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20 साल पहले चलाई थी गोली, अब आया कोर्ट का फैसला; बिहार में 83 साल के बुजुर्ग को 7 साल की सजा

Patna High Court News: भागलपुर के पुराने गोलीकांड मामले में पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब दो दशक पुराने मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बदलते हुए आरोपी को दोषी करार दिया गया है। 83 वर्षीय मुख्य आरोपी समेत अन्य दोषियों को सजा सुनाई...

20 साल पहले चलाई थी गोली, अब आया कोर्ट का फैसला; बिहार में 83 साल के बुजुर्ग को 7 साल की सजा
Ramakant kumar
4 मिनट

Patna High Court News: भागलपुर के करीब 20 साल पुराने गोलीकांड मामले में पटना हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटते हुए मुख्य आरोपित 83 वर्षीय शमशेर उर्फ समसुल मिस्त्री समेत अन्य आरोपितों को दोषी करार दिया है. हाई कोर्ट ने शमशेर उर्फ समसुल मिस्त्री को हत्या के प्रयास के मामले में सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.


मामला भागलपुर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2006 में मजार की जमीन पर स्कूल निर्माण को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है. इस दौरान हुई गोलीबारी में शम्स तबरेज नामक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए थे. मामले की सुनवाई के बाद भागलपुर की सत्र अदालत ने 11 जनवरी 2018 को आरोपितों को बरी कर दिया था. इसके खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने अब ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है.


घायल गवाह की गवाही को हाई कोर्ट ने माना अहम

न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान घायल प्रत्यक्षदर्शी की गवाही, अन्य चश्मदीदों के बयान और चिकित्सीय साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना. अदालत ने कहा कि घायल गवाह का बयान शुरुआत से लेकर अंत तक लगातार एक जैसा रहा और मेडिकल साक्ष्यों से भी उसकी पुष्टि हुई.


अदालत के अनुसार, अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त हैं. जांच में कुछ कमियां होने के बावजूद केवल इस आधार पर अभियोजन के पूरे मामले को खारिज नहीं किया जा सकता.


मजार की जमीन पर स्कूल निर्माण को लेकर हुआ था विवाद

अभियोजन के अनुसार, 18 नवंबर 2006 को मजार की जमीन पर स्कूल निर्माण को लेकर विवाद हुआ था. इसी दौरान चांद आलम उर्फ मनु ने घायल शम्स तबरेज को पकड़ लिया था. आरोप है कि इसके बाद शमशेर उर्फ समसुल मिस्त्री को गोली चलाने के लिए कहा गया.


इसके बाद गोली चलने से शम्स तबरेज गंभीर रूप से घायल हो गए थे. मामले में पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की थी और बाद में यह मामला अदालत तक पहुंचा.


20 साल पुराने मामले में अब आया फैसला

इस मामले में फैसला आने में करीब दो दशक का समय लग गया. हाई कोर्ट ने सजा तय करते समय शमशेर उर्फ समसुल मिस्त्री की उम्र का भी उल्लेख किया. अदालत ने कहा कि आरोपी अपने बयान दर्ज होने के समय करीब 75 वर्ष के थे और मामला लंबे समय से लंबित रहा.


वर्तमान में शमशेर उर्फ समसुल मिस्त्री की उम्र करीब 83 वर्ष है. इसके बावजूद हाई कोर्ट ने उन्हें हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.


25 हजार रुपये का जुर्माना भी

हाई कोर्ट ने शमशेर उर्फ समसुल मिस्त्री को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया. अदालत ने उन्हें सात वर्ष के कठोर कारावास के साथ 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई है.


वहीं चांद आलम उर्फ मनु को धारा 307/149, 324/149, 147 और 148 के तहत दोषी करार देते हुए पांच वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है.


चार सप्ताह में करना होगा सरेंडर

हाई कोर्ट ने सभी दोषियों को चार सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है. अदालत ने ट्रायल कोर्ट के पुराने फैसले को निरस्त करते हुए नए सिरे से दोषसिद्धि और सजा का आदेश दिया है.