ब्रेकिंग
सिमुलतला आवासीय विद्यालय में चयन के बाद भी नहीं मिला एडमिशन, छात्र ने CM-PM से लगाई न्याय की गुहारआपसी विवाद में खूनी खेल, दामाद ने चाकू से गोदकर की ससुर की हत्या; पुलिस ने दबोचामगध विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में ABVP का हंगामा, एक घंटे से अधिक बाधित रही कार्यवाहीमोबाइल वाली Gen Z को साधने की तैयारी! BJP बनाएगी युवाओं से सीधा कनेक्शन; तैयार हुई ख़ास टीम ; इन नेताओं को मिली जिम्मेदारीनगर निगम बोर्ड की बैठक में जोरदार हंगामा, पार्षद बेहोश होकर गिरे; धरना और भारी नारेबाजीसिमुलतला आवासीय विद्यालय में चयन के बाद भी नहीं मिला एडमिशन, छात्र ने CM-PM से लगाई न्याय की गुहारआपसी विवाद में खूनी खेल, दामाद ने चाकू से गोदकर की ससुर की हत्या; पुलिस ने दबोचामगध विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में ABVP का हंगामा, एक घंटे से अधिक बाधित रही कार्यवाहीमोबाइल वाली Gen Z को साधने की तैयारी! BJP बनाएगी युवाओं से सीधा कनेक्शन; तैयार हुई ख़ास टीम ; इन नेताओं को मिली जिम्मेदारीनगर निगम बोर्ड की बैठक में जोरदार हंगामा, पार्षद बेहोश होकर गिरे; धरना और भारी नारेबाजी

बिहार : DSP और डिप्टी कलक्टर की नौकरी छोड़कर 6 लोग बन गये असिस्टेंट प्रोफेसर, बोले.. बहुत झमेला है अफसरशाही में

ARRAH : आज के हर एक युवक का सपना होता है ऑफिसर बनना. लेकिन दूसरी तरफ कुछ ऐसे युवा भी है. जो प्रशासनिक अधिकारी का जॉब छोड़ असिस्टेट प्रोफेस बन गए. इनके लिए सम्मान के साथ सुकून की जिंदगी ज्यादा अहम है

बिहार : DSP और डिप्टी कलक्टर की नौकरी छोड़कर 6 लोग बन गये असिस्टेंट प्रोफेसर, बोले.. बहुत झमेला है अफसरशाही में
Tejpratap
Tejpratap
3 मिनट

ARRAH : आज के हर एक युवक का सपना होता है ऑफिसर बनना. लेकिन दूसरी तरफ कुछ ऐसे युवा भी है. जो प्रशासनिक अधिकारी का जॉब छोड़ असिस्टेट प्रोफेस बन गए. इनके लिए सम्मान के साथ सुकून की जिंदगी ज्यादा अहम है. बता दें बीते कुछ सालों में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में ऐसे आधा दर्जन असिस्टेट प्रोफेसर पोस्टेड हुए हैं. जो पहले से प्रशासन और पुलिस में बड़े पोस्ट पर थे. 


इन सभी असिस्टेट प्रोफेसरों का कहना है कि प्रशासनिक अफसर बनने में रूतबा और सम्मान जरूर है. लेकिन जवाबदेहियों में उलझ कर आप ना अपनी पढाई कर सकते है ना ही कोई प्रयोग. जबकि शिक्षा क्षेत्र को चुनने का बड़ा फायदा है कि आप अपनी पढ़ाई और ज्ञान अर्जित करने की रूचि को जारी रख सकते हैं. इस=इन्हीं में से एक डीएसपी का पद छोड़कर एसबी कालेज में भूगोल के सहायक प्राध्यापक बने सदाम हुसैन कहते हैं कि पुलिस अधिकारी को जो सम्मान मिलता है, उससे थोड़ा भी कम सम्मान गुरु का नहीं है. इसीलिए, जब मौका मिला, तब उन्होंने अध्यापन को अपना करियर चुना. दूसरी तरफ एसबी कालेज में इतिहास विभाग में अभिनव आनंद, एचडी जैन कालेज के भूगोल विभाग में कुमार निर्भय, स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में शशि भूषण देव आदि भी ऐसे ही शिक्षक हैं. जो बड़े पोस्ट को त्याग कर आए हैं.


स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में शशि भूषण देव पोस्टेड हैं जो 53-55वीं बीपीएससी परीक्षा में बीडीओ पद के लिए चयनित हुए. छापरा जिले के गड़खा प्रखंड में में छह माह ड्यूटी कि लेकिन संतुष्टि नहीं मिली. कहते हैं कि मन अच्छे पद को पाकर खिल उठता है, लेकिन परिवार के लिए समय नहीं मिलता है. यह मुझे अंदर से कचोटता रहा. शिक्षक कार्य में आंतरिक शांति है और सम्मान भी है. एसबी कालेज के भूगोल विभाग में सदाम हुसैन असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. 56वीं बीपीएससी परीक्षा में डीएसपी के लिए चयनित किये गए और पटना ऑफिस में छह माह सेवा भी दी. उनका कहना है पुलिस की नौकरी रास नहीं आई. शिक्षक बनने में सम्मान और संतुष्टि दोनों है.




टैग्स