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आरा-सासाराम रेल रूट की बदलेगी तस्वीर: 700 करोड़ की लागत से होगा दोहरीकरण, सफर होगा आसान

Ara Sasaram Railway Update: बिहार में रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। आरा से सासाराम के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबे रेलखंड का दोहरीकरण करने की तैयारी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। काम पूरा...

आरा-सासाराम रेल रूट की बदलेगी तस्वीर: 700 करोड़ की लागत से होगा दोहरीकरण, सफर होगा आसान
Ramakant kumar
4 मिनट

Ara Sasaram Railway Update: बिहार में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी परियोजना पर काम होने की तैयारी है. आरा से सासाराम के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का दोहरीकरण किया जाएगा. इस परियोजना पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. दोहरीकरण पूरा होने के बाद इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन आसान होगा और यात्रियों को भी काफी राहत मिलेगी.


आरा-सासाराम रेलखंड अभी सिंगल लाइन है. इस वजह से ट्रेनों के परिचालन पर दबाव रहता है. दोहरीकरण होने से इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी और परिचालन में होने वाली देरी कम करने में मदद मिलेगी. इसका फायदा रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के साथ इस रेलखंड से जुड़े व्यापारियों और किसानों को भी मिल सकता है.


1909 में शुरू हुआ था रेल लाइन का सफर

आरा-सासाराम रेल लाइन का इतिहास काफी पुराना है. वर्ष 1909 में मार्टिन रेलवे परियोजना के तहत इस रेलखंड पर काम शुरू किया गया था. करीब 100 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर शुरुआत में छोटी लाइन की ट्रेनें चलाई जाती थीं. उस समय भाप इंजन से ट्रेनों का परिचालन होता था और इस रूट पर कुल 15 स्टेशन बनाए गए थे.


समय के साथ छोटी लाइन की सीमाएं सामने आने लगीं और वर्ष 1978 में इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया. इससे इस रूट पर निर्भर रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई.


2009 में शुरू हुआ बड़ी लाइन पर परिचालन

रेल कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए वर्ष 2006-07 में इस रेलखंड को बड़ी लाइन में बदलने का काम शुरू किया गया. निर्माण कार्य पूरा होने के बाद करीब 2009 में पहली बार इस रूट पर ब्रॉड गेज ट्रेन दौड़ी. इसके बाद आरा और सासाराम के बीच रेल संपर्क फिर से मजबूत हुआ.


इस रेलखंड के जरिए यात्रियों को धनबाद, भभुआ, बोकारो, झरिया, गया और रांची जैसे क्षेत्रों तक आने-जाने में भी सुविधा मिली.


दोहरीकरण से कम होगा ट्रेनों का दबाव

अब इस रेलखंड के दोहरीकरण की योजना से एक बार फिर इसकी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. करीब 700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से होने वाले इस काम के पूरा होने पर ट्रेनों के परिचालन के लिए दूसरा ट्रैक उपलब्ध होगा. इससे एक ही ट्रैक पर ट्रेनों के आने-जाने की निर्भरता कम होगी और परिचालन को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा.


शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

आरा-सासाराम रेल लाइन का दोहरीकरण केवल रेल परिचालन तक सीमित नहीं रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी से इस क्षेत्र के लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में सहूलियत मिल सकती है. छात्रों के लिए दूसरे शहरों में पढ़ाई करना आसान होगा, वहीं मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी.


इसके अलावा व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. किसान अपनी उपज को दूसरे बाजारों तक पहुंचा सकेंगे और स्थानीय कारोबारियों को भी परिवहन की बेहतर सुविधा मिलेगी. रेल संपर्क मजबूत होने से क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा होने की संभावना है.