंग व्यवस्था में तेजी लाने और सभी स्कूलों से समय पर डाटा अपलोड कराने का निर्देश दिया गया है।
एससीईआरटी की कार्रवाई से मधुबनी, गोपालगंज, सुपौल, समस्तीपुर, सीवान और मुंगेर जिले फिलहाल बाहर हैं। इन छह जिलों को छोड़कर राज्य के बाकी सभी जिलों के डीईओ और डीपीओ को नोटिस जारी किया गया है। परिषद ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके जिले में कक्षा छह से 12वीं तक के सभी संबंधित स्कूल मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वास्थ्य एवं आरोग्य कार्यक्रम की रिपोर्ट भेजें। अधिकारियों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि अब केवल निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा। जिला स्तर से लेकर स्कूल स्तर तक मॉनिटरिंग करनी होगी और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को पूरा कराना होगा। एससीईआरटी ने 10 अक्टूबर की समयसीमा तय करते हुए शत-प्रतिशत डाटा अपलोड करने का निर्देश दिया है।
संयुक्त निदेशक (डायट) डॉ. सुरेंद्र कुमार ने कहा है कि 10 अक्टूबर तक सभी स्कूलों को ऐप के माध्यम से रिपोर्ट भेजनी अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय तक रिपोर्टिंग पूरी नहीं हुई तो संबंधित स्कूलों के हेडमास्टर, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) और समग्र शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। इसके बाद जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कार्यक्रम के जरिए बिहार के लाखों किशोर-किशोरियों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की तस्वीर सामने आनी है, उसकी रिपोर्टिंग छह महीने बाद भी इतनी कमजोर क्यों है? एससीईआरटी की सख्ती के बाद देखना होगा कि 10 अक्टूबर की डेडलाइन तक स्कूलों की रिपोर्टिंग 100 प्रतिशत तक पहुंचती है या फिर एक बार फिर आंकड़े विभाग के दावों की पोल खोलते हैं।





