पटना: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हो रहे चुनाव का प्रचार आज शाम 5 बजे थम जाएगा, लेकिन उससे पहले सियासी पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशियों ने प्रचार के आखिरी दौर में पूरी ताकत झोंक दी है। कहीं डोर-टू-डोर कैंपेन चल रहा है तो कहीं फोन कॉल और वॉइस मैसेज के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाई जा रही है। इसी बीच पटना स्नातक सीट से जदयू प्रत्याशी और मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने से चुनावी माहौल और गरमा गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी अस्पताल पहुंचकर नीरज कुमार का हालचाल जान चुके हैं।
इस बार का विधान परिषद चुनाव सामान्य चुनावी मुकाबले से कहीं ज्यादा दिलचस्प हो गया है। आठ सीटों पर होने वाला यह चुनाव एनडीए की एकजुटता, महागठबंधन के अंदर तालमेल, जन सुराज की बढ़ती सक्रियता और बागी तेवर वाले नेताओं के प्रभाव की भी परीक्षा ले रहा है। यही वजह है कि चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की है। यहां जदयू ने लगातार तीन बार जीत चुके नीरज कुमार को फिर मैदान में उतारा है। नीरज चौथी जीत के लिए जोर लगा रहे हैं, लेकिन इस बार मुकाबला पहले की तुलना में ज्यादा पेचीदा है। जन सुराज ने डॉ. अनुज सिंह को मैदान में उतारा है, जबकि राजद के दिलीप कुमार और कांग्रेस के असदुल्लाह खान भी मुकाबले में हैं।
मुकाबले को असल में तब बड़ा राजनीतिक ट्विस्ट मिला, जब मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने खुलकर अनुज सिंह का समर्थन शुरू कर दिया। अनंत सिंह की नाराजगी सीधे तौर पर नीरज कुमार से जुड़ी है। वह आरोप लगाते रहे हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में नीरज कुमार ने उनके खिलाफ काम किया था। ऐसे में एक ही पार्टी के विधायक का पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ दूसरे उम्मीदवार के समर्थन में उतरना जदयू के लिए असहज स्थिति बन गया। पार्टी स्तर पर नाराजगी दूर करने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन चुनाव के आखिरी चरण तक यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।
इस बीच नीरज कुमार की तबीयत खराब होने की खबर ने चुनावी माहौल में एक और मोड़ ला दिया। अस्पताल में भर्ती नीरज से मिलने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी पहुंचे। चुनाव के आखिरी दिन उनकी तबीयत और अस्पताल में नेताओं के पहुंचने की तस्वीर ने राजनीतिक गलियारों में भी खूब चर्चा बटोरी।
उधर, दरभंगा स्नातक सीट पर भी मुकाबला काफी रोचक है। भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद सर्वेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है। 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज करने वाले सर्वेश कुमार अब भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। उनके सामने राजद के अनिल कुमार झा, कांग्रेस के राजनिकांत पाठक और जन सुराज के डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी हैं। इस सीट पर सबसे ज्यादा 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, ऐसे में यहां मुकाबला काफी बहुकोणीय नजर आ रहा है।
तिरहुत स्नातक सीट पर एनडीए की ओर से जदयू के अभिषेक झा चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने जन सुराज के विमोहन कुमार, राजद की रश्मि विनायक गौतम और कांग्रेस के राजनिकांत पाठक जैसे उम्मीदवार हैं। वहीं कोसी स्नातक सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद एनके यादव पर भरोसा जताया है। उनके सामने राजद के नीतेश कुमार, कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल और जन सुराज के रजनीश रंजन हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी मुकाबला कम दिलचस्प नहीं है। पटना शिक्षक सीट पर भाजपा के मौजूदा विधान पार्षद नवल किशोर यादव फिर मैदान में हैं। उनके सामने राजद के पूर्व विधायक संजीव कुमार सिंह, कांग्रेस के संजय यादव और जन सुराज की दिव्या ज्योति हैं। शिक्षक मतदाताओं के बीच वेतन, सेवा शर्त, अनुदानित संस्थानों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।
दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा विधान पार्षद मदन मोहन झा को फिर मैदान में उतारा है। जन सुराज के एसपी राय उन्हें चुनौती दे रहे हैं। तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह और जन सुराज के श्याम नंदन यादव के बीच मुकाबला है। वहीं सारण शिक्षक सीट पर जन सुराज ने मौजूदा विधान पार्षद अफाक अहमद को उम्मीदवार बनाया है। राजद ने उनके सामने जयराम यादव को उतारा है।
इस चुनाव की एक बड़ी खासियत यह भी है कि कई सीटों पर विपक्षी दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के सामने हैं। राजद ने छह सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि कांग्रेस भी कई सीटों पर मैदान में है। ऐसे में महागठबंधन के वोटों में बिखराव का फायदा एनडीए को मिल सकता है। दूसरी तरफ एनडीए के लिए भी भीतरघात और स्थानीय स्तर पर नाराज नेताओं को साधना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रशांत किशोर की जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारकर चुनाव को और ज्यादा बहुकोणीय बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि क्या जन सुराज विधान परिषद की इस लड़ाई में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा पाएगा। अगर पार्टी कुछ सीटों पर अप्रत्याशित प्रदर्शन करती है, तो इसे बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। कुल 164 उम्मीदवार मैदान में हैं। आज शाम 5 बजे प्रचार का शोर थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी और राजनीतिक दल बंद कमरे की रणनीति और मतदाताओं की अंतिम गोलबंदी में जुटेंगे। अब असली सवाल यही है कि 23 अक्टूबर को बैलेट बॉक्स खुलने के बाद किसकी रणनीति काम आती है—एनडीए की एकजुटता, महागठबंधन का वोट बैंक या फिर जन सुराज का नया प्रयोग।





