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Bihar News: बिहार के सरकारी अस्पतालों में AI से होगा इलाज का रास्ता आसान! घर बैठे मिलेगी बीमारी और डॉक्टर की जानकारी, ऑनलाइन बुक होगा OPD स्लॉट

बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब इलाज कराना हो सकता है आसान! AI कॉल सेंटर से घर बैठे मिलेगी बीमारी और डॉक्टर की जानकारी। अस्पताल जाने से पहले ही ऑनलाइन बुक कर सकेंगे OPD स्लॉट। अगले 2 महीने में शुरू हो सकती है नई व्यवस्था।

Bihar News: बिहार के सरकारी अस्पतालों में AI से होगा इलाज का रास्ता आसान! घर बैठे मिलेगी बीमारी और डॉक्टर की जानकारी, ऑनलाइन बुक होगा OPD स्लॉट
Tejpratap
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पटना: बिहार के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए अब मरीजों को बार-बार अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। न डॉक्टर की उपलब्धता जानने के लिए घंटों इंतजार करना होगा और न ही यह समझने में परेशानी होगी कि किस बीमारी के लिए किस विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाना है। स्वास्थ्य विभाग ऐसी ही परेशानियों को खत्म करने के लिए एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत बिहार के सरकारी अस्पतालों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग अगले दो महीने के भीतर AI तकनीक से लैस कॉल सेंटर शुरू करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है। इस व्यवस्था के शुरू होने के बाद मरीज घर बैठे अपनी बीमारी, उसके लक्षण, इलाज और संबंधित डॉक्टर के बारे में शुरुआती जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इतना ही नहीं, मरीज अपनी जरूरत के अनुसार सरकारी अस्पताल में OPD यानी बाह्य रोगी विभाग का ऑनलाइन स्लॉट भी बुक करा सकेंगे।यानी अब सरकारी अस्पताल में इलाज कराने की तैयारी घर बैठे ही हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से मरीजों का समय बचने के साथ अस्पतालों में लगने वाली लंबी कतारों को भी कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

AI कॉल सेंटर पर फोन करते ही मिलेगी बीमारी और इलाज की जानकारी

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीजों को छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। AI आधारित कॉल सेंटर पर संपर्क कर मरीज अपनी परेशानी और बीमारी के लक्षण बता सकेंगे। इसके बाद उन्हें उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी के आधार पर यह समझने में मदद मिलेगी कि उनकी समस्या के लिए किस तरह के डॉक्टर से परामर्श लेना उचित होगा।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी मरीज को लगातार बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो वह कॉल सेंटर के माध्यम से अपनी समस्या बता सकेगा। इसके बाद उसे संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर और इलाज के लिए उपयुक्त अस्पताल की जानकारी मिल सकेगी।

इससे मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले ही काफी हद तक पता चल जाएगा कि उसे कहां और किस डॉक्टर के पास जाना चाहिए। हालांकि, AI से मिलने वाली जानकारी शुरुआती मार्गदर्शन के लिए होगी। बीमारी की पुष्टि और इलाज का अंतिम फैसला डॉक्टर ही करेंगे।

मरीज की बनेगी डिजिटल हेल्थ हिस्ट्री, अस्पताल में नहीं बतानी होगी पूरी कहानी

इस योजना का एक और खास पहलू मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री तैयार करना है। AI तकनीक के माध्यम से मरीज की बताई गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें बीमारी के लक्षण और मरीज की ओर से दी गई जरूरी जानकारियां शामिल हो सकती हैं।

मरीज जब अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने पहुंचेगा, तो उसे अपनी तैयार मेडिकल हिस्ट्री का प्रिंट निकालकर साथ ले जाना होगा। इससे डॉक्टर को मरीज की समस्या समझने में आसानी होगी और शुरुआती जानकारी जुटाने में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।जो मरीज मेडिकल हिस्ट्री का प्रिंट निकालकर नहीं ला पाएंगे, उनके लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है। इससे मरीजों को बार-बार अपनी बीमारी और पुरानी परेशानियों के बारे में बताने की जरूरत कम हो सकती है।

डॉक्टर की उपलब्धता के हिसाब से बुक होगा OPD स्लॉट

सरकारी अस्पतालों में अक्सर OPD के दौरान मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। कई बार मरीज सुबह से लाइन में लगते हैं, लेकिन डॉक्टर से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ मामलों में मरीज अस्पताल पहुंचने के बाद पता करते हैं कि संबंधित डॉक्टर उपलब्ध ही नहीं हैं।

स्वास्थ्य विभाग की नई व्यवस्था इस परेशानी को भी कम करने की कोशिश करेगी। AI कॉल सेंटर के माध्यम से मरीज संबंधित अस्पताल और डॉक्टर का चयन कर सकेंगे। इसके बाद डॉक्टर की उपलब्धता के अनुसार उन्हें परामर्श के लिए ऑनलाइन समय यानी OPD स्लॉट दिया जाएगा।इसका मतलब है कि मरीज निर्धारित समय पर अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से मिल सकेंगे। इससे अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ कम करने और OPD व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण इलाकों के मरीजों को भी मिलेगा बड़ा फायदा

बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जो ग्रामीण इलाकों से इलाज कराने जिला अस्पतालों और बड़े सरकारी अस्पतालों तक पहुंचते हैं। कई बार उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि किस अस्पताल में कौन-सा विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध है। ऐसे में गलत अस्पताल पहुंचने पर उन्हें दोबारा दूसरे अस्पताल जाना पड़ता है।AI कॉल सेंटर शुरू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज भी घर बैठे डॉक्टर, अस्पताल और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे उनकी यात्रा, समय और पैसे की बचत हो सकती है।खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

अगले दो महीने में शुरू करने का लक्ष्य, डिजिटल होगा बिहार का हेल्थ सिस्टम

स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को बिहार की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विभागीय अधिकारी इस परियोजना को जल्द शुरू करने की तैयारी में जुटे हैं। लक्ष्य है कि अगले दो महीने के भीतर AI आधारित कॉल सेंटर की सुविधा शुरू कर दी जाए।

अगर यह व्यवस्था तय समय पर लागू होती है, तो सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने का तरीका काफी हद तक बदल सकता है। मरीजों को बीमारी की शुरुआती जानकारी से लेकर डॉक्टर के चयन और OPD स्लॉट बुकिंग तक की सुविधा एक ही माध्यम से मिल सकेगी।

अब देखना होगा कि यह AI कॉल सेंटर जमीन पर कितनी तेजी से काम शुरू करता है और मरीजों को इसका लाभ किस स्तर तक मिलता है। फिलहाल बिहार के सरकारी अस्पतालों में डिजिटल इलाज व्यवस्था की यह तैयारी लाखों मरीजों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आई है।