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Bihar Exam Center : बिहार में बदल जाएगा परीक्षा का पूरा सिस्टम! 27 जिलों में बनेंगे हाईटेक एग्जाम सेंटर, 4 हजार अभ्यर्थी एक साथ देंगे परीक्षा

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 27 जिलों में 29 हाईटेक परीक्षा भवन बनाए जाएंगे। 330 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली इस योजना में एक केंद्र पर 4000 अभ्यर्थी बैठ सकेंगे और CCTV से 24 घंटे निगरानी होगी।

Bihar Exam Center : बिहार में बदल जाएगा परीक्षा का पूरा सिस्टम! 27 जिलों में बनेंगे हाईटेक एग्जाम सेंटर, 4 हजार अभ्यर्थी एक साथ देंगे परीक्षा
Tejpratap
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Bihar Exam Center : बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाने की व्यवस्था पर निर्भरता कम करने के लिए राज्य में स्थायी और हाईटेक परीक्षा केंद्र तैयार किए जाएंगे। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने राज्य के 27 जिलों में 29 स्थानों पर मल्टीपर्पस परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह बनाने की योजना तैयार की है। इन भवनों के निर्माण पर 330 करोड़ 7 लाख 13 हजार रुपये खर्च होंगे।

प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अब तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद निर्माण की जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग को सौंपी जाएगी। माना जा रहा है कि इन केंद्रों के तैयार होने के बाद BPSC, BSSC, BTSC और बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूल-कॉलेजों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।

चार मंजिला होंगे हाईटेक परीक्षा भवन

प्रस्तावित परीक्षा भवन सामान्य परीक्षा केंद्रों से बिल्कुल अलग होंगे। सभी भवन जी प्लस-3 यानी चार मंजिला बनाए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र के लिए करीब एक से डेढ़ एकड़ जमीन चिह्नित की गई है।इन भवनों की सबसे बड़ी खासियत इनकी क्षमता होगी। एक केंद्र में एक साथ करीब 4,000 परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था होगी। यानी बड़े स्तर पर होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को बैठाया जा सकेगा। परीक्षा के दौरान पूरे परिसर की गतिविधियों पर CCTV कैमरों से नजर रखी जाएगी। साथ ही परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं और दूसरी गोपनीय सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए अलग स्टोरेज की व्यवस्था होगी।

परीक्षा के साथ मूल्यांकन और स्कैनिंग की भी सुविधा

इन भवनों को सिर्फ परीक्षा लेने के लिए नहीं बनाया जा रहा है। यहां उत्तर पुस्तिका रखने, मूल्यांकन, बारकोडिंग और स्कैनिंग जैसे काम भी किए जा सकेंगे। इससे परीक्षा से जुड़े कई कार्यों को एक ही परिसर में पूरा करने में मदद मिलेगी।फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी इन भवनों में रहेंगी। CCTV के जरिए 24 घंटे निगरानी और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था किए जाने की योजना है।

स्कूल-कॉलेजों पर घटेगी निर्भरता

अभी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अक्सर स्कूल और कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। इसका सीधा असर इन संस्थानों की नियमित पढ़ाई, आंतरिक परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ता है। स्थायी परीक्षा भवन बनने के बाद इस परेशानी को कम किया जा सकेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अलग बुनियादी ढांचा मिलने से स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित होने की समस्या भी घटने की उम्मीद है। साथ ही परीक्षार्थियों को भी व्यवस्थित और निर्धारित परीक्षा केंद्र मिलने से सुविधा होगी।

किन जिलों में बनेंगे परीक्षा भवन?

योजना के तहत रोहतास, कैमूर, नालंदा, भोजपुर और बक्सर में परीक्षा भवन प्रस्तावित हैं। मगध क्षेत्र में नवादा, औरंगाबाद और जहानाबाद को शामिल किया गया है।तिरहुत क्षेत्र में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और वैशाली में निर्माण होगा। सारण क्षेत्र में सीवान और गोपालगंज में परीक्षा भवन बनाए जाएंगे।

इसी तरह कोसी क्षेत्र के मधेपुरा और सुपौल, जबकि मुंगेर क्षेत्र के शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, जमुई और खगड़िया में भी भवन प्रस्तावित हैं। भागलपुर क्षेत्र में बांका तथा पूर्णिया क्षेत्र में किशनगंज, अररिया और कटिहार को योजना में जगह दी गई है। दरभंगा क्षेत्र के मधुबनी और समस्तीपुर में दो-दो भवन बनाए जाने हैं।

चुनावी काम में भी इस्तेमाल हो सकेंगे

इन भवनों का इस्तेमाल केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा। यहां बनाए जाने वाले वज्रगृह यानी स्ट्रांग रूम में परीक्षा की गोपनीय सामग्री सुरक्षित रखी जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर चुनाव से जुड़ी संवेदनशील सामग्री रखने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।इससे निर्वाचन कार्य के दौरान स्कूल और कॉलेजों को अधिग्रहित करने की जरूरत भी कम हो सकती है।

नौ जिलों में पहले से मौजूद है ऐसी व्यवस्था

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति पहले ही राज्य के नौ प्रमंडलीय मुख्यालय वाले जिलों में परीक्षा भवन-सह-क्षेत्रीय कार्यालय तैयार करा चुकी है। इन भवनों में ऑनलाइन परीक्षा केंद्र, गैर-आवासीय निशुल्क कोचिंग और समिति के क्षेत्रीय कार्यालय जैसे काम किए जा रहे हैं।अब इसी मॉडल को राज्य के दूसरे जिलों तक विस्तार देने की तैयारी है।

जिस संस्थान की जमीन, संचालन में उसकी भी हिस्सेदारी

इन भवनों की एक खास बात यह भी होगी कि जिस स्कूल या कॉलेज की जमीन पर भवन बनाया जाएगा, निर्माण पूरा होने के बाद उसके संचालन की जिम्मेदारी उसी संस्थान को दी जाएगी।भवन से होने वाली आय में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और संबंधित शिक्षण संस्थान की हिस्सेदारी होगी। संस्थान अपनी जरूरत के मुताबिक वहां शैक्षणिक गतिविधियां और आंतरिक परीक्षाएं भी आयोजित कर सकेगा।

यानी आने वाले समय में ये भवन परीक्षा केंद्र, मूल्यांकन केंद्र, गोपनीय सामग्री के स्ट्रांग रूम और जरूरत पड़ने पर चुनावी सामग्री के सुरक्षित केंद्र के रूप में एक साथ काम कर सकेंगे। इससे बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक अधिक स्थायी और केंद्रीकृत व्यवस्था तैयार होने की उम्मीद है।