Bihar Police Digital Mapping : बिहार में अब किसी वारदात के बाद यह पता लगाने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा कि मामला किस थाने के इलाके का है। बिहार पुलिस राज्य के सभी थानों की सीमाओं को डिजिटल नक्शे पर लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जीआईएस (Geographic Information System) आधारित थाना क्षेत्राधिकार मैपिंग पोर्टल तैयार किया जा रहा है। पोर्टल शुरू होने के बाद पुलिसकर्मी किसी भी इलाके को मैप पर देखकर तुरंत यह पता कर सकेंगे कि वह किस थाना क्षेत्र में आता है।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि थाना क्षेत्र की सीमा को लेकर होने वाला विवाद कम होगा। अक्सर किसी घटना के बाद यह सवाल खड़ा हो जाता है कि घटनास्थल किस थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसी स्थिति में कार्रवाई शुरू होने में समय लग जाता है। डिजिटल मैपिंग के बाद घटनास्थल की लोकेशन के आधार पर संबंधित थाना आसानी से तय किया जा सकेगा। इससे पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, जीआईएस आधारित मैपिंग को डिजिटल पुलिसिंग के बड़े अभियान के तौर पर देखा जा रहा है। राज्य में पहले से ही 968 से ज्यादा पुलिस थाने और चौकियां सीसीटीएनएस से जुड़ी हैं। वहीं आईसीजेएस के जरिए पुलिस के साथ अदालत, फोरेंसिक लैब, अभियोजन और जेल प्रशासन के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान भी मजबूत किया जा रहा है। अब थाना क्षेत्राधिकार को डिजिटल मैप से जोड़ने की पहल इसी व्यवस्था को और आगे ले जाने वाली है।
नई व्यवस्था में सिर्फ थाना सीमा ही नहीं, बल्कि अपराध के हॉट स्पॉट और ब्लैक स्पॉट की जानकारी भी मैप पर दर्ज की जा सकेगी। इससे पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस इलाके में किस तरह की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी खास क्षेत्र में लगातार चोरी, लूट या अन्य अपराध की घटनाएं सामने आ रही हैं तो पुलिस उस इलाके को चिन्हित कर वहां गश्त बढ़ा सकती है।
इसका सीधा असर पुलिस की पेट्रोलिंग व्यवस्था पर भी पड़ेगा। थाना क्षेत्र और संवेदनशील इलाकों की डिजिटल जानकारी उपलब्ध होने से गश्ती दलों की तैनाती ज्यादा व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। जरूरत के अनुसार पुलिस वाहन, जवान और दूसरे संसाधनों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा जा सकेगा। यानी फैसला केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि मैप और उपलब्ध आंकड़ों को देखकर लेने की कोशिश होगी।
आपात स्थिति में भी यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो सकती है। किसी इलाके से सूचना मिलने पर नियंत्रण कक्ष घटनास्थल की लोकेशन देखकर संबंधित थाने और नजदीकी पुलिस टीम को भेज सकता है। डायल-112 जैसी आपातकालीन पुलिस सेवा के साथ मैपिंग व्यवस्था का बेहतर तालमेल होने पर रिस्पॉन्स टाइम कम करने में मदद मिल सकती है।
रेल लाइन, सड़क, नहर, जिला सीमा या दो थानों के बीच पड़ने वाले इलाकों में क्षेत्राधिकार को लेकर जो असमंजस पैदा होता है, उसे भी डिजिटल नक्शे से कम करने की कोशिश होगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी किसी बड़े अभियान या कानून-व्यवस्था की स्थिति में मैप के जरिए इलाके की स्थिति को जल्दी समझ सकेंगे।
बीट पुलिसिंग को मजबूत करने में भी यह पोर्टल मददगार हो सकता है। किस बीट में कौन सा इलाका, मोहल्ला या गांव आता है, इसकी जानकारी डिजिटल रूप से स्पष्ट होने पर पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करना आसान होगा। इसके साथ ही जनसंख्या और क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए बल और वाहनों का संतुलित इस्तेमाल भी किया जा सकेगा।
हालांकि इस पूरी व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल मैप कितना सटीक और अपडेट रखा जाता है। थाना सीमा में बदलाव, नए इलाके के जुड़ने या प्रशासनिक सीमाओं में परिवर्तन होने पर पोर्टल को भी समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होगा। बिहार पुलिस ने पोर्टल के इस्तेमाल को लेकर थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई है।





