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Bihar News: बिहार के एक MVI को EOU ने किया गिरफ्तार, नीलामी से जुड़े केस में चौथी गिरफ्तारी...

बिहार में जब्त शराब की नीलामी में कथित गड़बड़ी के मामले में EOU ने MVI सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार किया। हाई कोर्ट के आदेश पर दर्ज केस में अब तक चार गिरफ्तारियां।

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Tejpratap
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Bihar News :  बिहार में शराबबंदी के दौरान जब्त शराब की नीलामी से जुड़े कथित घोटाले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। गोपालगंज के तत्कालीन मोटरयान निरीक्षक और वर्तमान में गया में पदस्थापित सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी के साथ मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या चार हो गई है। गिरफ्तारी के बाद EOU की टीम सुनील कुमार सिंह से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी अब नीलामी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, अधिकारियों की भूमिका और कथित अनियमितताओं की कड़ियों को खंगाल रही है।


इस मामले की जांच पटना हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी। आर्थिक अपराध इकाई के मुताबिक, पटना हाई कोर्ट में दायर सिविल रिट याचिका (C.W.J.C. No. 4697/2025) में 4 नवंबर 2025 को पारित आदेश के आलोक में कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता राधेश्याम सिंह रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के खरहरी गांव के निवासी हैं। उनकी याचिका के आधार पर आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 42/2025 दर्ज किया गया। यह प्राथमिकी 20 नवंबर 2025 को दर्ज की गई थी।


हाई कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी

EOU की प्राथमिकी में भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा 52 भी इस मामले में शामिल की गई है। इन धाराओं का संबंध धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों से है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।


प्राथमिकी में गोपालगंज के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, नीलामी समिति के सदस्यों, बोली लगाने वाले रियाजुल आलम और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि जब्त शराब की नीलामी के दौरान किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था तथा कथित गड़बड़ी में किसकी क्या भूमिका रही।


पहले तीन गिरफ्तारियां, अब MVI पर कार्रवाई

सुनील कुमार सिंह से पहले इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें एक तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा भी शामिल है। तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब चौथी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।


सुनील कुमार सिंह गोपालगंज में मोटरयान निरीक्षक के पद पर तैनात रह चुके हैं और फिलहाल गया में पदस्थापित थे। उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी ने की है। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि नीलामी से जुड़े मामले में उनकी भूमिका क्या थी और उपलब्ध दस्तावेजों से कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।


उत्पाद विभाग से नीलामी समिति तक जांच का दायरा

इस कथित घोटाले की जांच केवल गिरफ्तार किए गए अधिकारियों तक सीमित नहीं है। गोपालगंज के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, नीलामी समिति के सदस्यों, बोली लगाने वाले रियाजुल आलम और नीलामी प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।


EOU नीलामी के रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नीलामी किस तरह संपन्न हुई, बोली लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई या नहीं और कथित अनियमितताओं के पीछे किन लोगों की भूमिका हो सकती है।


अब आगे क्या होगी कार्रवाई?

हाई कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों ने शराब नीलामी से जुड़े इस मामले को अहम बना दिया है। अब जांच एजेंसी की नजर इस बात पर है कि पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल में कौन से नए तथ्य सामने आते हैं। जरूरत पड़ने पर मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।


फिलहाल सुनील कुमार सिंह की गिरफ्तारी इस केस में चौथी गिरफ्तारी है। हालांकि, प्राथमिकी में नाम आने या गिरफ्तारी होने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा। अब देखना होगा कि EOU की जांच कथित नीलामी गड़बड़ी की किन-किन कड़ियों तक पहुंचती है और आगे किन लोगों की भूमिका सामने आती है।