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‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

मोकामा के ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बेबाक जवाब, विवादित घटनाएं, आपराधिक मामलों का इतिहास, करोड़ों की संपत्ति और अलग अंदाज ने उन्हें बिहार की राजनीति का बेहद चर्चित चेहरा बना दिया है।

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?
Tejpratap
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12 मिनट

Anant Singh : मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह सिर्फ एक नाम नहीं हैं। वह एक ऐसा किरदार हैं, जिनके साथ राजनीति, दबंग छवि, विवाद, समर्थकों की भीड़ और ठेठ देसी अंदाज—सब एक साथ दिखाई देता है। जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह की पटना स्नातक सीट से हार के बाद एक बार फिर अनंत सिंह चर्चा में हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने जिस आत्मविश्वास से अनुज की जीत का दावा किया था, नतीजे आने के बाद वही दावा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

लेकिन अनंत सिंह की कहानी सिर्फ किसी चुनाव की हार-जीत तक सीमित नहीं है। उनके आसपास दशकों से ऐसे किस्से घूमते रहे हैं, जिनमें कभी उनका बेबाक जवाब सुर्खियां बनता है तो कभी कोई विवाद। कभी पत्रकार के सवाल पर उनका जवाब सोशल मीडिया पर वायरल होता है, तो कभी कैमरे के सामने उनका अंदाज चर्चा में आ जाता है।आखिर कौन हैं अनंत सिंह और क्यों उन्हें मोकामा में ‘छोटे सरकार’ कहा जाता है? आइए पूरी कहानी समझते हैं।

 ‘छोटे सरकार’ नाम आखिर आया कहां से?

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह के चर्चित उपनाम ‘छोटे सरकार’ के पीछे स्थानीय स्तर पर एक दिलचस्प कहानी बताई जाती है। कहा जाता है कि शुरुआती दौर में अनंत सिंह मछली पालन के लिए तालाबों की नीलामी में हिस्सा लेते थे। सरकार से तालाब का ठेका लेने के बाद उसे आगे बोली लगवाकर मुनाफे पर देने की चर्चा होती है।बताया जाता है कि वह नीलामी के लिए रविवार का दिन पसंद करते थे। जब लोग पूछते कि रविवार को कौन सी नीलामी है, तो जवाब मिलता—‘छोटे सरकार की नीलामी।’धीरे-धीरे यही संबोधन इतना लोकप्रिय हुआ कि अनंत कुमार सिंह से ज्यादा लोग उन्हें ‘छोटे सरकार’ के नाम से पहचानने लगे। हालांकि, इस उपनाम की यह कहानी स्थानीय लोगों के हवाले से बताई जाती है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

साधुओं के साथ बचपन, फिर मोकामा की जमीन पर वापसी

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह के शुरुआती जीवन से जुड़े किस्से भी कम दिलचस्प नहीं हैं।कहा जाता है कि उनके जन्म के बाद उनके पिता साधु बन गए थे। बचपन में अनंत सिंह भी गांव आए एक साधु के साथ घर से निकल गए थे। कुछ समय हरिद्वार में रहे और बाद में अयोध्या तक पहुंचे।उनकी औपचारिक पढ़ाई को लेकर भी अलग-अलग किस्से हैं। अनंत सिंह खुद कई मौकों पर कह चुके हैं कि उन्होंने स्कूल में पढ़ाई नहीं की। यानी जिस व्यक्ति की बाद में राजनीति और चुनावी हलकों में इतनी चर्चा हुई, उसके बचपन की कहानी पारंपरिक शिक्षा और सामान्य जीवन से बिल्कुल अलग बताई जाती है।

भाई की हत्या ने बदली जिंदगी?

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अनंत सिंह की जिंदगी की सबसे ज्यादा चर्चा जिन घटनाओं को लेकर होती है, उनमें उनके भाई की हत्या की कहानी भी शामिल है।उनके बारे में कहा जाता है कि भाई की हत्या के बाद उन्होंने साधु जीवन छोड़ दिया और वापस घर लौट आए। इसके बाद भाई की हत्या का बदला लेने की कहानी उनके जीवन से जोड़कर सुनाई जाती है।स्थानीय स्तर पर प्रचलित एक किस्से के मुताबिक, वह अपने भाई के हत्यारे तक पहुंचने के लिए गंगा नदी तक पार कर गए थे।अनंत सिंह ने भी कई बार भाई की हत्या से जुड़े सवालों पर कहा है कि उन्हें बदला लेने का अफसोस नहीं है। उनका तर्क रहा है कि उनके लिए यह इंसाफ का सवाल था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े दावों और किस्सों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। यही वजह है कि अनंत सिंह की कहानी में तथ्य और स्थानीय किंवदंतियां कई बार एक-दूसरे के साथ दिखाई देती हैं।

कभी 150 तो कभी 160 से ज्यादा मुकदमों की चर्चा

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह की पहचान का एक बड़ा हिस्सा उनके आपराधिक मामलों को लेकर भी रहा है। वर्ष 2014 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने खुद पर करीब 150 मुकदमे दर्ज होने की बात कही थी और बताया था कि ज्यादातर मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी थी।समय के साथ मामलों की संख्या बदलती रही। 2025 के विधानसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे में उन्होंने अपने खिलाफ 28 लंबित आपराधिक मामलों का उल्लेख किया।यानी पुराने दौर में चर्चित मुकदमों की संख्या और चुनावी हलफनामे में दर्ज लंबित मामलों को एक ही आंकड़ा मानना सही नहीं होगा। यही फर्क समझना जरूरी है।

2025 के हलफनामे में कितनी संपत्ति?

अनंत सिंह की चर्चा सिर्फ मुकदमों को लेकर नहीं होती। उनकी संपत्ति भी अक्सर खबरों में रहती है।2025 के चुनावी हलफनामे में उनके नाम पर करीब ₹100.61 करोड़ की कुल संपत्ति दर्ज थी।इसमें करीब ₹39.73 करोड़ की चल संपत्ति और लगभग ₹60.87 करोड़ की अचल संपत्ति बताई गई थी। हलफनामे में कृषि भूमि, व्यावसायिक संपत्तियां और आवासीय संपत्तियों का भी विवरण दिया गया था।साथ ही करीब ₹25.99 करोड़ की देनदारियां दर्ज थीं।यानी ‘छोटे सरकार’ की कहानी में एक तरफ आपराधिक मुकदमों का लंबा इतिहास है, तो दूसरी तरफ करोड़ों की संपत्ति का ब्योरा भी है।

‘हम सरकार हैं’—एक इंटरव्यू जिसने बना दी अलग पहचान

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह से जुड़े पुराने किस्सों में वर्ष 2014 का एक इंटरव्यू खास तौर पर चर्चा में रहा है।पत्रकार चिंकी सिन्हा ने अपने एक आलेख में उस इंटरव्यू का जिक्र किया था। उनके मुताबिक, अनंत सिंह के आसपास करीब एक दर्जन लोग मौजूद थे। किसी ने उनके लिए टोपी लाई, किसी ने काला चश्मा दिया और किसी ने सिगरेट जलाई।बताया गया कि इंटरव्यू के दौरान उनका पालतू हाथी भी कुछ देर के लिए कमरे में लाया गया और उसे स्टील के गिलास में चाय पिलाई गई।इसी दौरान हथियार को लेकर भी सवाल हुआ। जब पत्रकार ने एके-47 जैसी राइफल दिखाए जाने पर पूछा कि ‘ये आपका है?’ तो अनंत सिंह का कथित जवाब था—‘हम सरकार हैं।’यह एक लाइन बाद में उनकी दबंग छवि के सबसे चर्चित किस्सों में शामिल हो गई।

पत्रकारों से टकराव भी कम नहीं

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह का बेबाक अंदाज कई बार विवाद का कारण भी बना है। हाल के दिनों में जेडीयू से निष्कासन को लेकर सवाल पूछे जाने पर पत्रकारों से उन्होंने कहा—‘हमको दिक्कत नहीं है, तो तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’उनका यह देसी जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।इसके बाद मंगलवार रात एक पत्रकार का सवाल पसंद नहीं आने पर उन्होंने सवाल पूछ रहे पत्रकार का माइक झटक दिया। यह वीडियो और घटना भी चर्चा में आ गई।लेकिन यह पहला विवाद नहीं था। ऐसे न जाने कितने मामलों में अनंत सिंह का नाम जुड़ता रहा है और वजह महज एक और वह है उनका ठेठ गबई अंदाज।

सिगरेट, चश्मा और समर्थक—अलग ही स्टाइल

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह की सार्वजनिक छवि में उनका पहनावा और अंदाज भी खास भूमिका निभाता है। कैमरे के सामने सिगरेट पीते हुए उनका नजर आना हो, समर्थकों से घिरे रहना हो या उनके आसपास हथियारबंद लोगों की मौजूदगी की तस्वीरें—इन सबने उनकी छवि को बाकी नेताओं से अलग बनाया।उनके समर्थक भी अक्सर उन्हें बेहद खास अंदाज में पेश करते दिखाई देते हैं।यही वजह है कि अनंत सिंह की कोई तस्वीर या वीडियो सामने आते ही वह सामान्य राजनीतिक कंटेंट से ज्यादा तेजी से चर्चा पकड़ लेता है।

‘मौत से नहीं डरता’ वाला दावा

‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह अपने बेबाक बयानों के लिए भी जाने जाते हैं।वह कई मौकों पर दावा कर चुके हैं कि उन पर 20 से ज्यादा बार गोलियां चलाई गईं, लेकिन उन्हें मौत का डर नहीं लगता।बचपन में सांप पकड़ने से लेकर अपराध की दुनिया से जुड़े किस्सों तक, उनके बारे में कई ऐसी बातें कही जाती रही हैं, जिनसे उनके व्यक्तित्व की ‘निडर’ छवि बनती गई।हालांकि, इन दावों में से कई की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

राजनीति में एंट्री के बाद ‘छोटे सरकार’ का नया चेहरा‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह की कहानी सिर्फ अपराध और विवाद की कहानी नहीं है। राजनीति में आने के बाद उन्होंने चुनावी मैदान में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई।मोकामा में उनकी लोकप्रियता और प्रभाव को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। यही वजह है कि वह जेल में हों या चुनाव मैदान में, उनका नाम मोकामा की राजनीति के केंद्र में बना रहा। 2025 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने जेडीयू प्रत्याशी के तौर पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। बाद के राजनीतिक घटनाक्रम में पार्टी से दूरी और अनुशासनात्मक कार्रवाई ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया।

एमएलसी चुनाव में अनुज के साथ खड़े होकर फिर चर्चा में‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

2026 के बिहार विधान परिषद चुनाव ने अनंत सिंह की राजनीतिक भूमिका को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।पटना स्नातक सीट पर जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में वह खुलकर मैदान में उतरे। उन्होंने कई जगह प्रचार किया और नतीजे को लेकर भी बेहद आत्मविश्वास दिखाया।लेकिन नतीजा आया तो जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत दर्ज कर ली।इसके बाद सवाल उठा—क्या अनंत सिंह का प्रभाव चुनावी वोट में बदल नहीं पाया? इसके जवाब में उन्होंने यह कहा भी की वह खुद नहीं जानते थे की अनुज कौन है उन्हें तो बस इस बात की नाराजगी थी की नीरज कुमार ने दुलारचंद हत्याकांड का मामला दिल्ली पहुंचा दिया और इसी खुनस में मैंने MLC चुनाव में प्रचार किया वरना मुझे तो इस चुनाव की तैयारी के लिए समय भी नहीं मिला और इस चुनाव से ख़ास कोई मतलब नहीं रहता है। इसके बाबजूद ‘छोटे सरकार’ की राजनीतिक ताकत और उनके चुनावी प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई।

आखिर अनंत सिंह इतने चर्चित क्यों रहते हैं?‘हम सरकार हैं’ से ‘तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’टोपी-चश्मा-सिगरेट से लेकर ठेठ अंदाज तक… आखिर क्यों हर बार सुर्खियों में आ जाते हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत सिंह की लोकप्रियता या विवाद को सिर्फ एक वजह से समझना मुश्किल है।उनकी कहानी में कई परतें हैं—पहली परत: मोकामा की स्थानीय राजनीति और मजबूत जनाधार।दूसरी परत: आपराधिक मामलों और पुराने विवादों की लंबी चर्चा। तीसरी परत: करोड़ों की संपत्ति और चुनावी हलफनामे।चौथी परत: ठेठ देसी भाषा और बिना घुमाए जवाब देने की शैली।पांचवीं परत: समर्थकों और सुरक्षा घेरे के बीच उनकी अलग सार्वजनिक छवि।छठी परत: मीडिया के सवालों पर कई बार तीखी प्रतिक्रिया।और सबसे अहम—उनकी कहानी में हर घटना के साथ कोई न कोई ऐसा दृश्य या बयान जुड़ जाता है, जो लोगों की जुबान पर चढ़ जाता है।यही वजह है कि अनंत सिंह की राजनीति सिर्फ चुनावी आंकड़ों से नहीं समझी जा सकती।


मोकामा के ‘छोटे सरकार’ की कहानी दरअसल बिहार की उस राजनीति की कहानी भी है, जहां नेता की छवि, स्थानीय प्रभाव, पुराना इतिहास, दबंग अंदाज और चुनावी गणित—सब मिलकर एक अलग राजनीतिक किरदार तैयार करते हैं।अनंत सिंह इसी किरदार का एक बेहद चर्चित उदाहरण हैं।और शायद यही वजह है कि चुनाव हारने के बाद भी उनकी चर्चा खत्म नहीं होती—बल्कि कई बार यहीं से एक नई कहानी शुरू होती है।