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Bihar rent agreement : बिहार में रेंट एग्रीमेंट की फीस में भारी कटौती, किरायेदारों को होगा हज़ारों रुपए तक की बचत

बिहार सरकार ने रेंट एग्रीमेंट और लीज शुल्क में 50% तक की कटौती का प्रस्ताव रखा है। स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क कम होने से पटना समेत पूरे राज्य के किरायेदारों को बड़ी राहत मिलेगी।

Bihar rent agreement : बिहार में रेंट एग्रीमेंट की फीस में भारी कटौती, किरायेदारों को होगा हज़ारों रुपए तक की बचत
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar rent agreement : बिहार में किरायेदारी अब और सुरक्षित और किफायती होने जा रही है। राज्य सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने रेंट एग्रीमेंट और लीज शुल्क में 50 फीसदी तक कटौती करने की तैयारी कर ली है। इसका उद्देश्य किरायेदारों के लिए कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना और महंगी फीस के कारण एग्रीमेंट कराने से बचने वालों की संख्या घटाना है।


सरकार ने इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जो जल्द ही नई दरों का प्रस्ताव पेश करेगी। इस कदम से पटना समेत पूरे बिहार के 10 लाख से अधिक किरायेदार सीधे लाभान्वित होंगे। वर्तमान में शहर में 3 लाख 10 हजार रजिस्टर्ड होल्डिंग टैक्स देने वाले घर हैं, लेकिन कानूनी रूप से केवल कुछ ही रेंट एग्रीमेंट बन रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण महंगी स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क है।


वर्तमान व्यवस्था में किरायेदार को कुल किराए का 0.5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और 2 प्रतिशत निबंधन शुल्क देना पड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर कुल किराया 10 लाख रुपए है, तो स्टांप ड्यूटी 5 हजार और निबंधन शुल्क 20 हजार रुपए होगा। ऐसे में 10 साल के एग्रीमेंट पर कुल खर्च करीब 25 हजार रुपए हो जाता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद स्टांप ड्यूटी 0.5 प्रतिशत ही रहेगी, लेकिन निबंधन शुल्क घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इसका मतलब 10 लाख रुपए के किराए पर कुल खर्च घटकर 15 हजार रुपए हो जाएगा, यानी सीधे 10 हजार रुपए की बचत।


यह रजिस्टर्ड एग्रीमेंट ही कानूनी मान्यता रखता है। रिटायर्ड डीआईजी रजिस्ट्रेशन शेखर नीलम के अनुसार रेंट और लीज एग्रीमेंट का निबंधन रजिस्ट्री में होना आवश्यक है। एक साल से कम अवधि के एग्रीमेंट भी बिना रजिस्ट्री कानूनी रूप से मान्य नहीं होते। अधिवक्ता अनिल कुमार उद्योगी ने बताया कि नोटरी एक्ट में रेंट या लीज एग्रीमेंट का कोई प्रावधान नहीं है। विवाद की स्थिति में केवल रजिस्ट्री दस्तावेज ही कानूनी तौर पर मान्य हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि फीस में कटौती और जागरूकता बढ़ने से आने वाले समय में रेंट एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। किरायेदार अब कानूनी सुरक्षा के साथ अपने अधिकारों का संरक्षण कर पाएंगे और महंगी फीस की चिंता से मुक्त होंगे।


बिहार सरकार की यह योजना न केवल किरायेदारों के लिए राहत है, बल्कि घर और दुकान मालिकों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। नई दरें लागू होने के बाद रेंट एग्रीमेंट की प्रक्रिया और अधिक सरल और सुलभ हो जाएगी, जिससे पूरे राज्य में कानूनी रूप से सुरक्षित किरायेदारी का प्रवाह बढ़ेगा। यह पहल बिहार में किरायेदारी प्रणाली को पारदर्शी बनाने और कानूनी विवादों से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।