Sahyog Shivir Bihar: बिहार सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर बेगूसराय के 18 प्रखंडों में सहयोग शिविर लगाए गए हैं। वीरपुर प्रखंड के नौला पंचायत में भी शिविर चल रहा था, लेकिन इसी बीच वीरपुर थाना क्षेत्र के गाड़ा चौक पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवानंद कुशवाहा सड़क पर धरना पर बैठ गए।
भाजपा नेता का आरोप है कि गांव के कुछ दबंग और असामाजिक तत्वों ने उनके घर जाने वाले रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है। कई बार थाना, सीओ, डीएसपी और जिला प्रशासन को आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे परेशान होकर उन्हें सड़क पर बैठने को मजबूर होना पड़ा।
धरने पर बैठे भाजपा नेता देवानंद कुशवाहा ने प्रशासन पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि जब उनकी ही सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी। उन्होंने कहा कि वर्षों से समाज और गांव के विकास के लिए उन्होंने अपनी जमीन देकर कई रास्ते बनवाए, लेकिन आज उन्हीं का रास्ता बंद कर दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रामकुमार और विनोद कुमार नामक लोग पीडब्ल्यूडी की जमीन को अपनी बताकर रास्ते को जबरन बंद कर रहे हैं। इतना ही नहीं, रास्ते पर लकड़ी गिराकर आवागमन भी बाधित कर दिया गया है। भाजपा नेता ने कहा कि इस मामले की मापी पहले ही हो चुकी है और अतिक्रमण भी हटाया गया था, लेकिन फिर दोबारा दबंगों द्वारा रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया।
देवानंद कुशवाहा ने यह भी दावा किया कि दो दिन पहले स्थानीय निवासी रामविलास सिंह पर भी गड़ासा से हमला किया गया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इस मामले में भी कई बार पुलिस को आवेदन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
धरने के दौरान भाजपा नेता ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक रास्ता खाली नहीं कराया जाएगा, तब तक वह सड़क से नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि “समाज के लिए काम करने वालों का आज अपमान हो रहा है। प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है और लोग मजाक उड़ा रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही वीरपुर थाना पुलिस और अंचल अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब तीन घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद सीओ भाई वीरेंद्र ने आश्वासन दिया कि रास्ता अवरुद्ध करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और जल्द समस्या का समाधान कराया जाएगा। इसके बाद भाजपा नेता को सड़क से हटाया गया। इस घटना के बाद सहयोग शिविर और प्रशासनिक दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं।



