ब्रेकिंग
पुलिस हेडक्वार्टर के सामने युवक की लाश मिलने से सनसनी, शव की पहचान करने में जुटी पुलिस धान खरीद में अनियमितता को लेकर EOU की जांच तेज, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंपहोम्योपैथिक क्लिनिक की आड़ में चल रहा था अवैध स्प्रिट का काला खेल, उत्पाद विभाग संचालक को किया गिरफ्तारखराब सड़क-पुल पर ठेकेदारों की खैर नहीं, 82 अधिकारियों की टीम करेगी जांचKISHANGANJ: ठाकुरगंज में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: 4.04 लाख की निकासी पर घमासान, कागजों पर बनी सड़क, जमीन पर गायबपुलिस हेडक्वार्टर के सामने युवक की लाश मिलने से सनसनी, शव की पहचान करने में जुटी पुलिस धान खरीद में अनियमितता को लेकर EOU की जांच तेज, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंपहोम्योपैथिक क्लिनिक की आड़ में चल रहा था अवैध स्प्रिट का काला खेल, उत्पाद विभाग संचालक को किया गिरफ्तारखराब सड़क-पुल पर ठेकेदारों की खैर नहीं, 82 अधिकारियों की टीम करेगी जांचKISHANGANJ: ठाकुरगंज में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा: 4.04 लाख की निकासी पर घमासान, कागजों पर बनी सड़क, जमीन पर गायब

जिय हो बिहार के लाला : फैक्ट्री में 50 रूपये दिहाड़ी पर काम करके बन गया सेना में लेफ्टीनेंट

DEHRADUN : देहरादून के Indian Military Academy (आईएमए) में हुई पासिंग आउट परेड में बिहार के एक सपूत ने देश भर के लिए मिसाल कायम कर दिया. देहरादून के आईएमए में शनिवार को 326 अध

जिय हो बिहार के लाला : फैक्ट्री में 50 रूपये दिहाड़ी पर काम करके बन गया सेना में लेफ्टीनेंट
First Bihar
3 मिनट

DEHRADUN : देहरादून के Indian Military Academy (आईएमए) में हुई पासिंग आउट परेड में बिहार के एक सपूत ने देश भर के लिए मिसाल कायम कर दिया. देहरादून के आईएमए में शनिवार को 326 अधिकारी के बदन पर सेना के अधिकारी की वर्दी सज गयी, इनमें बिहार का बेटा लेफ्टीनेंट बालबांका तिवारी भी शामिल था. बालबांका तिवारी कभी एक फैक्ट्री में 50 रूपये की दिहाड़ी पर नौकरी करता था लेकिन अपनी मेहनत और लगन के भरोसे उस मुकाम पर पहुंच गया जिसका उसने सपना देखा था.


बक्सर के बेटे ने रचा इतिहास
बालबांका तिवारी बक्सर जिले के सुंदरपुर बरजा गांव के रहने वाले हैं. अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान उन्हें किराने की दुकान में काम करना पडा. स्कूल की पढ़ाई खत्म हुई तो ट्यूशन पढ़ा कर खर्च निकालना पड़ा. उसके बाद भी फैक्ट्री में काम कर अपनी पढ़ाई और परिवार का खर्च निकालना पड़ा.


मीडिया से बात करते हुए बालबांका तिवारी ने कहा “मेरे परिवार की स्थिति शुरू से ही अच्छी नहीं थी. मेरे पिता एक छोटे किसान थे और हमारा संयुक्त परिवार था. घर में खाने का बंदोबस्त हो पाना ही बड़ी बात थी. मैं इकलौता बेटा था और मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था कि मैं दसवीं की पढ़ाई के बाद अपने परिवार का खर्च जुटाने के लिए काम करूं.”


बालबांका तिवारी ने बताया कि मैट्रिक पास करने के बाद गांव में कमाई का रास्ता नहीं दिख रहा था. लिहाजा वे काम की तलाश में उड़ीसा के राउरकेला चले गये. वहां उन्होंने एक लोहे की फैक्ट्री में कुछ महीने के लिए काम किया. फिर उन्हें स्कैक्स की फैक्ट्री में 50 रूपये रोजाना पर काम करना पड़ा. हर दिन की दिहाड़ी 50 रूपये. उसी पैसे के भरोसे बालबांका तिवारी ने उड़ीसा से 12वीं की पढ़ाई पूरी कर ली.


सिपाही से अधिकारी तक का सफर
फैक्ट्री में मजदूरी करते हुए ही बालबांका तिवारी ने कॉलेज में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया. इसी बीच सेना में सिपाही की भर्ती की खबर मिली. बालबांका तिवारी ने भर्ती में हिस्सा लिया और वे सेना में सिपाही के पद पर चुन लिये गये. उन्हें 2012 में सेना के इलेक्ट्रॉनिक और मेकेनिकल इंजीनियरिंग विंग में पोस्टिंग मिल गयी.


सिपाही की नौकरी के दौरान ही उन्हें खबर मिली कि सेना में सिपाही को भी अधिकारी बनने का मौका दिया जाता है. आर्मी कैडेट कॉलेज के जरिये ये मौका मिला है. बालबांका तिवारी ने आर्मी कैडेट कॉलेज की प्रवेश परीक्षा 2017 में पास की और वे अधिकारी पद के लिए चुन लिये गये. शनिवार को इंडियन मिलिट्री अकेडमी में हुए पासिंग आउट परेड में बालबांका तिवारी के बदन पर लेफ्टीनेंट की वर्दी सज गयी. 

इस खबर के बारे में

रिपोर्टर / लेखक

First Bihar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

संबंधित खबरें