VAISHALI: हाजीपुर में क्षत्रिय समाज के एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन ने जनता दल यूनाइटेड (JDU) को लेकर बड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पार्टी के भीतर सक्रिय कुछ नेताओं पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए। आनंद मोहन ने कहा कि जेडीयू में ऐसे 22 नेता हैं, जिनका न तो पार्टी से कोई लगाव है और न ही नेतृत्व के प्रति कोई वफादारी। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग पार्टी के अंदर अपना-अपना गिरोह चलाते हैं और संगठन को कमजोर और खोखला कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जिस तरह चंबल के जंगलों में डाकुओं के गिरोह हुआ करते थे, उसी तरह आज राजनीतिक दलों में भी कुछ लोगों ने अपना गिरोह बना लिया है। पार्टी में दलालों की संख्या बढ़ती जा रही है। जेडीयू के निर्माण में हमारा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जब पार्टी बन रही थी तब कुछ ही लोग साथ थे, लेकिन आज पार्टी मजबूत हो गई है तो उसका लाभ उठाने के लिए कई लोग सामने आ गए हैं।"
पूर्वजों की कुर्बानी का किया जिक्र
अपने संबोधन में आनंद मोहन ने परिवार की राजनीतिक विरासत और संघर्षों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने समाज और राजनीति के लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने कहा, "एक समय हमारे परिवार के पास 400 बीघा जमीन थी, लेकिन राजनीतिक संघर्ष और जनसेवा के लिए 300 बीघा जमीन बेचनी पड़ी। आज तीनों दादाओं के हिस्से में मात्र 35-35 बीघा जमीन बची है।"
आनंद मोहन ने कहा कि क्षत्रिय समाज हमेशा शोषित, वंचित और दबे-कुचले लोगों के संरक्षण के लिए खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि अब उनकी उम्र 72 वर्ष हो चुकी है, बेटा विधायक है और उन्हें परिवार के साथ समय बिताना चाहिए, लेकिन पूर्वजों की कुर्बानियों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को देखते हुए वे अब भी सक्रिय राजनीति में संघर्ष कर रहे हैं।
बिना नाम लिए जेडीयू नेताओं पर साधा निशाना
आनंद मोहन ने दरभंगा एयरपोर्ट के आसपास की जमीनों का जिक्र करते हुए कुछ नेताओं पर अप्रत्यक्ष हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग, जो कभी पंचायत चुनाव तक नहीं जीत सकते थे, आज करोड़ों-अरबों रुपये की संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने सत्ता और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अकूत संपत्ति अर्जित की है। हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को जेडीयू के भीतर के कुछ प्रभावशाली नेताओं पर हमला माना जा रहा है।
टिकट वितरण पर भी उठाए सवाल
आनंद मोहन ने कहा कि जेडीयू में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें पहले पार्टी में लाया गया, फिर टिकट दिया गया और बाद में सदस्य बनाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों का पार्टी के निर्माण और संघर्ष में कोई योगदान नहीं रहा, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और टिकट कैसे मिल गए। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर अब कई ऐसे सच सामने आ रहे हैं, जिन्हें जनता के सामने लाना जरूरी है। उनका संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और पार्टी की मूल विचारधारा को बचाने के लिए है।
बेटे चेतन आनंद को मंत्री पद नहीं मिलने से नाराजगी की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि आनंद मोहन अपने बेटे और जेडीयू विधायक चेतन आनंद को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनके हालिया बयानों को पार्टी नेतृत्व और संगठन के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। आनंद मोहन के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू नेतृत्व उनकी टिप्पणियों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
हाजीपुर से मुन्ना खान की रिपोर्ट





