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Bihar Assembly : बिहार में प्राइवेट बस संचालकों की मनमानी पर सरकार का बड़ा आदेश, जानिए मंत्री ने क्या दिया नया फरमान

बिहार विधानसभा में प्राइवेट बस संचालकों की मनमानी का मुद्दा उठा। मंत्री श्रवण कुमार ने सभी डीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए।

Bihar Assembly : बिहार में प्राइवेट बस संचालकों की मनमानी पर सरकार का बड़ा आदेश, जानिए मंत्री ने क्या दिया नया फरमान
Tejpratap
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3 मिनट

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में प्राइवेट बस संचालकों की कथित मनमानी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। बीजेपी विधायक कृष्ण कुमार ऋषि ने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि कई जिलों में निजी बस मालिक सरकारी बस स्टैंड के बाहर ही अपनी बसें खड़ी कर देते हैं और वहीं से यात्रियों को बैठा लेते हैं। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की बसों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


विधायक ने आरोप लगाया कि प्राइवेट बस संचालक नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी बस स्टैंड के भीतर प्रवेश करने और निर्धारित शुल्क देने के बजाय निजी बसें बाहर ही यात्रियों को बैठा लेती हैं। इससे जहां यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है, वहीं सरकारी बसों की सवारी भी कम हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई जगहों पर निजी बसों के चालक और स्टाफ सरकारी बस चालकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं, जिससे विवाद की स्थिति बन जाती है।


सदन में यह मुद्दा उठते ही कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ सदस्यों ने कहा कि परिवहन विभाग को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके और सरकारी व्यवस्था मजबूत बनी रहे।


इस पर परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निजी बस संचालकों की गतिविधियों की जांच करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। मंत्री ने कहा कि जहां भी सरकारी बस स्टैंड के बाहर अवैध रूप से बसें खड़ी की जा रही हैं, वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी।


मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है, बल्कि परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने बताया कि विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर औचक निरीक्षण करता है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। यदि किसी निजी बस संचालक द्वारा सरकारी बस चालकों या कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत मिलती है, तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


सदन में दिए गए मंत्री के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन यह स्पष्ट हो गया कि राज्य में परिवहन व्यवस्था को लेकर सरकार पर निगरानी बढ़ाने का दबाव है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन स्तर पर क्या कार्रवाई होती है और निजी बस संचालकों की मनमानी पर किस हद तक लगाम लगाई जा पाती है।