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जारी है खेल...चीफ इंजीनियर के पत्र को 'कार्यपालक अभियंता' ने रद्दी की टोकरी में डाला ! भवन निर्माण का 'पाटलिपुत्र डिवीजन' फिर चर्चा में आया, पूर्व वाले E.E. पर भी लगे थे गंभीर आरोप

Bihar Building: भवन प्रमंडल पाटलिपुत्र के कार्यपालक अभियंताओं पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं. पूर्व के कार्यपालक अभियंता के खिलाफ भी कई शिकायत हुई. जांच के आदेश हुए, विवाद बढ़ा तो विभाग ने उन्हें सीमांचल में ट्रांसफर कर दिया.

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Viveka Nand
4 मिनट

Bihar Building: बिहार का सरकारी सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है. अफसरों- इंजीनियरों पर किसी का कंट्रोल नहीं है. ठेकेदारों पर प्रताड़ित किया जा रहा. काम करा कर भुगतान के लिए सालों से दौड़ाया जा रहा. हद तो तब जब मुख्य अभियंता के पत्र को भी कार्यपालक अभियंता रद्दी की टोकरी में डाल दे रहे. भवन निर्माण विभाग के पाटलिपुत्र प्रमंडल में यह खेल हो रहा है. वैसे बता दें, भवन प्रमंडल पाटलिपुत्र के कार्यपालक अभियंताओं पर हर बार गंभीर आरोप लगते हैं. इनके पूर्व के कार्यपालक अभियंता के खिलाफ भी कई शिकायत हुई. जांच के आदेश हुए, विवाद बढ़ा तो विभाग ने उन्हें सीमांचल में ट्रांसफर कर दिया. पाटलिपुत्र डिवीजन में अब नए कार्यपालक अभियंता के कार्यों से ठेकेदार परेशान हैं. विभाग के मुख्य अभियंता का पत्र भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है. जिससे भारी रोष है. 

पाटलिपुत्र डिवीडन में तरह-तरह के खेल 

भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता(पटना) राकेश कुमार ने अधीक्षण अभियंता दक्षिण अंचल को पत्र लिखा था .18 अप्रैल 2024 को लिखे पत्र में चीफ इंजीनियर ने निदेशित किया था. पत्र में कहा गया था कि BWMS पोर्टल के माध्यम से पाटलिपुत्र भवन प्रमंडल के अंतर्गत सरकारी आवासीय भवनों के अनुरक्षण एवं मरम्मति कार्य के लिए 68 लाख ₹2000 की विशेष प्राथमिकता सूची अनुमोदन के लिए समर्पित की गई थी. जिस पर 2023-24 में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका. ऐसे में उक्त प्राथमिकता सूची में वर्णित कार्यों को वर्तमान वित्तीय वर्ष (2024- 25) की प्राथमिकता सूची में शामिल कर प्रस्ताव दें. लेकिन पाटलिपुत्र भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने मुख्य अभियंता के इस निर्देश का अनुपालन नहीं किया. यूं कहें कि मुख्य अभियंता के पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया. 

पीड़ित ठेकेदार राम जी ने फिर से चीफ इंजीनियर से लगाई गुहार 

इसके बाद पीड़ित ठेकेदार रामजी ने एक बार फिर से भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता से गुहार लगाई. हालांकि गुहार का अब तक कोई असर नहीं हुआ है. पीड़ित ठेकेदार नेमुख्य अभियंता को लिखे पत्र में कहां है कि आपने 18 अप्रैल 2024 को पत्र लिखा था. जिसमें 68 लाख 2000 रू का विशेष प्राथमिकता में दिया गया था. जिसमें प्रथम प्राथमिकता वर्ष 2024-25 में 33 लाख का प्राथमिकता दिया गया. द्वितीय प्राथमिकता में शेष राशि देने के लिए कहा गया था, लेकिन उसे प्राथमिकता में शामिल नहीं किया गया. सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता ने बताया कि मेरे द्वारा प्राथमिकता सूची में शामिल करने के लिए लिखा गया,लेकिन कार्यपालक अभियंता ने काट दिया. 

कार्यपालक अभियंता पाटलिपुत्र भवन प्रमंडल ने 27 नवंबर 2023 को प्राथमिकता में शामिल करने की अनुशंसा किया था. सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता की देखरेख में कार्य संपन्न करने की अनुशंसा की गई. सहायक अभियंता द्वारा उल्लेख किया गया है कि उक्त आवास को प्राथमिकता सूची में शामिल करने की कार्रवाई की जाए. कनीय अभियंता द्वारा BWMS सॉफ्टवेयर में प्राथमिकता सूची में दिया गया था की इन योजनाओं का कार्य कर लिया जाए.

जिस विधायक के सरकारी आवास में काम हुआ, उन्होंने भी लिखा लिखकर दिया, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता की देखरेख में कार्य पूर्ण कर लिया गया. ऐसे में द्वितीय प्राथमिकता सूची जो आपके यहां है .उसमें शामिल करेे. लेकिन कार्यपालक अभियंता ने कोई पहल नहीं की. इस संबंध में हमने पाटलिपुत्र भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अजय कुमार वर्मा से मो. नं. 9264293042 पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी. 


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रिपोर्टर / लेखक

Viveka Nand

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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