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हाईकोर्ट के एक आदेश ने बदल दी पूरी जांच..16 दिन में वार्डन रिंकू कुमारी हत्याकांड का खुला सबसे बड़ा राज.. IG विकास वैभव ने कर दिया बेनकाब

बेगूसराय के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की तत्कालीन वार्डन रिंकू कुमारी की मौत को पहले आत्महत्या मानकर फाइल बंद कर दी गई थी। पटना हाईकोर्ट के आदेश पर गठित SIT ने 16 दिनों की वैज्ञानिक जांच में हत्या का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को ..

बिहार न्यूज
आत्महत्या की कहानी निकली झूठी!
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
9 मिनट

BEGUSARAI:सच देर से सामने आता है, लेकिन आता जरूर है "कहते हैं कि यदि सच के लिए हिम्मत और हौसले के साथ लड़ाई लड़ी जाए तो देर भले हो जाए, लेकिन इंसाफ जरूर मिलता है...बेगूसराय के बहुचर्चित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, मुजफ्फरा की तत्कालीन वार्डन रिंकू कुमारी मौत कांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ। बरौनी थाना क्षेत्र के असुरारी गांव की रहने वाली तीन बेटियों ने अपनी मां की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया। पांच वर्षों तक न्याय की लड़ाई लड़ी, पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दी और आखिरकार पटना हाईकोर्ट के आदेश पर गठित आईजी विकास वैभव के नेतृत्व वाली विशेष अनुसंधान टीम (SIT) ने महज 16 दिनों की वैज्ञानिक जांच में हत्या का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।


4 अप्रैल 2021...जिस दिन शुरू हुआ पांच साल का संघर्ष

रिंकू कुमारी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, मुजफ्फरा वीरपुर में वार्डन थीं। 4 अप्रैल 2021 की सुबह वह रोज की तरह अपने असुरारी स्थित घर से विद्यालय के लिए निकली थीं। उसी दिन दोपहर करीब दो बजे परिजनों को सूचना मिली कि विद्यालय में उनकी मौत हो गई है।


सबसे बड़ी बेटी तेजस्विनी कुमारी,चेतना कुमारी और लूसी कुमारी जब अपने परिजनों के साथ विद्यालय पहुंचीं तो उन्होंने अपनी मां का शव फर्श पर रखा देखा। तेजस्विनी का आरोप है कि वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें अपने मोबाइल में वह तस्वीर दिखाई, जिसमें शव पंखे से लटका हुआ दिखाई दे रहा था। उसी समय उन्हें पूरा विश्वास हो गया कि उनकी मां ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उनकी हत्या कर शव को आत्महत्या का रूप देने के लिए फंदे से लटकाया गया।


मां के अंतिम संस्कार के बाद तेजस्विनी कुमारी ने वीरपुर थाना में लिखित आवेदन देकर एफआईआर दर्ज कराई। आवेदन में उन्होंने स्पष्ट लिखा कि "मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी मां की हत्या की गई है और साक्ष्य छिपाने के लिए शव को पंखे से लटका दिया गया।" साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।


क्लोजर रिपोर्ट के बाद भी नहीं टूटा बेटियों का हौसला

प्रारंभिक जांच में पुलिस ने मामले को आत्महत्या मान लिया और वर्ष 2024 में क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल कर दी। लेकिन तेजस्विनी कुमारी और उनकी दो बहनों चेतना कुमारी, लूसी कुमारी ने हार नहीं मानी। उन्हें अपनी मां पर पूरा भरोसा था कि वह आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकतीं। तीनों बहनों ने न्याय के लिए लगातार संघर्ष जारी रखा और अंततः पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


हाईकोर्ट के आदेश पर बनी SIT, 12 जुलाई से शुरू हुई नई जांच

पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद आईजी विकास वैभव के नेतृत्व में विशेष अनुसंधान दल (SIT) का गठन किया गया। 12 जुलाई 2026 को आईजी विकास वैभव स्वयं एसआईटी के साथ घटनास्थल पहुंचे और पूरे घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।


उसी दिन मृतका की पुत्री तेजस्विनी कुमारी भी घटनास्थल पर मौजूद थीं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था, "मेरी मां आत्महत्या नहीं कर सकतीं। उनकी हत्या की गई है।" उन्होंने करीब 15 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद का भी जिक्र किया और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। आज, 16 दिन बाद, एसआईटी की जांच में हत्या का खुलासा होने के बाद तेजस्विनी का यह दावा काफी हद तक जांच की दिशा से मेल खाता दिखाई दिया।


16 दिनों की वैज्ञानिक जांच में खुल गई हत्या की परतें

आईजी विकास वैभव के नेतृत्व में एसआईटी ने जांच को शून्य से शुरू किया। घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया गया। विद्यालय के कमरे, परिसर, छत तक जाने वाले रास्ते, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सभी पहलुओं की बारीकी से जांच हुई। इसके साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों के लेन-देन, डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेजी रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण चश्मदीद गवाह का बयान भी सामने आया, जिसमें कोशल कुमार और अजीत कुमार उर्फ बबलू की भूमिका का उल्लेख किया गया।


एफएसएल और मेडिकल बोर्ड ने बदल दी पूरी तस्वीर

एसआईटी की जांच में सबसे अहम भूमिका वैज्ञानिक साक्ष्यों ने निभाई। एफएसएल की रिपोर्ट में उपलब्ध फोटोग्राफ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गला दबाकर हत्या (Strangulation) की संभावना व्यक्त की गई। मेडिकल बोर्ड ने भी अपनी राय में कहा कि गला दबाकर हत्या की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


जांच में रुपये के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई। पुलिस ने कॉल डिटेल, बैंक लेन-देन, डिजिटल साक्ष्य और परिस्थितिजन्य तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद कोशल कुमार और अजीत कुमार उर्फ बबलू की प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाई और दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया।


आईजी विकास वैभव बोले - पहले गंभीरता से नहीं हुई थी जांच

मामले के खुलासे के बाद आईजी विकास वैभव ने कहा कि पुनः अनुसंधान में कई नए तथ्य सामने आए हैं। उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य गला दबाकर हत्या की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक अनुसंधान पूरी गंभीरता से नहीं किया गया था। यही कारण है कि अब उस समय के अनुसंधानकर्ता और अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दोष पाया जाता है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।


वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने संभाली थी जांच

एसआईटी में बेगूसराय प्रक्षेत्र के डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा, विशेष निगरानी इकाई के डीएसपी अशोक झा, बगहा के एसडीपीओ निहार भूषण, पूर्वी मुजफ्फरपुर के पुलिस पदाधिकारी अलय वत्स, पुलिस निरीक्षक कुमार अभिनव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। टीम ने हर साक्ष्य को नए सिरे से परखा और वैज्ञानिक तरीके से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ीं। बेटी बोली— पांच साल में जो नहीं हुआ, वह 16 दिनों में हो गया


मामले के खुलासे के बाद तेजस्विनी कुमारी ने भावुक होकर कहा कि उन्हें शुरू से विश्वास था कि उनकी मां आत्महत्या नहीं कर सकतीं। उन्होंने आईजी विकास वैभव, डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा सहित पूरी एसआईटी टीम, पटना हाईकोर्ट और अपने वरिष्ठ अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय, संदीप साही का आभार जताया। उन्होंने कहा, "जो सच पांच वर्षों में सामने नहीं आ सका, वह 16 दिनों की निष्पक्ष जांच में सामने आ गया। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिलेगी।"


प्रेस कॉन्फ्रेंस में छलक पड़ा पांच साल का दर्द

मामले के खुलासे के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीनों बेटियां तेजस्विनी कुमारी, चेतना कुमारी, लूसी कुमारी भावुक हो गईं। उनकी आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने आईजी विकास वैभव और पूरी एसआईटी टीम की ओर देखते हुए बार-बार कहा -

"थैंक यू सर... थैंक यू सर... आपने हमारी मां को इंसाफ दिलाया।

भावुक स्वर में उन्होंने कहा -

"पांच साल हमने किस तरह गुजारे हैं... किस तरह जिए हैं... यह सिर्फ हम तीनों बहनें ही जानती हैं।"

उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

तीन बेटियों के संघर्ष की जीत: सिर्फ एक केस नहीं... तीन बेटियों के विश्वास की जीत

रिंकू कुमारी हत्याकांड अब सिर्फ दो आरोपियों की गिरफ्तारी की कहानी नहीं रह गई है। यह उन तीन बेटियों की जिद, हिम्मत और न्याय के प्रति अडिग विश्वास की मिसाल बन गया है, जिन्होंने बंद हो चुकी फाइल को फिर से खुलवाया और आखिरकार अपनी मां के लिए इंसाफ की राह तैयार कर दी। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पुनः अनुसंधान अभी जारी है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता या नए साक्ष्य सामने आते हैं तो उनके विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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रिपोर्टिंग
H

रिपोर्टर

HARERAM DAS

FirstBihar संवाददाता