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Anant Singh : अनंत सिंह की विधायकी पर लटकी तलवार? JDU की शिकायत, वीडियो-सबूत और अब विधानसभा अध्यक्ष का फैसला

मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। JDU ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की है। अब वीडियो फुटेज और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

Anant Singh
Anant Singh
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Tejpratap
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6 मिनट

पटना/गया: बिहार की राजनीति में एक बार फिर मोकामा विधायक अनंत सिंह को लेकर हलचल तेज हो गई है। विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से अलग जाकर गतिविधियां करने के आरोपों के बाद अब मामला उनकी विधानसभा सदस्यता तक पहुंच गया है। जेडीयू ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए अनंत सिंह के खिलाफ बिहार विधानसभा अध्यक्ष के सामने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के साथ कई दस्तावेज और साक्ष्य भी सौंपे गए हैं। ऐसे में अब सबकी नजर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के अगले कदम पर टिकी है।

बुधवार को गया के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने पूरे मामले को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि जेडीयू की ओर से शिकायत के साथ वीडियो फुटेज, अखबारों की कटिंग और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। इन सभी साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है। जांच के बाद ही नियमों के तहत आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।


जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया और चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया। पार्टी की ओर से इन गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है।


मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि अनंत सिंह मोकामा से जेडीयू के विधायक हैं और हाल के विधान परिषद चुनाव में उनके राजनीतिक रुख ने पार्टी नेतृत्व के साथ उनके रिश्तों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पटना स्नातक सीट से जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज कुमार का खुलकर समर्थन किया था। दूसरी ओर, जेडीयू की ओर से इसी सीट पर नीरज कुमार को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया गया था।


चुनाव के दौरान अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी खूब चर्चा में रही। अनंत सिंह ने अपने समर्थित प्रत्याशी की जीत का दावा किया था, जबकि जेडीयू नेतृत्व लगातार पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में एकजुटता का संदेश देता रहा। अब चुनाव परिणाम सामने आने के बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर शिकायत ने इस पूरे विवाद को एक नए मोड़ पर पहुंचा दिया है।


विधानसभा अध्यक्ष के सामने अब क्या है मामला?

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने स्पष्ट किया है कि शिकायत मिलने मात्र से किसी विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती। पहले शिकायत में लगाए गए आरोपों और उसके समर्थन में दिए गए साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इसके बाद बिहार विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली और लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई होगी। अध्यक्ष के इस बयान से साफ है कि फिलहाल अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मामला अभी समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया के चरण में है। इसलिए इसे लेकर किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।


वीडियो से लेकर अखबार की कटिंग तक, क्या-क्या सौंपा गया?

जेडीयू की शिकायत को मजबूत करने के लिए पार्टी की ओर से सिर्फ लिखित आरोप ही नहीं लगाए गए हैं, बल्कि वीडियो फुटेज, अखबारों में प्रकाशित खबरों की कटिंग और अन्य दस्तावेज भी विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए हैं। अब इन सामग्रियों की प्रासंगिकता और उनके आधार पर लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी। यही वजह है कि आने वाले दिनों में विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर होने वाली कार्रवाई राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। अगर जांच में पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप और उपलब्ध कराए गए साक्ष्य नियमों के दायरे में कार्रवाई योग्य पाए जाते हैं, तो मामला आगे बढ़ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी प्रक्रिया के बाद ही होगा।


'बड़ी जिम्मेदारी' वाले सवाल पर मुस्कुराए विधानसभा अध्यक्ष

मीडिया से बातचीत के दौरान जब विधानसभा अध्यक्ष से पूछा गया कि अनंत सिंह की सदस्यता से जुड़ा मामला उनके सामने एक बड़ी जिम्मेदारी है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने किसी तरह की जल्दबाजी का संकेत नहीं दिया और दोहराया कि निर्णय नियमों के अनुसार ही लिया जाएगा।उनके इस रुख से यह संकेत जरूर मिलता है कि विधानसभा अध्यक्ष फिलहाल राजनीतिक दबाव या बयानबाजी के बजाय दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर आगे बढ़ना चाहते हैं।


अब आगे क्या होगा?

फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता बरकरार है और सदस्यता समाप्त करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है। इसके बाद नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय होगी।

मोकामा के विधायक अनंत सिंह के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि चुनावी राजनीति में उनके रुख को लेकर पहले से ही जेडीयू के भीतर चर्चा तेज थी। अब शिकायत विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचने के बाद राजनीतिक विवाद संस्थागत प्रक्रिया के दायरे में आ गया है।

ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा अध्यक्ष की समीक्षा और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर बिहार की राजनीति की नजर रहेगी। सवाल यही है कि क्या पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप सिर्फ राजनीतिक विवाद तक सीमित रहेंगे या फिर इसका असर अनंत सिंह की विधायकी पर भी पड़ेगा? फिलहाल इसका जवाब विधानसभा अध्यक्ष की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।