BIHAR ELECTION : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राज्य में तैयारियों का क्रम पूरी गति से जारी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) विनोद सिंह गुंजियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चुनाव आयोग द्वारा इस बार किए गए नवाचारों और तैयारियों का विस्तृत विवरण साझा किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने इस बार बिहार विधानसभा चुनाव को दो चरणों में कराए जाने की घोषणा की है। चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए कई नई पहल की गई हैं, जिनसे मतदाता, चुनाव कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी सभी लाभान्वित होंगे।
गुंजियाल ने बताया कि इस बार मतदाताओं को मतदान से चार दिन पहले ही वोटर पर्ची वितरित कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि मतदाता अपने बूथ और मतदान समय की जानकारी पहले से प्राप्त कर सकें और समय पर अपने मतदान केंद्र पर पहुँच सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बार किसी भी बूथ के स्थान में बदलाव नहीं किया जाएगा। पिछली बार विभिन्न कारणों से बूथों का स्थान बदला जाता रहा था, लेकिन इस बार यह प्रक्रिया स्थिर रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू हो गई है। इसके तहत सभी सरकारी, सार्वजनिक और निजी भवनों एवं स्थानों से राजनीतिक दलों के पोस्टर-बैनर हटाने का निर्देश जारी कर दिया गया है। विशेषकर पेट्रोल पंप और अन्य व्यस्त स्थानों पर लगे पोस्टरों के लिए संबंधित एजेंसियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
सीईओ ने बताया कि बिहार के पिछले चुनावों के अनुभवों के आधार पर 32 अधिक खर्च वाले विधानसभा क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन क्षेत्रों में आयकर और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से सख्त निगरानी रखी जाएगी। पिछली बार इन क्षेत्रों में भारी मात्रा में नकदी पकड़ी गई थी। इसके अलावा, इस बार हेली ड्रॉपिंग किसी भी बूथ पर नहीं की जाएगी, ताकि चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
चुनाव की तैयारी के तहत संवेदनशील बूथों की पहचान की जा रही है। 2-3 बार 9-10 बूथ वाले क्षेत्रों में सेक्टर पदाधिकारी और सेक्टर पुलिस पदाधिकारी दौरा कर चुके हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर इन बूथों को संवेदनशील घोषित किया जाएगा। नक्सल प्रभावित दक्षिण बिहार के छह जिलों में करीब 2,100 बूथों की पहचान की गई है। हालांकि, पिछले चुनावों में इन इलाकों में कोई बड़ी घटना नहीं हुई थी।
गुंजियाल ने मतदाताओं से अपील की कि वे उत्साहपूर्वक मतदान में भाग लें और अपने आसपास के लोगों को भी मतदान के लिए जागरूक करें। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ईवीएम की जांच, चुनाव कर्मियों का प्रशिक्षण, और बूथ पर नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता जैसी सभी आवश्यक तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर पर एक कंट्रोल और कमांड सेंटर भी स्थापित किया गया है, जो चुनाव के दौरान सभी गतिविधियों की निगरानी करेगा।
चुनाव आयोग द्वारा विकसित मोबाइल एप के माध्यम से मतदाताओं को विशेष जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता घर से मतदान की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा, बूथों पर विशेष रैंप और व्हीलचेयर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। युवा मतदाताओं को लक्षित कर उन्हें मतदान के लिए जागरूक किया जाएगा।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अमित कुमार पांडेय, प्रशांत कुमार (CCH), अपर सचिव माधव कुमार सिंह, अशोक प्रियदर्शी और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि कुल मतदान केंद्र 90,712 हैं, जिनमें से ग्रामीण क्षेत्र के मतदान केंद्र 76,801 और शहरी क्षेत्र के मतदान केंद्र 13,712 हैं। प्रति केंद्र औसत मतदाता संख्या 818 है।
विशेष ध्यान देने योग्य पहलू यह है कि 100 प्रतिशत बूथों पर वेब कास्टिंग की जाएगी। इसके अलावा, दिव्यांगों द्वारा संचालित बूथ 292, महिलाओं द्वारा संचालित बूथ 1,044, और युवाओं द्वारा संचालित बूथ 38 बनाए गए हैं। इसके साथ ही आदर्श मतदान केंद्र 1,350 तैयार किए गए हैं, जो मतदाताओं के लिए सुविधाजनक और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करेंगे।
गुंजियाल ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को भी निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतें। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस बार निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को संपन्न की जाएगी। इन चुनावों को सफल और निष्पक्ष बनाने के लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है। सभी मतदाता अपने मत का प्रयोग कर लोकतंत्र के महापर्व में भाग लेने के लिए प्रेरित किए जा रहे हैं।
इस तरह राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग दोनों मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मतदाता सुविधा, सुरक्षा और निष्पक्षता के सभी मानक पूरे हों। इस बार चुनाव में तकनीकी नवाचार, बूथ स्थिरता और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी जैसी पहल इसे पिछले चुनावों से और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएंगी।






