ब्रेकिंग
Bihar Top News: बंटी हत्याकांड से लेकर बांकीपुर उपचुनाव तक, पढ़ें दिनभर की 10 बड़ी खबरेंबांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी के स्टार प्रचारकों में मनोज तिवारी, पवन सिंह और मैथिली ठाकुर शामिल, 40 नामों की सूची जारीihar Transfer-Posting: बिहार सरकार ने बदले तबादला आदेश... कई अफसरों का ट्रांसफर रद्द, जानें...बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट, सम्राट चौधरी और नितिन नबीन करेंगे प्रचारखुले में मांस-मछली बेचने वालों पर प्रशासन की कार्रवाई, 60 दुकानें हटाईं; 25 हजार रुपये का वसूला जुर्मानाBihar Top News: बंटी हत्याकांड से लेकर बांकीपुर उपचुनाव तक, पढ़ें दिनभर की 10 बड़ी खबरेंबांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी के स्टार प्रचारकों में मनोज तिवारी, पवन सिंह और मैथिली ठाकुर शामिल, 40 नामों की सूची जारीihar Transfer-Posting: बिहार सरकार ने बदले तबादला आदेश... कई अफसरों का ट्रांसफर रद्द, जानें...बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की लिस्ट, सम्राट चौधरी और नितिन नबीन करेंगे प्रचारखुले में मांस-मछली बेचने वालों पर प्रशासन की कार्रवाई, 60 दुकानें हटाईं; 25 हजार रुपये का वसूला जुर्माना

Bihar Bhumi: ऑनलाइन दाखिल-खारिज में लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने दी सख्त चेतावनी

Bihar Bhumi: बिहार में ऑनलाइन दाखिल-खारिज मामलों में लापरवाही और अनावश्यक विलम्ब पर डिप्टी CM विजय सिन्हा ने सख्त चेतावनी दी, अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश।

Bihar Bhumi
लापरवाह अधिकारी हो जाएं सावधान!
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar Bhumi: बिहार में ऑनलाइन भूमि दाखिल-खारिज वादों के निष्पादन में लगातार निर्देशों के बाद भी अनियमितता और अनावश्यक विलम्ब को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। इस संबंध में सचिव जय सिंह द्वारा सभी जिला समाहर्ता को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि दाखिल-खारिज मामलों का निष्पादन बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 एवं संशोधित नियमावली, 2020 के प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए।


सचिव जय सिंह द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि दाखिल-खारिज रैयतों और भू-धारकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, बावजूद इसके कई अंचलों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। भूमि सुधार जन कल्याण संवाद एवं अन्य स्रोतों से यह तथ्य सामने आया है कि आपत्तिरहित मामलों को भी जान-बूझकर लंबित रखा जा रहा है, जिससे अंचल कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।


पत्र में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि आम-खास सूचना जारी होने के बाद 14 दिनों की अवधि में यदि कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो अंचल अधिकारी द्वारा बिना देरी के दाखिल-खारिज का आदेश पारित किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, कई मामलों में अंचल स्तर पर स्वयं ही आधारहीन ‘स्वतः आपत्ति’ दर्ज कर वाद को अनावश्यक रूप से सुनवाई में डाल दिया जाता है, जो नियमों के विपरीत है।


विभाग द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी खाता या खेसरा से संबंधित भूमि के मामलों में ही संतुष्टि के आधार पर स्वतः आपत्ति दर्ज की जा सकती है। अन्य मामलों में बिना ठोस कारण के स्वतः आपत्ति दर्ज करना कदाचार की श्रेणी में आएगा। साथ ही यदि किसी असामाजिक तत्व द्वारा बिना आधार या बिना किसी वैधानिक हित के आपत्ति दर्ज की जाती है, तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


जवाबदेही तय करते हुए विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी अंचल में अकारण लंबित दाखिल-खारिज वादों की संख्या अधिक पाई जाती है, तो संबंधित अंचल अधिकारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। सभी जिला समाहर्ता को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से अंचल अधिकारियों को इन आदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराएं।


राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस कदम से ऑनलाइन दाखिल-खारिज प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे राज्य के आम नागरिकों को शीघ्र और न्यायसंगत दाखिल–खारिज की सेवा मिल सकेगी। 


उधर, उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग  विजय कुमार सिन्हा ने कड़े शब्दों में कहा है कि अब भी यदि कोई अंचल अधिकारी या कर्मी दाखिल-खारिज के मामलों को जान-बूझकर बेवजह लंबित रखता है, तो इसे सीधे तौर पर कर्तव्यहीनता और नागरिकों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ माना जाएगा। बिना आपत्ति वाले मामलों में तत्काल आदेश देना अनिवार्य है, इसके बावजूद विलम्ब करना किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि दाखिल-खारिज समय से नहीं होने के कारण रैयतों का भू-अभिलेख अद्यतन नहीं हो पाता, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और अन्य वैधानिक सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है। यह लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था के विरुद्ध गंभीर अपराध है। टाल मटोल वाली नीति सभी को छोड़ना होगा।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता