Bihar News: उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। मोकामा में गंगा नदी पर राजेंद्र सेतु के समानांतर तैयार किया गया नया डबल लाइन रेल पुल अब ट्रेनों के परिचालन के लिए तैयार हो गया है। रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के निरीक्षण और ट्रायल के बाद इस पुल के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार से नए पुल पर यात्री और मालगाड़ियों के संचालन की सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके शुरू होने से मोकामा के रास्ते उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल यातायात को बड़ी राहत मिलेगी।
नए रेल पुल का निर्माण मौजूदा राजेंद्र सेतु के समानांतर पटना की ओर करीब 50 मीटर की दूरी पर किया गया है। करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत वाली इस पूरी परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य रेल पुल शामिल है। पुल पर दोहरी रेल लाइन बिछाई गई है, जिससे इस महत्वपूर्ण रेलखंड की क्षमता पहले की तुलना में काफी बढ़ जाएगी।
रेल संरक्षा आयुक्त, पूर्वी सर्किल कोलकाता गुरु प्रकाश ने शनिवार और रविवार को नए पुल के साथ राजेंद्रपुल-हाथीदह-रामपुर डुमरा रेलखंड और टाल स्टेशन का दो दिवसीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पुल और उससे जुड़े रेल ढांचे की सुरक्षा व्यवस्था को परखा गया। रविवार को नए पुल पर अलग-अलग गति से ट्रेन का ट्रायल भी किया गया। इसके बाद सीआरएस की रिपोर्ट सामने आई और परिचालन की अंतिम औपचारिकताएं पूरी होने का रास्ता साफ हुआ।
इस परियोजना की खास बात यह है कि नया पुल बनने के बाद भी पुराना राजेंद्र सेतु रेल परिचालन के लिए उपयोग में रहेगा। यानी गंगा के इस हिस्से में अब कुल तीन रेल लाइनें उपलब्ध होंगी। दो नई लाइनें नए पुल पर और एक लाइन पुराने राजेंद्र सेतु पर रहेगी। इससे मोकामा-राजेंद्र पुल रेलखंड पर ट्रेनों को चलाने के लिए रेलवे के पास पहले की तुलना में कहीं ज्यादा विकल्प होंगे।
पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई करीब 15.5 किलोमीटर है। इसमें मुख्य गंगा पुल के अलावा लगभग 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायडक्ट, आठ छोटे पुल, दो रोड ओवरब्रिज और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण किया गया है। पुल के दोनों छोर को मौजूदा रेल नेटवर्क से जोड़ा गया है। उत्तर की ओर हाथीदह, टाल और रामपुर डुमरा जबकि दक्षिण दिशा में राजेंद्रपुल और बरौनी स्टेशन से इसका संपर्क रहेगा।
नए पुल के चालू होने का सबसे बड़ा फायदा उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच चलने वाली ट्रेनों को मिलेगा। अभी इस रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव अधिक रहने के कारण परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बनती रही है। अतिरिक्त दोहरी लाइन मिलने से ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन आएगा और एक ही रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा।
इसका फायदा सिर्फ यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं रहेगा। मालगाड़ियों के लिए भी अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से माल ढुलाई को गति मिलने की उम्मीद है। रेलवे के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद इस क्षेत्र में रेल यातायात की क्षमता करीब ढाई गुना तक बढ़ सकती है। इससे उत्तर बिहार से दक्षिण बिहार और आगे देश के पूर्वोत्तर हिस्सों की ओर रेल संपर्क को भी मजबूती मिलेगी।
मोकामा का यह रेल पुल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाले प्रमुख रेल मार्ग पर स्थित है। नई लाइनें शुरू होने के बाद ट्रेनों के आवागमन का दबाव बांटने में मदद मिलेगी और यात्रियों को आने वाले समय में बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से चल रही इस परियोजना के परिचालन में आने के साथ मोकामा के रेल नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।





