Bihar Politics : बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज से अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। वह शुक्रवार को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही राज्य की सियासी तस्वीर में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। लगभग 20 वर्षों बाद बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है, जहां नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में वापसी के बाद बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य में एनडीए की नई सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कोर टीम की एक अहम बैठक शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित होने जा रही है, जिसमें बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मंथन किया जाएगा। जिसके बाद भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक होगी और उसमें मुख्यमंत्री के नाम पर औपचारिक मुहर लगेगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद वह जल्द ही भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में नई सरकार के स्वरूप, सत्ता हस्तांतरण और अगले मुख्यमंत्री के चयन को लेकर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि यह बैठक बिहार की राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। वह अपने करियर में छह बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2005 में उनके नेतृत्व में बिहार में एनडीए की सरकार बनी थी, जिसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। इसके बाद से वह लगातार बिहार की सत्ता के केंद्र में बने रहे।
अब एक बार फिर नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में वापसी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली से पटना लौटने के बाद वह मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगे। अनुमान है कि 14 अप्रैल तक उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया जाएगा और 16 अप्रैल तक बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
दिल्ली पहुंचने पर नीतीश कुमार ने स्वयं भी संकेत दिए कि वह राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद कुछ दिनों में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और सत्ता की जिम्मेदारी नए नेतृत्व को सौंप दी जाएगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। भाजपा के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है। संभावित दावेदारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय, राज्य के मंत्री दिलीप जायसवाल, विधायक संजीव चौरसिया, पूर्व मंत्री जनक राम और पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी जैसे प्रमुख नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।
हालांकि, अभी तक किसी नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। पार्टी नेतृत्व इस विषय पर पूरी तरह से रणनीतिक तरीके से निर्णय लेने की तैयारी में है। संभावना है कि भाजपा कोई चौंकाने वाला नाम भी सामने ला सकती है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए शुक्रवार को दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे। इस बैठक में बिहार भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा सहित प्रदेश अध्यक्ष भी इस बैठक के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।
उधर, राज्यसभा में बिहार से चुने गए एनडीए के पांच सांसदों में से तीन सांसद 16 अप्रैल को शपथ लेंगे। इनमें भाजपा के नवनिर्वाचित सांसद, एक अन्य वरिष्ठ नेता और सहयोगी दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। शुक्रवार को विशेष रूप से आयोजित कार्यक्रम में नीतीश कुमार भी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।
उनके साथ जदयू के वरिष्ठ नेता रामनाथ ठाकुर भी तीसरी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। यह शपथ ग्रहण उपराष्ट्रपति द्वारा संसद भवन में दोपहर 12:15 बजे कराया जाएगा। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के अनुसार, यह राजनीतिक बदलाव पूरी तरह से योजनाबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा है और आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।






