Bihar News: बिहार में इन दिनों एक ओर जहां अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई में जुटी है, वहीं दूसरी ओर आगामी त्योहारों, खासकर मुहर्रम को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को लॉ एंड ऑर्डर के एडीजी पंकज दाराद ने इस संबंध में मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और प्रदेशव्यापी सुरक्षा व्यवस्था की रूपरेखा साझा की।
एडीजी दाराद ने बताया कि इस वर्ष बिहार में कुल 13,719 ताजिया जुलूस निकाले जाएंगे, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हैं। सभी जुलूस लाइसेंस प्राप्त होंगे। मुहर्रम के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए 50 से अधिक कंपनियां BSAP की अलग-अलग जिलों में तैनात की जाएंगी। साथ ही 7 कंपनियां केंद्रीय बल की भी उपलब्ध रहेंगी। सभी डीएम और एसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई करें और स्वयं भी मौके पर पहुंचें।
राज्य को मुहर्रम के लिहाज से संवेदनशील माना गया है। विशेष रूप से सीतामढ़ी, कटिहार, पूर्णिया, सीवान, गोपालगंज, भागलपुर, बांका, नालंदा, मुजफ्फरपुर, अररिया, औरंगाबाद, बगहा, दरभंगा, मधुबनी, मधेपुरा, रोहतास और पटना जिलों को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
पंकज दाराद ने कहा कि मुहर्रम के दौरान भड़काऊ नारेबाजी, जबरन चंदा वसूली और धार्मिक स्थलों के पास तनाव की आशंका बनी रहती है, लेकिन इस बार पुलिस की सख्त निगरानी और पूर्व तैयारी से ऐसे हालात नहीं बनने दिए जाएंगे। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जुलूस मार्गों का पहले से निरीक्षण किया जाएगा और यदि किसी स्थान पर अवरोध की संभावना होगी, तो उसका समाधान पहले ही कर लिया जाएगा।बिना लाइसेंस के कोई भी जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि मिश्रित आबादी वाले इलाकों में शांति समिति की बैठकें कराई जाएं और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई की जाए।





