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02-Feb-2025 07:14 AM
By First Bihar
सनातन धर्म में पूजा-पाठ का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि यह भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। पूजा के दौरान विधि-विधान का पालन करने से मनुष्य की जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। हालांकि, पूजा के कुछ नियम ऐसे होते हैं, जिनका पालन करके हम अपने जीवन को और भी बेहतर बना सकते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि मंदिर से लौटते समय घंटी नहीं बजानी चाहिए।
क्यों नहीं बजानी चाहिए मंदिर से लौटते समय घंटी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब हम मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो हमारे साथ अच्छे और बुरे विचार भी हमारे भीतर प्रवेश करते हैं। जब हम मंदिर के द्वार पर घंटी बजाते हैं, तो उससे निकलने वाली तरंगें हमारे अंदर की सारी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देती हैं। साथ ही, जब हम पूजा या दर्शन करते हैं, तो हमारे भाव शुद्ध हो जाते हैं और मंदिर में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा हमारे अंदर प्रवेश कर जाती है। लेकिन जब हम मंदिर से लौटते हैं और घंटी बजाते हैं, तो यह हमारी सकारात्मक ऊर्जा को भ्रमित कर सकती है और नष्ट कर देती है।
इसके अलावा, जब हम मंदिर से बाहर निकलते हैं, हमारा मुंह बाहर की ओर होता है, जिससे मंदिर के बाहर की नकारात्मक ऊर्जा हमारे अंदर प्रवेश कर सकती है। इस कारण से मंदिर से लौटते समय घंटी बजाना वर्जित माना जाता है, ताकि हमारी पूजा का पुण्य और सकारात्मकता नष्ट न हो जाए और बाहर की नकारात्मक ऊर्जा हमारे जीवन में प्रवेश न कर सके।
घंटी का महत्व
मंदिर में घंटी बजाने का एक और महत्वपूर्ण कारण यह है कि घंटी बजाने से भगवान की मूर्तियों की चेतना को जागृत किया जाता है। घंटी के बजने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साथ ही, यह शुभता का प्रतीक मानी जाती है। इसे शुभकामनाओं और पूजा की शुरुआत के तौर पर बजाया जाता है, जो मंदिर में प्रवेश से पहले सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में मदद करती है।
इसलिए, हमें ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर में प्रवेश करते समय घंटी बजाना शुभ होता है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। लेकिन मंदिर से लौटते समय घंटी न बजाने की परंपरा का पालन करके हम अपनी प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा को सुरक्षित रख सकते हैं।