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NHAI Bhagalpur : बाहर से चमकदार, अंदर से जर्जर, इस पुल पर कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा; ओवरटेकिंग पर 10 हजार का जुर्माना

भागलपुर को सीमांचल से जोड़ने वाला विक्रमशिला पुल हाल ही में प्रशासन द्वारा रंग-रोगन कर चमकाया गया है, लेकिन असल में इसका अंदरूनी हिस्सा गंभीर खतरे में है।

NHAI Bhagalpur : बाहर से चमकदार, अंदर से जर्जर, इस पुल पर कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा; ओवरटेकिंग पर 10 हजार का जुर्माना
Tejpratap
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NHAI Bhagalpur : भागलपुर को सीमांचल क्षेत्र से जोड़ने वाला एकमात्र विक्रमशिला पुल वर्तमान में दयनीय स्थिति में है। प्रशासन द्वारा हाल ही में इस पुल को रंग-रोगन कर चमकाया गया है, जिससे बाहर से देखने पर यह बिल्कुल नया लग रहा है। लेकिन वास्तविकता इसके अंदरूनी हिस्से में छिपी है। जब कोई व्यक्ति इस पुल पर चलकर निरीक्षण करता है तो इसकी खराब हालत साफ नजर आती है।


वास्तव में, पुल की सबसे बड़ी कमजोरी इसके एक्सपेंशन जॉइंट और अंदरूनी संरचना में है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुल के कुछ जॉइंट में 6 से 7 इंच तक गैप हो चुका है, जो गंभीर खतरे की चेतावनी है। विशेष रूप से खंभा संख्या 127-128, 120-121 और 117 के आसपास कुल 10 से 12 स्थान ऐसे हैं, जहां तुरंत मरम्मत की आवश्यकता है। इन जॉइंट्स में कम्पन भी पहले से बढ़ गई है, जो इस बात का संकेत है कि पुल का संरचनात्मक स्वास्थ्य खतरे में है।


हालांकि प्रशासन ने इस पुल पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं। पुल पर कैमरों के माध्यम से ओवरटेकिंग और ट्रैफिक नियमों का पालन कराने की व्यवस्था की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने भी लगाए जा रहे हैं, ताकि जाम और हादसों जैसी स्थिति से बचा जा सके। यह पहल सराहनीय है, लेकिन यह सिर्फ बाहरी सजावट और निगरानी तक ही सीमित है।


भागलपुर के जिलाधिकारी और एनएचएआई के अभियंता कई बार पुल की खराब स्थिति को लेकर प्रशासन को लिखित चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने जॉइंट की मरम्मत और पुल की अंदरूनी संरचना की जांच की मांग की थी। बावजूद इसके अभी तक इस पर किसी गंभीर कदम की जानकारी नहीं है। इस पुल से रोजाना लगभग 30 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। इनमें झारखंड और अन्य राज्यों से आने-जाने वाले भारी ट्रक भी शामिल हैं। ऐसे में पुल पर पड़ने वाला दैनिक भार बहुत अधिक है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। पुल का अंदरूनी हिस्सा कमजोर होने के कारण भारी वाहन गुजरते समय कम्पन और झटके महसूस होते हैं। यह स्थिति स्थानीय जनता के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। वहीं, प्रशासन की ओर से केवल रंग-रोगन और बाहरी सौंदर्य पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। पुल की वास्तविक सुरक्षा के लिए अंदरूनी मरम्मत, एक्सपेंशन जॉइंट की सही जांच और संरचनात्मक मजबूती पर फोकस करना आवश्यक है।


विक्रमशिला पुल केवल भागलपुर ही नहीं बल्कि पूरे सीमांचल क्षेत्र की लाइफलाइन है। इस पुल के खराब होने पर न केवल यातायात प्रभावित होगा, बल्कि दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर भी गंभीर असर पड़ेगा। व्यापारी, किसान और यात्री इस पुल पर निर्भर हैं, जिससे इसके सुरक्षित संचालन की आवश्यकता और बढ़ जाती है।


पुल निगम विभाग की ओर से अभी तक इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई के अधिकारियों की चेतावनियों के बावजूद सुधार कार्य में सुस्ती देखी जा रही है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि पुल की पूरी संरचना का तकनीकी निरीक्षण किया जाए और तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। इसके अलावा, भारी वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी प्रतिबंध या वजन सीमा लागू करना भी आवश्यक हो सकता है।


पुल के रंग-रोगन और बाहरी चमक से भले ही देखने में यह नया लगे, लेकिन असली खतरा इसके अंदरूनी हिस्से में है। यदि समय रहते सुधार कार्य नहीं किया गया, तो यह हादसा टालना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए यह जरूरी है कि वे इस गंभीर स्थिति को गंभीरता से लें और तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करें।


भागलपुर और सीमांचल क्षेत्र की जनता की सुरक्षा के लिए विक्रमशिला पुल का सुरक्षित और मजबूत होना बेहद आवश्यक है। बाहरी चमक के पीछे छिपे खतरों को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी दुर्घटना का कारण बन सकता है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह दिखावे के बजाय वास्तविक सुरक्षा पर ध्यान दे और पुल को किसी भी अप्रिय घटना से पहले सुरक्षित बनाए।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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