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Bihar Assembly : सच हुई CM की भविष्यवाणी, विपक्ष 35 सदस्यों तक सिमटा, नीतीश ने सदन में इशारों में पत्रकारों से की बात

बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 91 हजार करोड़ के सेकेंड सप्लीमेंट्री बजट पर जोरदार बहस हुई। मंत्री श्रवण कुमार और बिजेंद्र यादव ने विपक्ष पर योजनाओं में बाधा डालने का आरोप लगाया।

Bihar Assembly : सच हुई CM की भविष्यवाणी, विपक्ष 35 सदस्यों तक सिमटा, नीतीश ने सदन में इशारों में पत्रकारों से की बात
Tejpratap
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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन 91 हजार करोड़ रुपये के सेकेंडरी सप्लीमेंट्री बजट पर जोरदार चर्चा देखने को मिली। यह सत्र राजनीतिक और वित्तीय दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण था, क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बजट को लेकर तीखी बहस हुई। सदन में जब यह प्रस्ताव पेश किया गया, तब विपक्ष ने बजट की जरूरत और इसके स्रोत पर सवाल उठाए, वहीं सरकार की ओर से इसे पूरी गंभीरता से समझाया गया।


इस दौरान सरकार की तरफ से जवाब देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे जनता को भड़काने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “महिलाओं को दी गई राशि पर ये लोग कहते थे कि इसमें सूद लगेगा, इसे लौटना पड़ेगा। ये लोग सफल नहीं हुए, ये माई-बहिन मान योजना चला रहे थे, लेकिन योजना नहीं चलाते, केवल मां-बहनों का अपमान करते हैं।”


मंत्री श्रवण कुमार ने यह भी कहा कि आज मुख्यमंत्री की बात सही साबित हुई, क्योंकि उन्होंने पहले ही सदन को निर्देश दिया था कि “बोलते बहुत हो, सुनो और समझो।” मुख्यमंत्री के निर्देश न मानने पर विपक्ष केवल 35 सदस्यों तक ही सीमित रह गया। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पत्रकारों को इशारे करते नजर आए, जो सदन के माहौल को और भी तात्कालिक बना गया।


वहीं, मंत्री बिजेंद्र यादव ने सदन में कहा कि बहुत से सदस्य पूछ रहे हैं कि अनुपूरक बजट के लिए धनराशि कहां से आएगी। उन्होंने बिहार के ऐतिहासिक संदर्भ में बताया कि बिहार के विभाजन के समय लोगों के मन में यह धारणा थी कि “बिहार में बालू, लालू और आलू बच गया है, अब क्या खाया जाएगा।” उस समय 25-26 हजार करोड़ रुपये का बजट था, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बजट को लगातार बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया। मंत्री यादव ने कहा कि अगर इंसान में ईमानदारी हो तो काम मुश्किल नहीं है और इसी ईमानदारी के दम पर नीतीश सरकार में चारा और बालू घोटाले जैसी घटनाएं नहीं हुईं।


जब चारा घोटाले का जिक्र हुआ, तो विपक्ष के विधायक हंगामा करने लगे। इस पर मंत्री बिजेंद्र यादव ने स्पष्ट कहा, “जितना हल्ला कीजिएगा, मैं उतनी पोल खोलूंगा। ईमान का संकट नीतीश कुमार में नहीं है, इसलिए पैसे की कमी नहीं होगी।” उनके इस बयान के बाद सदन में एक बार फिर जोरदार हलचल और चर्चा हुई। मंत्री ने विपक्ष पर यह भी तंज कसा कि सरकार की नीतियों और योजनाओं को अवरुद्ध करने की कोशिशें व्यर्थ हैं।


सदन में इस दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बजट को लेकर संवाद और बहस ने सभी की निगाहें खींचीं। विपक्ष ने यह सवाल उठाया कि अनुपूरक बजट की राशि कहां से आएगी और इसे किस तरह लागू किया जाएगा। वहीं, सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि बिहार की वित्तीय स्थिति मजबूत है और बजट के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है। मंत्री यादव ने यह भी जोर देकर कहा कि सरकार के पास योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने का अनुभव और ईमानदार नेतृत्व मौजूद है, इसलिए बजट की मंजूरी और क्रियान्वयन में कोई अड़चन नहीं आएगी।


सदन की कार्यवाही के दौरान यह भी साफ देखा गया कि विपक्ष का बजट विरोध सीमित और नियंत्रित रहा, जबकि सरकार ने सदन में अपने पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत किया। मंत्री श्रवण कुमार और बिजेंद्र यादव के बयान इस बात को साबित कर रहे थे कि सरकार वित्तीय योजनाओं और विकास परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तैयार है।


बहरहाल, शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन बिहार के राजनीतिक और वित्तीय इतिहास में महत्वपूर्ण साबित हुआ। 91 हजार करोड़ रुपये के सेकेंडरी सप्लीमेंट्री बजट पर चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार सरकार न केवल योजनाओं को समय पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि विपक्षी बहस और हंगामे के बावजूद अपने वित्तीय लक्ष्यों और विकास कार्यक्रमों को लगातार आगे बढ़ाने में सक्षम है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह दिखाया गया कि बजट और विकास कार्यों को सफलतापूर्वक लागू करने में ईमानदारी और पारदर्शिता ही सबसे बड़ा हथियार है।