पटना/भागलपुर : बिहार के शिक्षा विभाग में वर्षों से एक ही जगह पर जमे कर्मियों और लिपिकों के तबादले की तैयारी तेज हो गई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने संकेत दिया है कि विभाग में लंबे समय से एक ही जिले या प्रमंडल में पदस्थापित कर्मियों का अब राज्य स्तर पर तबादला किया जाएगा। सरकार की इस पहल का उद्देश्य विभागीय कामकाज में पारदर्शिता लाना और शिक्षकों से जुड़ी शिकायतों पर अंकुश लगाना है।
शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को भागलपुर में विधान परिषद प्रत्याशी एनके यादव के पक्ष में आयोजित मतदाता संवाद कार्यक्रम में शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में वर्षों से एक ही जगह पर जमे कर्मियों के राज्यस्तरीय तबादले की तैयारी पूरी कर ली गई है। आने वाले दिनों में इसकी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। मंत्री के इस बयान के बाद बिहार के सभी जिलों में लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत शिक्षा विभाग के कर्मियों और लिपिकों के बीच तबादले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में कई ऐसे कर्मियों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं और शिक्षकों को परेशान करने या उनसे पैसे की मांग करने के आरोपों से घिरे हैं। सरकार को इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी कर्मचारी को एक ही जिले या प्रमंडल में वर्षों तक जमे रहने की छूट नहीं दी जाएगी। तबादले की नई व्यवस्था के तहत राज्य के एक हिस्से में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारी को दूसरे जिले या प्रमंडल में भेजा जा सकता है। मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि भागलपुर में बैठा कर्मचारी अब कैमूर में जाकर काम कर सकता है। यानी तबादले का दायरा केवल जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य स्तर पर कर्मियों की तैनाती की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही जगह पर पदस्थापन से विभागीय व्यवस्था में एक तरह का स्थायी नेटवर्क विकसित हो जाता है। इससे कई बार कामकाज में पारदर्शिता प्रभावित होने और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में राज्यस्तरीय तबादले के जरिए व्यवस्था में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है।
शिक्षकों से वसूली की शिकायतों पर सख्ती
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों का किसी भी स्तर पर दोहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग में काम कराने के नाम पर पैसे की मांग करने वाले कर्मियों पर सरकार की नजर है। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें मिलेंगी, उनकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का रुख स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार या शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने वाले कर्मियों को किसी भी स्थिति में संरक्षण नहीं मिलेगा। मंत्री ने यह भी कहा कि अब शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में अनावश्यक देरी नहीं होगी। सरकार ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करने की तैयारी में है। इससे शिक्षा विभाग के कार्यालयों में काम कराने वाले शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सभी प्रमंडलों में विकसित होंगे गुरुकुलम
शिक्षा मंत्री ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए गुरुकुलम व्यवस्था विकसित करने की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित गुरुकुलम को नए स्वरूप में विकसित करने की योजना है। राज्य का पहला गुरुकुलम बक्सर में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद बिहार के सभी प्रमंडलों में गुरुकुलम स्थापित करने की योजना है।
भागलपुर सहित राज्य के सभी प्रमंडलों में इसकी स्थापना से संस्कृत और पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक शैक्षणिक व्यवस्था को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। सरकार संस्कृत विद्यालयों की व्यवस्था को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
सातवें वेतनमान पर 30 दिन में तस्वीर साफ होने की उम्मीद
शिक्षकों के सातवें वेतनमान के मुद्दे पर भी शिक्षा मंत्री ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को इसका लाभ दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए अधिकारियों को बिहार के बाहर शिक्षकों को मिल रही सुविधाओं और बिहार में उपलब्ध सुविधाओं का तुलनात्मक अध्ययन करने का निर्देश दिया गया है।
सातवें वेतनमान को लागू करने में सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ और राज्य के बजट पर इसके प्रभाव का भी आकलन कराया जा रहा है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि अगले 30 दिनों में इस संबंध में नई व्यवस्था सामने आ सकती है। इससे लंबे समय से सातवें वेतनमान की मांग कर रहे शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ी हैं।
शारीरिक स्वास्थ्य अनुदेशकों को लेकर भी तैयारी
शारीरिक स्वास्थ्य अनुदेशकों को पूर्णकालिक किए जाने के मुद्दे पर भी सरकार ने पहल शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत शारीरिक स्वास्थ्य अनुदेशकों को पूर्णकालिक करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
सरकार की इन पहलों से आने वाले दिनों में बिहार के शिक्षा विभाग में बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राज्यस्तरीय तबादले, शिक्षकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, गुरुकुलम व्यवस्था, सातवें वेतनमान और शारीरिक स्वास्थ्य अनुदेशकों से जुड़े फैसलों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





