Bihar Expressway : बिहार में आधारभूत संरचना के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की बुनियाद रखी जा चुकी है। राज्य का पहला एक्सप्रेस-वे, आमस–दरभंगा एक्सप्रेस-वे, तेजी से निर्माणाधीन है और इसके पूरा होने के बाद दक्षिण और उत्तर बिहार के बीच कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी। यह एक्सप्रेस-वे न केवल यात्रा के समय को आधा कर देगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगा। हालांकि, जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उसे देखते हुए मार्च 2026 तक परियोजना के पूर्ण होने पर संशय भी जताया जा रहा है।
करीब 6000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह एक्सप्रेस-वे गया जिले के आमस से शुरू होकर दरभंगा तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 189 किलोमीटर है और इसे सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे के रूप में विकसित किया जा रहा है। सड़क बन जाने के बाद दक्षिण बिहार से उत्तर बिहार तक की यात्रा, जो अभी लगभग 6 घंटे में पूरी होती है, वह घटकर करीब 3 घंटे की रह जाएगी। इससे गया, औरंगाबाद, पटना, जहानाबाद जैसे जिलों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना केंद्र सरकार के भारतमाला परियोजना के तहत बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य देशभर में हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। आमस–दरभंगा एक्सप्रेस-वे भी इसी सोच का हिस्सा है, जो बिहार को उत्तर भारत के अन्य बड़े आर्थिक केंद्रों से बेहतर ढंग से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।
जहानाबाद जिले के लिए यह एक्सप्रेस-वे किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। जिले से होकर लगभग 30 किलोमीटर लंबा हिस्सा गुजर रहा है, जिससे जिले के चार प्रखंडों के दर्जनों गांव सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जमीन की कीमतों में भी इजाफा होने की उम्मीद है। निर्माण कार्य से जुड़े एक कर्मी ने ऑफ कैमरा बताया कि इस समय परियोजना का दूसरा फेज चल रहा है, जिसकी लंबाई करीब 54 किलोमीटर है। इस हिस्से में लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अधिकांश स्थानों पर पिलर का काम समाप्त हो चुका है और अगर मौसम और संसाधन अनुकूल रहे तो इस साल के अंत तक कुछ हिस्सों में यातायात शुरू किया जा सकता है।
हालांकि, आधिकारिक लक्ष्य मार्च 2026 तक पूरे एक्सप्रेस-वे को चालू करने का है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग कहानी बयां करती है। भूमि अधिग्रहण, मौसम की मार और तकनीकी चुनौतियों के कारण काम की रफ्तार कई जगहों पर अपेक्षा से धीमी रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि तय समय-सीमा को हासिल करना आसान नहीं होगा, हालांकि सरकार और निर्माण एजेंसियां काम में तेजी लाने का दावा कर रही हैं।
इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से होने वाले फायदे बहुआयामी हैं। सबसे बड़ा लाभ समय की बचत है। कम समय में लंबी दूरी तय होने से ईंधन की खपत घटेगी, जिससे यात्रियों और व्यापारियों दोनों का खर्च कम होगा। दक्षिण बिहार के बड़े जिले जैसे गया, औरंगाबाद, रोहतास और जहानाबाद के व्यापारी उत्तर बिहार तक सामान लाने और ले जाने में आसानी महसूस करेंगे। इससे राज्य के भीतर व्यापारिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी।
पर्यटन के लिहाज से भी यह परियोजना बेहद अहम मानी जा रही है। गया जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल तक पहुंच और आसान होगी। वहीं उत्तर बिहार के मिथिला क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक दक्षिण बिहार और अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को भी फायदा होगा।
कुल मिलाकर, आमस–दरभंगा एक्सप्रेस-वे बिहार के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न सिर्फ राज्य की भौगोलिक दूरी को कम करेगा, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी बिहार को मजबूत बनाएगा। हालांकि, अब सबसे बड़ी चुनौती इसे तय समय में और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की है। अगर यह परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होती है, तो यह आने वाले वर्षों में बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की पहचान बन सकती है।






