Bihar News : बिहार के अरवल जिले में उत्पाद थाना की हाजत में बंद एक अधेड़ की संदिग्ध मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया। घटना के बाद मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने उत्पाद थाना परिसर में जमकर हंगामा किया और शव रखकर प्रदर्शन किया। हालात ऐसे बन गए कि थाने में मौजूद पुलिसकर्मी और अधिकारी वहां से निकल गए। बाद में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सदर थाना की अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात करना पड़ा।
मृतक की पहचान सदर थाना क्षेत्र के हैबतपुर गांव निवासी 50 वर्षीय अनिल कुमार उर्फ टुनटुन कुमार के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, सोमवार रात उत्पाद विभाग की टीम ने शराब सेवन के आरोप में गांव से तीन लोगों को हिरासत में लिया था। तीनों को उत्पाद थाना की हाजत में रखा गया था। मंगलवार सुबह अनिल कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने पुलिस पर लगाया पिटाई का आरोप
अनिल कुमार की मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में उत्पाद थाना पहुंच गए। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत के दौरान अनिल के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसके कारण उनकी मौत हुई। मृतक के भाई बिजेंद्र सिंह ने बताया कि उनका भाई पूरी तरह स्वस्थ था और गिरफ्तारी के दौरान भी पुलिस वाहन में उसके साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने दावा किया कि मृतक के सिर पर चोट के निशान थे और खून भी बह रहा था, जो पुलिस की पिटाई की ओर इशारा करता है।
परिजनों ने दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए शव को थाना परिसर में रखकर घंटों प्रदर्शन किया। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने एनएच-139 स्थित भगत सिंह चौक को सुबह करीब 9:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक जाम रखा, जिससे सड़क पर लंबी वाहनों की कतार लग गई।
थानेदार समेत तीन लोगों पर हत्या का केस
मामले ने तूल पकड़ने के बाद मृतक के भाई बिजेंद्र सिंह की शिकायत पर सदर थाना में उत्पाद थाना अध्यक्ष, ड्यूटी पर तैनात पदाधिकारी और एक जवान के खिलाफ मारपीट कर हत्या करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले में विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी है।
हाजत में बंद दूसरे बंदी ने बताई पूरी घटना
घटना के समय हाजत में बंद रहे ग्रामीण चंद्र विलास सिंह ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, सोमवार रात करीब 10 बजे अनिल कुमार ने सीने में तेज दर्द और तबीयत खराब होने की शिकायत की थी। उन्होंने कई बार अस्पताल ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन उत्पाद थाना के कर्मियों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। चंद्र विलास का कहना है कि यदि समय रहते इलाज कराया जाता तो शायद अनिल की जान बच सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मंगलवार तड़के करीब चार बजे अनिल की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस आनन-फानन में उन्हें अस्पताल लेकर पहुंची। घटना के बाद हाजत में बंद अन्य करीब दस लोगों को भी सुरक्षा और स्वास्थ्य जांच के लिए सदर अस्पताल भेजा गया।
एसडीपीओ ने शुरू कराई जांच
हाजत में मौत की सूचना मिलने के बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) कुमार संजय मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने मृतक के परिजनों से भी बातचीत की। एसडीपीओ ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने पुलिस हिरासत में सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों के इलाज को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।





