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NEET छात्रा मौत केस में बड़ा मोड़! CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट ने पूछे 68 सवाल; अब इस दिन होगी अगली सुनवाई

पटना के चर्चित NEET छात्रा मौत मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर पॉक्सो कोर्ट ने सवालों की बौछार कर दी है। कोर्ट ने CBI से 68 और छात्रा के माता-पिता से 39 सवालों के जवाब मांगे हैं। अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।

NEET छात्रा मौत केस में बड़ा मोड़! CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट ने पूछे 68 सवाल; अब इस दिन होगी अगली सुनवाई
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

पटना: पटना के चर्चित NEET छात्रा मौत मामले में मंगलवार को उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब पॉक्सो की विशेष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट पर सवालों की लंबी फेहरिस्त सामने रख दी। विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन ने CBI से जांच से जुड़े 68 सवालों के जवाब मांगे हैं। वहीं, मृत छात्रा के माता-पिता को भी घटना से जुड़े 39 सवालों का जवाब देने का निर्देश दिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच की प्रक्रिया से जुड़े कई ऐसे बिंदुओं पर सवाल किए, जिनके जवाब जांच एजेंसी की ओर से तत्काल नहीं दिए जा सके। विशेष अदालत ने CBI की महिला अधिकारी, उनके अधिवक्ता और बिहार पुलिस की SIT की मुख्य जांचकर्ता एएसपी अनु कुमारी से भी पूछताछ की।

कोर्ट के सवालों ने बढ़ाई जांच पर नजर

अदालत के सवाल सीधे उस जांच प्रक्रिया से जुड़े रहे, जिसके आधार पर CBI ने छात्रा की मौत को आत्महत्या बताया है। कोर्ट ने जानना चाहा कि मृत छात्रा का MLC किसने घोषित किया? जिस हॉस्टल के तीसरे तल्ले पर घटना हुई, वहां 14 कमरों में रहने वाले सभी छात्रों के बयान लिए गए या नहीं? कोर्ट ने घटना वाले कमरे की सीलिंग और जब्ती की कार्रवाई को लेकर भी सवाल किया। अदालत ने पूछा कि कमरे को किसने सील किया, जब्ती सूची किसने तैयार की और उसे 24 घंटे के भीतर किस अदालत में दाखिल किया गया?

जांच के दौरान हॉस्टल की तलाशी और जब्ती की पूरी कार्रवाई का वीडियो बनाया गया था या नहीं, यह भी कोर्ट के सवालों में शामिल रहा। इसके अलावा अदालत ने यह भी पूछा कि तलाशी और जब्ती की कार्रवाई किस पुलिस अधिकारी ने की थी।

मामले में छात्रा के मोबाइल फोन को लेकर भी कोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल किए। अदालत ने पूछा कि छात्रा का मोबाइल सबसे पहले किसने अपने कब्जे में लिया? क्या उसका विधिवत सीजर बनाया गया? मोबाइल की जांच के लिए अदालत से अनुमति ली गई थी या नहीं?

माता-पिता ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने की मांग की

सुनवाई के दौरान मृत छात्रा के माता-पिता और उनके वकील ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करने की मांग की। पीड़ित पक्ष ने अदालत से कहा कि केस से जुड़े अभिलेख और परिवाद में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में संज्ञान लिया जाना चाहिए। परिजनों ने यह भी मांग की कि यदि कोर्ट क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करती है तो मामले की जांच CBI के SP स्तर के अधिकारी से कराई जाए। पीड़ित पक्ष ने CBI और बिहार पुलिस SIT की जांच पर लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं।

6 जनवरी को कमरे में मिली थी बेहोश

जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी 2026 को वह अपने कमरे में बेहोश मिली थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। शुरुआती जांच पटना पुलिस ने की थी। बाद में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। CBI ने करीब नौ महीने की जांच के बाद पॉक्सो की विशेष अदालत में 29 पन्नों की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। रिपोर्ट में 167 गवाहों के बयान, 101 दस्तावेज और 23 मटेरियल एग्जिबिट का उल्लेख किया गया है।

CBI का दावा- ओवरडोज लेकर की आत्महत्या

CBI ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में दावा किया है कि छात्रा ने दवा की अत्यधिक मात्रा लेकर आत्महत्या की। जांच एजेंसी के मुताबिक, छात्रा के साथ न तो दुष्कर्म हुआ और न ही उसकी हत्या की गई। लेकिन छात्रा के माता-पिता CBI की इस थ्योरी से सहमत नहीं हैं। छात्रा के पिता ने जांच का विरोध करते हुए पॉक्सो कोर्ट में विरोध सह परिवाद दायर किया है। इसमें हॉस्टल संचालक, हॉस्टल कर्मियों, वार्डन, केयरटेकर और उनके परिजनों समेत अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों को आरोपी बनाया गया है।

मां के बयान पर हाईकोर्ट की रोक

इस मामले में छात्रा की मां का बयान भी एक अहम बिंदु बना हुआ है। पॉक्सो कोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 को BNSS की धारा 183 के तहत मां का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराने का आदेश दिया था। CBI ने इस आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

फिलहाल पटना हाईकोर्ट ने मां का बयान दर्ज कराने संबंधी पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर रोक लगा रखी है। CBI का कहना है कि मां का बयान पहले ही दर्ज किया जा चुका है और धारा 183 के तहत दोबारा बयान दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं है। अब विशेष अदालत में 6 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट क्या फैसला लेता है और 68 सवालों के जवाब के बाद जांच की दिशा किस ओर जाती है।