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बिहार में चूहों का नया कारनामा, मुसीबत में डाल दिया मरीजों को, PMCH के IGIC का मामला

PATNA: बिहार में चूहे पहले से ही बदनाम हैं। कभी दारू गटक जाने का आरोप लगा तो कभी बांध को कुतरने का तो कभी हीरे के गहने उड़ाने का आरोप चूहों पर लगाया गया। किसी ने भी इसकी जिम्म

बिहार में चूहों का नया कारनामा, मुसीबत में डाल दिया मरीजों को, PMCH के IGIC का मामला
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: बिहार में चूहे पहले से ही बदनाम हैं। कभी दारू गटक जाने का आरोप लगा तो कभी बांध को कुतरने का तो कभी हीरे के गहने उड़ाने का आरोप चूहों पर लगाया गया। किसी ने भी इसकी जिम्मेदारी नहीं ली सीधे चूहे पर ही आरोप लगा दिया। इस बार भी बेचारे चूहों पर 14 करोड़ की मशीन को कुतरने का आरोप लगा है। जिसके कारण मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। 


300 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन होना था लेकिन चूहों ने सबको पेंडिंग में डलवा दिया है। मामला पटना के पीएमसीएच स्थित IGIC से जुड़ा हुआ है। जहां हृदय रोग के मरीजों के लिए दो साल पहले दो कैथलैब मशीन 9 मंजिले नए बिल्डिंग में लगाई गयी थी। एक मशीन की कीमत 14 करोड़ रूपये हैं। मरीजों की सुविधा का ख्याल रखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 14 करोड़ रूपये मूल्य के 2 कैथलैब मशीन यहां लगाया था ताकि जांच में कोई दिक्कत ना हो। 


बता दें कि कैथलैब की मदद से एंजियोग्राफी, स्टेंटींग, पेसमेकर लगाने, दिल में छेद बंद होने जैसे जटिल ऑपरेशन किए जाते हैं लेकिन पिछले दो सप्ताह से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परेशानी इसलिए हो रही है कि चूहों ने इस कीमती मशीन का तार ही अपने दांतों से काट दिया है। एक बार फिर चूहों के मत्थे सारे आरोप मढ़ दिया गया। बताया गया कि चूहों ने सारा तार काट दिया है जिसके कारण मशीन काम नहीं कर रहा है। मशीन के काम नहीं करने के कारण करीब 300 मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो पाया है। सभी ऑपरेशन के इंतजार में बैठे हैं लेकिन अभी तक उन्हें इस संबंध में कुछ भी नहीं बताया गया है।


IGIC में कैथलैब करीब 15 दिन से काम नहीं कर रहा है। जिसके कारण मरीजों के ऑपरेशन को टाला जा रहा है। अब तक 300 से अधिक मरीज ऑपरेशन के इंतजार में बैठे हुए हैं। उनके परिजन रोजाना अस्पताल पहुंचते हैं यह जानने के लिए कैथलैब बना या नहीं। सभी का ध्यान इसी मशीन पर टिकी हुई है कि यह जल्द से जल्द बने तब ही ऑपरेशन के डेट मिल सकेगा। नियम तो यह है कि अस्पताल में कोई भी मशीन यदि खराब होती है तो उसे 24 घंटे के भीतर ठीक करवाया जाता है लेकिन यह नियम भी यहां फेल हो गयी और सारा दोष बेचारे चूहों के सिर पर मढ़ दिया गया।  


इस मामले पर IGIC के डायरेक्टर सुनील कुमार ने बताया कि मरीजों की भारी भीड़ के कारण एक मशीन पर लोड बढ़ गया है। तीन शिफ्ट में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, स्टेंटिंग और पेसमेकर लगाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि BMSICL को इस बात की सूचना दे दी गयी है। इस मशीन का सामान विदेश से आता है। खराब पार्ट का ऑर्डर ऑनलाइन कर दिया गया है। मेंटेंनेंस एजेंसी ने आश्वस्त किया है कि तीन-चार दिन में मशीन को ठीक कर लिया जाएगा।

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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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