Bihar News : बिहार के किसानों के लिए उर्वरक खरीदने की व्यवस्था जल्द ही पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। अब किसानों को खाद की उपलब्धता और जरूरत के मुताबिक मात्रा पाने के लिए दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। केंद्र सरकार की नई फर्टिलाइजर सेल एप्लीकेशन सिस्टम (FSAS) के तहत किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी फसल और खेती के रकबे की जानकारी दर्ज कर पहले से खाद की बुकिंग कर सकेंगे।
बुकिंग के बाद किसानों को एक QR कोड जारी किया जाएगा। इसी QR कोड को अधिकृत उर्वरक विक्रेता के पास दिखाकर किसान निर्धारित मात्रा में खाद प्राप्त कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था को उर्वरक विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है। बिहार में भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
फसल और रकबे के आधार पर तय होगी खाद की जरूरत
नई डिजिटल व्यवस्था में किसान की पहचान संख्या, भूमि संबंधी जानकारी और फसल का विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके बाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की सामान्य उर्वरक अनुशंसा के आधार पर पूरे फसल मौसम के लिए आवश्यक उर्वरक की प्रस्तावित मात्रा दिखाई जाएगी।
किसान अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार खाद की मात्रा का चयन कर ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि किसानों को जरूरत के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए और अनावश्यक रूप से अधिक मात्रा में खाद का उठाव न हो। बुकिंग के बाद जारी QR कोड सीमित अवधि के लिए मान्य रहेगा। किसान निर्धारित समय के भीतर अधिकृत खुदरा विक्रेता के पास पहुंचकर QR कोड के माध्यम से अपनी बुक की गई खाद प्राप्त कर सकेंगे।
कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर लगेगी रोक
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य उर्वरक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और मांग आधारित बनाना है। बिहार में हर वर्ष बुआई और फसल के मौसम के दौरान खाद की कमी, कालाबाजारी और जरूरत से अधिक उर्वरक उठाव की शिकायतें सामने आती रही हैं।
डिजिटल बुकिंग व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार और कृषि विभाग को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस क्षेत्र में कितनी खाद की आवश्यकता है। इसके आधार पर उर्वरक की आपूर्ति और वितरण की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। QR कोड आधारित वितरण से यह भी सुनिश्चित होगा कि बुक की गई खाद सही किसान तक पहुंचे। इससे फर्जी खरीद, अनियमित वितरण और खाद की जमाखोरी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बटाईदार किसानों को भी मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था में उन किसानों को भी शामिल करने का प्रावधान किया गया है, जिनकी खेती की जमीन उनके स्वयं के नाम पर दर्ज नहीं है। पूर्वजों के नाम की जमीन पर खेती करने वाले, बटाईदार किसान तथा सामुदायिक, मंदिर, सरकारी या संस्थागत भूमि पर खेती करने वाले किसानों के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। ऐसे किसानों को अपनी खेती और फसल संबंधी जानकारी दर्ज कराने में किसी प्रकार की समस्या होने पर कृषि विभाग के स्तर से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
पंचायत से जिला स्तर तक बनेगा हेल्प डेस्क
किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पंचायत से लेकर जिला स्तर तक अलग तंत्र विकसित किया जाएगा। कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार किसानों की समस्याओं का प्राथमिक स्तर पर समाधान करेंगे। यदि समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं होता है तो मामला प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर तक भेजा जाएगा। इसके लिए जिला और प्रखंड स्तर पर हेल्प डेस्क या नियंत्रण कक्ष भी बनाए जाने की योजना है।
नई डिजिटल प्रणाली के लागू होने से बिहार के किसानों को खाद खरीदने में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। मोबाइल से पहले ही बुकिंग होने के कारण किसानों को यह पता रहेगा कि उन्हें कितनी मात्रा में खाद मिलेगी और वितरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। सरकार की यह पहल उर्वरक वितरण व्यवस्था को आधुनिक, किसान केंद्रित और बेहतर निगरानी वाली प्रणाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।





