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प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अलख एन. शर्मा को केंद्र सरकार ने सौंपी अहम जिम्मेवारी: उच्चस्तरीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

केंद्र सरकार ने बिहार के प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. अलख एन. शर्मा को श्रम बाजार सांख्यिकी को मजबूत करने के लिए गठित उच्चस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है।

Bihar News
प्रो. अलख एन. शर्मा को अहम जिम्मेवारी
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Mukesh Srivastava
5 मिनट

DELHI:  बिहार के रहने वाले प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ अलख नारायण शर्मा को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अहम जिम्मेवारी सौंपी है.  भारत सरकार ने डॉ अलख नारायण शर्मा को श्रम बाजार की सांख्यिकी को मजबूत करने के लिए गठित उच्चस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है. प्रो. शर्मा वर्तमान में इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट (IHD), नई दिल्ली के निदेशक हैं.


सरकार द्वारा गठित इस समिति का मुख्य उद्देश्य देश के श्रम बाजार और रोजगार संबंधी संकेतकों को और अधिक सुदृढ़ बनाना, उनकी समय-समय पर समीक्षा करना तथा श्रम बाजार की तेजी से बदलती संरचना का सही तरीके से आकलन करना है. समिति विशेष रूप से सूक्ष्म, समयबद्ध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय आंकड़ों की बढ़ती मांग को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करेगी.


आज के दौर में तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों, गिग इकोनॉमी और प्लेटफॉर्म आधारित श्रम के विस्तार तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आगमन के कारण श्रम बाजार में जो व्यापक बदलाव आ रहे हैं, उनके मद्देनजर यह समिति अत्यंत प्रासंगिक और महत्वपूर्ण मानी जा रही है. समिति में देश के प्रमुख श्रम अर्थशास्त्रियों के साथ-साथ भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जो इसे एक बहु-आयामी और व्यावहारिक समिति बनाते हैं.


बिहार के रहने वाले हैं अलख एन. शर्मा

प्रो. अलख एन. शर्मा बिहार के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पटना स्थित ए.एन. सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान में अध्यापन से की, जहां उन्होंने कई वर्षों तक सेवा की. इस दौरान उन्होंने बिहार के आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं से जुड़े मुद्दों पर गहन शोध कार्य किया. उनके शोध कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है.वर्तमान में प्रो. शर्मा इंडियन सोसाइटी ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स (ISLE) के अध्यक्ष तथा प्रतिष्ठित शोध पत्रिका इंडियन जर्नल ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स (IJLE) के संपादक भी हैं. श्रम अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके योगदान को व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है. वे श्रम बाजार, रोजगार नीतियों, मानव विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर दर्जनों पुस्तकें और शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं.


केंद्र ने क्यों बनाई समिति

दरअसर, भारत में श्रम सांख्यिकी लंबे समय से चुनौतियों का सामना कर रही है। पारंपरिक रोजगार सर्वेक्षणों में गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म इकोनॉमी के श्रमिकों, घरेलू उद्यमों और अनौपचारिक क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को पूरी तरह शामिल नहीं किया जा पाता था। साथ ही, AI और ऑटोमेशन के कारण नौकरियों की प्रकृति में जो परिवर्तन आ रहा है, उसे पकड़ने के लिए आधुनिक, विस्तृत और त्वरित डेटा की जरूरत महसूस की जा रही थी। इस समिति के गठन से उम्मीद है कि श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS), समय-उपयोग सर्वेक्षण, उद्यम सर्वेक्षण और अन्य आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा। समिति अंतरराष्ट्रीय मानकों (जैसे ILO की सिफारिशों) के अनुरूप डेटा संग्रह पद्धतियों को अपडेट करने, नई श्रेणियों को परिभाषित करने और डेटा की उपलब्धता को बढ़ाने पर भी ध्यान देगी।


विशेषज्ञों ने किया स्वागत

श्रम अर्थशास्त्र के क्षेत्र के कई विशेषज्ञों ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि प्रो. शर्मा का व्यावहारिक अनुभव, बिहार जैसे पिछड़े राज्यों पर उनके शोध और नीति निर्माण में उनकी समझ इस समिति को सही दिशा प्रदान करेगी। IHD संस्थान भी इस नियुक्ति को संस्थान के लिए गौरव का विषय मान रहा है।प्रो. शर्मा ने इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे समिति के माध्यम से श्रम बाजार की वास्तविक तस्वीर को उजागर करने और नीति निर्माताओं को बेहतर निर्णय लेने में सहायक डेटा उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे।यह नियुक्ति भारत की श्रम नीतियों को और अधिक डेटा-आधारित और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, खासकर उस समय जब देश आत्मनिर्भर भारत और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का लक्ष्य रख रहा है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता